राजनीति लेख खुलने लगे स्कूल, हो न जाये भूल | January 3, 2021 / January 3, 2021 | Leave a Comment 1 जनवरी से केरल, कर्नाटक और असम के स्कूलों को दोबारा से खोला गया है। बिहार सरकार के आदेशानुसार 4 जनवरी 2021 से राज्य भर के सभी सरकारी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को खोल दिया जाएगा। महाराष्ट्र में 9वीं से 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए 4 जनवरी से स्कूलों को खोला जाएगा। इनमें […] Read more » schools are opening amid corona खुलने लगे स्कूल
कविता बुरे समय की आंधियां ! December 30, 2020 / December 30, 2020 | Leave a Comment तेज प्रभाकर का ढले, जब आती है शाम !रहा सिकन्दर का कहाँ, सदा एक सा नाम !! उगते सूरज को करे, दुनिया सदा सलाम !नया कलेंडर साल का, लगता जैसे राम !! तिनका-तिनका उड़ चले, छप्पर का अभिमान !बुरे समय की आंधियां, तोड़े सभी गुमान !! तिथियां बदले पल बदले, बदलेंगे सब ढंग !खो जायेगा […] Read more » बुरे समय की आंधियां
राजनीति राजनीति में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी December 26, 2020 / December 26, 2020 | Leave a Comment एक देश का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितना युवा है। 15-24 वर्ष के बीच के सभी युवा, आमतौर पर कॉलेज जाने वाले छात्र होते हैं। उनके करियर विकल्प में इंजीनियर, डॉक्टर, शिक्षक, खेल, रक्षा और कुछ उद्यमी शामिल हैं। विशेष रूप से भारत के संदर्भ में, राजनीति को कैरियर विकल्प के रूप में बहुत कम लिया […] Read more » Lack of talented youth in politics is the danger bell for democracy राजनीति में प्रतिभाशाली युवाओं की कमी
कविता सौरभ तुम बेकार || December 6, 2020 / December 6, 2020 | Leave a Comment वक्त पड़े तो फूल हम, दीखते समझदार |कह दी सच्ची बात तो, सौरभ तुम बेकार || बस अपनी ही हांकता, करता लम्बी बात |सौरभ ऐसा आदमी, देता सबको घात || जिसने सच को त्यागकर, पाला झूठ हराम |वो रिश्तों की फसल को, कर बैठा नीलाम || दुश्मन की चालें चले, रहकर तेरे साथ |सौरभ तेरी […] Read more » सौरभ तुम बेकार
कविता बीती अपने आप पर November 22, 2020 / November 22, 2020 | Leave a Comment बैठ न सौरभ हार के, रखना इतना ध्यान !चलने से राहें खुले, हो मंजिल का भान !! सुख में क्या है ढूंढ़ता, तू अपनी पहचान !संघर्षों में जो पले, बनते वही महान !! संबंध स्वार्थ से जुड़े, कब देते बलिदान !वक्त पड़े पर टूटते, शोक न कर नादान !! आंधी या बरसात हो, सहते एक […] Read more » Past on its own
महिला-जगत लेख विधि-कानून कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है November 10, 2020 / November 10, 2020 | Leave a Comment लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है प्रियंका सौरभ लैंगिक असमानता हमारे समाज में […] Read more » Gender sensitization लिंग संवेदीकरण
विश्ववार्ता उदारता की बजाय पड़ोस में सजगता की जरूरत है। November 2, 2020 / November 2, 2020 | Leave a Comment —-प्रियंका सौरभ पड़ोस में शांति हो, तो इन्सान चैन की नींद सोता है, लेकिन यह शांति तभी बनी रह सकती है, जब पड़ोसी के साथ-साथ हम भी शांति के पक्षधर हों और ये समझ आ जाये कि क्या पडोसी शांति के लायक है? वर्चस्व की जंग हमेशा शांति को मारने का काम करती है। फिजूल […] Read more » There is a need for alertness in the neighborhood rather than generosity. चीन और नेपाल के साथ "क्षेत्रीय विवाद" भारत की पड़ोस नीति
राजनीति सबको जन्नत नसीब होने पर कश्मीर के खुराफाती बेचैन क्यों है ? October 29, 2020 / October 29, 2020 | Leave a Comment —-प्रियंका सौरभ हाल ही में केंद्र ने भारतीय नागरिकों के लिए संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A के निरस्त होने के एक साल बाद कई कानूनों में संशोधन करके जम्मू-कश्मीर में सभी भारतीयों के जमीन खरीदने का तोहफा दिया है। पिछले साल अगस्त में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने से पहले, […] Read more » कश्मीर के खुराफाती बेचैन फारूख अब्दुल्ला महबूबा मुफ़्ती
लेख समाज मैला ढोने वालों की दुर्दशा October 26, 2020 / October 26, 2020 | Leave a Comment 28 साल पहले एक कानून के माध्यम से इस पर प्रतिबंध लगाने एवं तकनीकी प्रगति के बावजूद, मानव अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता पैदा करने वाली , मैनुअल स्कैवेंजिंग भारत में बनी हुई है। मैनुअल स्कैवेंजिंग का तात्पर्य किसी भी तरीके से मैन्युअल रूप से सफाई करने, शुष्क शौचालयों और सीवरों से मानव उत्सर्जन ले जाने, […] Read more » Plight of scavengers मैनुअल स्कैवेंजिंग मैला ढोने वालों की दुर्दशा
महिला-जगत लेख क्यों भय के दुष्चक्र में है भारत की निर्भयाएं ? October 21, 2020 / October 21, 2020 | Leave a Comment भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित मामलों के के निपटान, महिला सुरक्षा उपायों और हैंडलिंग के लिए दुनिया भर में आलोचना की जा रही है। 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले में काफी हंगामे के बाद भी, हमने कठुआ मामले, हैदराबाद केस, उन्नाव केस और हाथरस केस की हिंसा को देखा है। यह सूची […] Read more » 2012 के दिल्ली गैंगरेप मामले उत्पीड़न और भेदभाव से मुक्त उन्नाव केस और हाथरस केस कठुआ मामले घरेलू हिंसा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे भय के दुष्चक्र में है भारत की निर्भयाएं महिलाओं को हिंसा हैदराबाद केस
लेख समाज बच्चों के स्कूल नहीं लौटने का खतरा एक गंभीर चेतावनी October 16, 2020 / October 16, 2020 | Leave a Comment —प्रियंका सौरभ संयुक्त राष्ट्र की नीति के अनुसार शिक्षा पर महामारी के प्रभाव और सीओवीआईडी -19 की आर्थिक गिरावट के कारण 24 मिलियन बच्चों के स्कूल नहीं लौटने का खतरा अब सच में बदल गया है। उन्होंने कहा कि शैक्षिक वित्तपोषण का अंतर भी एक तिहाई बढ़ने की संभावना है। दुनिया भर में 1.6 अरब […] Read more » child abuse amid corona increased children not returning to school amid corona pandemic गर्भावस्था बच्चों के स्कूल बाल विवाह लिंग आधारित हिंसा विश्व बैंक
कविता अपने काँटों से लगे, और पराये फूल !! October 12, 2020 / October 12, 2020 | Leave a Comment प्रियंका सौरभ हाथ मिलाते गैर से, अपनों से बेजार।सौरभ रिश्ते हो गए, गिरगिट से मक्कार।। अपनों से जिनकी नहीं, बनती सौरभ बात !ढूंढ रहे वो आजकल, गैरों में औकात !! उनका क्या विश्वास अब, उनसे क्या हो बात !सौरभ अपने खून से, कर बैठे जो घात !! चूहा हल्दी गाँठ पर, फुदक रहा दिन-रात !आहट […] Read more » अपने काँटों से लगे और पराये फूल