विविधा धार्मिक उन्माद फैला रहा है जॉन दयाल February 11, 2011 / December 15, 2011 | 1 Comment on धार्मिक उन्माद फैला रहा है जॉन दयाल जैसे-जैसे नर्मदा कुम्भ की तारीख नजदीक आ रही है, मध्यप्रदेश के ईसाई नेताओ की घबराहट ब़ढ रही है। नर्मदा के किनारे आयोजित किए जा रहे इस मॉं नर्मदा सामाजिक कुंभ की व्यापक पैमाने पर तैयारियां चल रही हैं। यह आयोजन धर्म के प्रति आस्था व श्रद्धा पक्की करने, राष्ट्रीय एकात्मता और एकता का भाव जगाने […] Read more » Ma Narmada मां नर्मदा सामाजिक कुंभ
विविधा यह क्या हो रहा है? February 9, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’ लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में जनता द्वारा शासन को सुचारू चलाने के लिए एक तंत्र का निर्माण किया जाता है और आमजन अपने इस तंत्र से उम्मीद करता है कि वह आमजन की परेशानी को समझे और उसको दूर करने के उपाय करे। लेकिन जब राज चलाने वाला यही तंत्र राज काज में […] Read more »
विविधा आत्मशोधन, आत्मनिरीक्षण और आत्मपरीक्षण February 9, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment नंदलाल शर्मा आज के समय में गाँधी के आदर्श और उनके मूल्यों की जरूरत हर किसी को हो रही हैं। देश में बढ़ती हिंसा और अमीर गरीब के बीच बढ़ती खाई ने गाँधी के बताये रास्तों पर चलने वालों के माथे पर शिकन की लकीरें खींच दी हैं। आज गाँधी के ग्राम स्वराज की कल्पना […] Read more » Atmsodn आत्मशोधन
प्रवक्ता न्यूज़ पत्रकारिता विवि में मनाई गई बसंत पंचमी व निराला जयंती February 9, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment भोपाल, 8 फरवरी । माखनलाल पत्रकारिता विवि में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर मंगलवार को सरस्वती पूजा एवं महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की जयंती मनाई गई। मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के बाद विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मां शारदे वरदान दे , हमको नए नित ज्ञान दे , गीत […] Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
प्रवक्ता न्यूज़ अपनी आत्मा व आवाज दोनों खो चुकी है पत्रकारिता : श्याम खोसला February 9, 2011 / December 15, 2011 | 2 Comments on अपनी आत्मा व आवाज दोनों खो चुकी है पत्रकारिता : श्याम खोसला भोपाल, 7 फरवरी। इंडियन मीडिया सेंटर के निदेशक और मीडिया क्रिटिक के संपादक श्याम खोसला (दिल्ली) का कहना है कि वर्तमान युग में पत्रकारिता अपनी आत्मा और आवाज दोनों खो चुकी है। अपनी आत्मा नहीं बेचने वाले उंगलियों पर गिने जा सकते हैं। कही। वे यहां माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में ‘संपादक […] Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
प्रवक्ता न्यूज़ भविष्य का मीडिया और समाज February 7, 2011 / December 15, 2011 | 2 Comments on भविष्य का मीडिया और समाज पूजा श्रीवास्तव लोकतंत्र का पहरेदार, चौथा स्तम्भ-प्रेस भविष्य में क्या रूप इख्तियार करेगा इस बात ने हर किसी को अपने पाष में बांध रखा है। मीडिया के हितों की चिंता करने वालों में एक वर्ग ऐसा भी है जो वर्तमान स्थितियों में समाचार पत्रों के अस्तित्व को संकट में मानता है तो दूसरा वर्ग मीडिया […] Read more » media मीडिया
विविधा असुरक्षित युवा शक्ति February 7, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment संजय सक्सेना इस समय देश ‘युवा’ सा लगता है। सभी राजनैतिक दलों में युवा नेताओं का बोलबाला है। बीते कुछ सालों की बात की जाए तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि मल्टीनेशनल कम्पनियों ने भारतीय युवाओं के लिए काफी तादात में काम के नए अवसर प्रदान किए हैं।लोगो के जीवन स्तर बढ़ा है। शिक्षा […] Read more » Youth Power युवा शक्ति
राजनीति राजनीति का शिकार न हो जाए एकलव्य February 7, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment विनोद उपाध्याय एकलव्य हूँ मैं ढूँढ़ता हे द्रोण कहाँ हो , एकाकी शर संधान से हे तात ! उबारो। प्रश्न नहीं मेरे लिये बस एक अंगूठा , कर लिये कृपाण हूँ लो हाथ स्वीकारो। है चाह नहीं देव ! अर्जुन की धनुर्धरता , एकलव्य ही संतुष्ट मैं बस शिष्य स्वीकारो। श्रीकांत मिश्र कांत की पंक्तियां […] Read more » Madhya pradesh एकलव्य आवासीय विद्यालय मध्यप्रदेश
विविधा नोट उगलती तिजोरियां और मरते किसान February 5, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment रवीन्द्र जैन मध्यप्रदेश में किसान पुत्र की सरकार में यह क्या हो रहा है? कर्ज से लदे किसान आत्महत्या कर रहे हैं और नेताओं अफसरों और उनके रिश्तेदारों की तिजोरियां नोट और सोना उगल रहीं हैं। राम के आदर्श और पं. दीनदयाल उपाध्याय के संदेश को लेकर सत्ता में आई भाजपा के शासनकाल में भ्रष्टाचार […] Read more » SUICIDING FARMERS किसान आत्महत्या मध्यप्रदेश
राजनीति राजनेता नहीं चाहते चुनाव सुधार! February 5, 2011 / December 15, 2011 | 2 Comments on राजनेता नहीं चाहते चुनाव सुधार! संजय सक्सेना हिन्दुस्तान की जनता वर्षों से चुनाव प्रक्रिया में सुधार का सपना पाले हुए है। उसे इस बात का हमेशा रंज और गम रहता है कि हमारे राजनेताओं ने लोकतंत्र को लूटतंत्र बना कर रख दिया है। राजनेताओं की छवि जनमानस में कैसी है यह बात किसी से छिपी नहीं है,लेकिन हमारे नेताओं पर […] Read more » POLITICAL PARTIES DONT WANT REFORM IN ELECTION राजनेता नहीं चाहते चुनाव सुधार
कविता कविता/ तलाश February 5, 2011 / December 15, 2011 | 1 Comment on कविता/ तलाश पाकिस्तान व चीन का हर बड़ा शहर अब हमारी तरकश की मार की पहुंच में है हमारे देश में हर साल उग आते हैं अनेकों अरबपति सासंदों की आय हो जाती है हर साल दोगुना एक अम्बानी अपनी पत्नी को उसके जन्म दिन पर भेंट दे देता है एक उड़नखटोला…….. चन्द्रमा पर पानी की गम्भीर […] Read more » poem कविता/ तलाश
राजनीति बसपा के दो ‘दिग्गज’ आमने-सामने February 5, 2011 / December 15, 2011 | Leave a Comment संजय सक्सेना उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका आजकल बसपा के दो दिग्गजों के बीच वर्चस्व का अखाड़ा बना हुआ है। एक-दूसरे को नीचा दिखाने की मुहिम में लगे इन नेताओं के कारण बसपा को यहां हर तरह से नुकसान उठाना पड़ रहा है। कभी यहां कांग्रेस का परचम लहराता था,इसके बाद सपा ने यहां खूब […] Read more » giants of bspa face to face बसपा