विविधा माखनलाल विश्वविद्यालय में हंगामा प्रकरण: सिंहों की लड़ाई में फंसे मुलाजिम August 26, 2010 / December 22, 2011 | 12 Comments on माखनलाल विश्वविद्यालय में हंगामा प्रकरण: सिंहों की लड़ाई में फंसे मुलाजिम सबके अपने स्वार्थ, सबके अपने तर्क भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आजकल हंगामा बरपा है। हंगामा दो ‘सिंहों’ – श्रीकांत सिंह और पुष्पेन्द्रपाल सिंह के कारण है। इसके लिए दोनों ने अपनी अक्ल और शक्ल का भरपूर फायदा उठाया। व्यक्तिगत स्वार्थ को साधने के लिए ‘बेचारे कर्मचारियों’ को बलि का बकरा बनाया गया। […] Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay बीके कठियाला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
स्वास्थ्य-योग जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित August 26, 2010 / December 22, 2011 | 4 Comments on जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित -त्रिलोक चन्द्र भट्ट हिमाच्छादित पर्वत शिखर और नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारने वाले यात्री तीर्थाटन व पर्यटन के लिए ही प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हरिद्वार को जानते हैं लेकिन अब वह यह भी जानने लगे हैं कि इस पर्वतीय प्रदेश को कुदरत ने जड़ी-बूटियों के रूप में जो अकूत खजाना दिया है वह भारत के किसी […] Read more » Ayurved आयुर्वेद
समाज बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो? August 25, 2010 / December 22, 2011 | 2 Comments on बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो? -के. विक्रम राव बुर्के पर प्रतिबंध के मुद्दे पर भारत के प्रगतिषील और सेक्युलर समझवाले लोग, विषेषकर समाजवादी और माक्र्सवादी पार्टियों के पुरोधाजन, चुप्पी साधे हैं। उनकी सोच दुहरी है, दबाव वोट का है। मसलन भारत के सोशलिस्ट भी अपने फ्रेंच हमराहियों की भांति बुर्के की बात पर निर्विकार हो गये हैं। वर्ना इस मौजूं […] Read more » Secular बुर्का
विविधा खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान August 25, 2010 / December 22, 2011 | 5 Comments on खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान – भरतचंद्र नायक अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद 1992 में मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तत्कालीन नरसिंहराव सरकार ने भंग कर एकतरफा कार्यवाही का संकेत दिया। बाद में हुए चुनावों में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में बनी और दस वर्षों में इतनी निरंकुश […] Read more » Developement विकास
पर्यावरण दुश्वारियों में अनवाल August 25, 2010 / December 22, 2011 | 1 Comment on दुश्वारियों में अनवाल -त्रिलोक चन्द्र भट्ट गाँधी आश्रम से लेकर वस्त्र विक्रेताओं की विभिन्न दुकानों पर पर्वतीय भेड़ों से प्राप्त ऊन से बने सुन्दर स्वेटर, दन, चुकटे व थुलम देशी-विदेशी पर्यटकों को खूब लुभाते हैं। उत्तराखण्ड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, गोपेश्वर आदि जिलों में आयोजित मेलों में स्थानीय ऊन से बनी वस्तुओं का अच्छा कारोबार होता है और […] Read more » Enviroment अनवाल
कविता कविता/जी लेने दो August 25, 2010 / December 22, 2011 | 3 Comments on कविता/जी लेने दो -अनामिका घटक कतरा-कतरा ज़िंदगी का पी लेने दो बूँद बूँद प्यार में जी लेने दो हल्का-हल्का नशा है डूब जाने दो रफ्ता-रफ्ता “मैं” में रम जाने दो जलती हुई आग को बुझ जाने दो आंसुओं के सैलाब को बह जाने दो टूटे हुए सपने को सिल लेने दो रंज-ओ-गम के इस जहां में बस लेने […] Read more » poem कविता
विविधा फिर तो घुंसू का भी छूट जाएगा स्कूल August 23, 2010 / December 22, 2011 | 1 Comment on फिर तो घुंसू का भी छूट जाएगा स्कूल -आशीष मध्यप्रदेश के घुंसू को नहीं पता कि उसका भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है। वह ही क्या बांधवगढ़ नेशनल पार्क के बफर एरिया में बसे दो गांव के घुंसू जैसे सैकड़ों बच्चे इस बात से अनजान हैं। इन बच्चों का नहीं मालूम कि देश के नौनिहालों को शिक्षा पाने का अधिकार मिला हुआ है। […] Read more » School स्कूल
राजनीति जम्मू-कश्मीर की मूल समस्या और उसका संवैधानिक समाधान August 23, 2010 / December 22, 2011 | 57 Comments on जम्मू-कश्मीर की मूल समस्या और उसका संवैधानिक समाधान – धाराराम यादव देश की स्वतंत्रता ब्रिटिश संसद द्वारा पारित भारतीय स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत प्राप्त हुई जिसके अनुसार तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के आधीन भारत को दो भागों में विभाजित करके दोनों भागों को डोमिनियन स्टेट्स प्रदान किया गया था। जिसमें से एक का नाम भारत एवं दूसरे का पाकिस्तान रखा गया। देश […] Read more » Jammu Kashmir जम्मू-कश्मीर
विविधा बीमा क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के नए रूप August 23, 2010 / December 22, 2011 | 1 Comment on बीमा क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के नए रूप – हरिकृष्ण निगम सच देखा जाए तो हम आज अपराधों की एक नई प्रकृति की दुनियां में जी रहे हैं। यह वे सफेदपोश अपराध हैं कि जिसकी धोखाधड़ी में न तो हिंसा है, न खून बहाना, न बंदूक या पिस्तौल और न ही घायलों या मृतकों की संख्या। पर ऐसे अपराधी हमारे बीच में स्वयं […] Read more » Corruption भ्रष्टाचार
धर्म-अध्यात्म ईश्वर या ब्रह्म होना सबकी संभावना है August 23, 2010 / December 22, 2011 | 4 Comments on ईश्वर या ब्रह्म होना सबकी संभावना है – हृदयनारायण दीक्षित ऋग्वेद के ऋषि संसार में उल्लास देखते थे। तब संसार में उल्लास था भी। तब धन और संपदा जीवन निर्वाह के साधन थे। मुद्रा का प्रभाव आज जैसा नहीं था। मुद्रा के प्रभाव से ही धनसंग्रही लोलुपता बढ़ती। जीवन दुःखमय होता गया। वैदिक ऋषियों ने संसार को दुखमय नहीं कहा था लेकिन […] Read more » God ईश्वर ब्रह्म
धर्म-अध्यात्म रुद्र शिव अखिल विश्व की महादेव प्रतीति August 23, 2010 / December 22, 2011 | 4 Comments on रुद्र शिव अखिल विश्व की महादेव प्रतीति – हृदयनारायण दीक्षित शिव सत्य हैं, सुन्दरतम् हैं। वे देवाधिदेव महादेव हैं, वे रुद्र हैं। वे परम हैं, लेकिन भोलेशंकर भी हैं। शिव हिन्दू दर्शन की निराली अनुभूति है। शिव अधिकांश विश्व के उपास्य हैं और समूची हिन्दूभूमि की आस्था हैं। विश्व के प्राचीनतम् ज्ञान अभिलेख ऋग्वेद में उनका उल्लेख 75 बार हुआ है। ऋषि […] Read more » Shiv शिव
प्रवक्ता न्यूज़ सरिस्का में बाघों के पुनर्वास से बंधी आस August 21, 2010 / December 22, 2011 | 2 Comments on सरिस्का में बाघों के पुनर्वास से बंधी आस -डॉ. राजेश कुमार व्यास एक मोटे अनुमान के अनुसार 20वीं सदी में बाघों की संख्या एक लाख से 97 प्रतिशत घट गई है। भारत की ही बात करें, हमारे यहां वर्ष 1989 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत देश में बाघों की संख्या 4 हजार 334 थी, जो 2001-2002 में घटकर 3 हजार 642 हो गई। […] Read more » Tiger बाघ सरिस्का