विश्ववार्ता युद्ध का दर्शन विकसित करना चाहिए December 13, 2009 / December 25, 2011 | 3 Comments on युद्ध का दर्शन विकसित करना चाहिए दुर्भाग्य से हम अपने एक पड़ोसी देश, जो कल तक इस देश का ही एक अंग था, के साथ ऐसी स्थिति में जीने के लिए मजबूर हो गये हैं, जिसमें स्त्रायुतोड़क तनाव में जीना इस देश की नियति बन गया है। यह तनाव केवल भारत का ही नहीं है, पाकिस्तान भी इसमें पूरी तरह डूबा […] Read more » War युद्ध
पर्यावरण कोपेनहेगन जलवायु वार्ता: जनपक्षीय और समग्र हिमालयी नीति जरूरी December 13, 2009 / December 25, 2011 | Leave a Comment संयुक्त राष्ट्र के कोपेनहेगन जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में आज दुनिया भर में जिस विषय पर यकायक चर्चा केन्द्रित हो गई है, वह विषय है तेजी से गरमाती धरती और वातावरण के कारण हो रहा जलवायु परिवर्तन। बाली से बार्सेलोना तक और ऋषिकेश से लेकर बेलम (ब्राजील) तक विभिन्न स्तरों पर जलवायु परिवर्तन […] Read more » Kopenhegan climate discussion कोपेनहेगन जलवायु वार्ता
राजनीति राष्ट्रीय एकता की समस्या : हिन्दू और मुसलमान December 12, 2009 / December 25, 2011 | 8 Comments on राष्ट्रीय एकता की समस्या : हिन्दू और मुसलमान आधुनिक भारत एक संप्रभु राष्ट्र है, लेकिन भीतर-भीतर तमाम अंतर्विरोध भी हैं। क्षेत्रीयताएं उपराष्ट्रीयताएं जैसी हैं, इनका और भी संकीर्ण राजनैतिकरण हुआ है। भाषाई हिंसा है। राष्ट्र-भाषा हिन्दी बोलने वाले असम में मार दिए जाते हैं और महाराष्ट्र में पीटे जाते हैं। जाति अलग अस्मिता है, जाति के दल हैं, दलों की पहचान जाति है। […] Read more » National Unity राष्ट्रीय एकता
खेत-खलिहान किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए December 10, 2009 / December 25, 2011 | 1 Comment on किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए आज किसान बहुत दुविधा में पड़ा है। वह चाहता है कि वह रासायनिक खाद से कैसे छुटकारा पाए ताकि उसकी धरती फिर से उपजाऊ हो। वह भुल सा गया है कि उनके पुरखे गोबर और गोमूत्र से खाद बनाकर इतने सम्पन्न थे कि उन्होंने आजादी की लड़ाइयों अर्थात 1857, 1905 और 1930 स्वतंत्रता आंदोलनों में […] Read more » Farmer किसान
प्रवक्ता न्यूज़ केले ने बढ़ायी कौशांबी की महत्ता December 10, 2009 / December 25, 2011 | Leave a Comment ऐतिहासिक नगरी कौशांबी आज अपने फल केले के कारण विश्व में चर्चा का केन्द्र बिन्दु बन गई है। ज्ञात हो कि कौशांबी का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों से अंकित है। आज यही कौशांबी अपने फल केले के कारण विश्व पटल पर चर्चा में है। विश्व प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश की कौशांबी केले की खेती […] Read more » Banana केले
धर्म-अध्यात्म विश्ववार्ता इस सदी के अंत तक यूरोप का इस्लामीकरण एक संभावना December 9, 2009 / December 25, 2011 | 6 Comments on इस सदी के अंत तक यूरोप का इस्लामीकरण एक संभावना विश्वविख्यात विचारक बर्नार्ड लिविस का पूर्वानुमान क्या 21 वीं शताब्दी के समाप्त होते-होते यूरोप का इस्लामीकरण हो जाएगा? क्या पश्चिम के अनेक देशों में जनसांख्यिक परिवर्तन के दबावों व आतंकवाद के बदलते स्वरूप के कारण सभ्याताओं के संघर्ष की अवधारणा एक संभावना बन सकती है? आज इन प्रश्नों को मात्र इतिहासकारों व समाजशास्त्रियों का अस्पष्ट […] Read more » Islamism इस्लामीकरण
राजनीति राज्य सभा में चौथी दुनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस December 8, 2009 / December 8, 2009 | Leave a Comment साप्ताहिक अखबार ‘चौथी दुनिया’ और इसके संपादक संतोष भारतीय पर राज्यसभा सदस्यों के सँज्ञान पर राज्य सभा ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेजा है. नोटिस देने वाले सांसदों और उनकी पार्टी के नाम हैं- अली अनवर (जद-यू), अजीज़ पाशा (सीपीआई), राजनीति प्रसाद (आरजेडी) और साबिर अली (लोकजनशक्ति पार्टी). इन सांसदों ने यह नोटिस उप-राष्ट्रपति और राज्यसभा […] Read more » Chauthi Duniya Rajya Sabha Santosh Bhartiya चौथी दुनिया राज्य सभा संतोष भारतीय
राजनीति भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह द्वारा 07 दिसम्बर, 2009 को लोकसभा में लिब्राहन रिपोर्ट पर दिए गए भाषण के मुख्य बिंदु December 7, 2009 / December 25, 2011 | 3 Comments on भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह द्वारा 07 दिसम्बर, 2009 को लोकसभा में लिब्राहन रिपोर्ट पर दिए गए भाषण के मुख्य बिंदु • माननीय अध्यक्ष महोदय, आज लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा को प्रारंभ करने के लिए प्रतिपक्ष की तरफ से मैं अपना प्रतिवेदन प्रारंभ कर रहा हूं। • 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह रिपोर्ट आज सदन के पटल पर है। इस रिपोर्ट में अनेक आपत्तिजनक एवं आधारहीन बातें हैं। भगवान राम को […] Read more » bjp भारतीय जनता पार्टी
मीडिया पत्रकारिता का अत्याधुनिक व क्रान्तिकारी रूवरूप – ‘ई जर्नलिज्म’ December 7, 2009 / December 25, 2011 | 1 Comment on पत्रकारिता का अत्याधुनिक व क्रान्तिकारी रूवरूप – ‘ई जर्नलिज्म’ ‘जब भी बोलना वक्त पर बोलना, मुद्दतों सोचना मुख्तसर बोलना। ‘ वाचिक परम्परा की इस सीख के साथ पत्रकारिता के पहले संवाददाता नारद, आद्य संपादक वेद व्यास, सर्वप्रथम लाइव टेलीकास्ट करने वाले महाभारत के संजय आदि से प्रारंभ होकर अपने स्वरूप में क्रमशः काफी परिवर्तन का साक्षी बना है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र, मुगलकाल के वाक्यानवीस […] Read more » Journalism पत्रकारिता
आर्थिकी राजनीति जैन साहब गरीब की इज्जत गली में मत लाओ December 4, 2009 / December 25, 2011 | Leave a Comment मध्यप्रदेश के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री पारस जैन की सोच के अनुसार यदि तख्तियां टांगने या घरों के सामने लिखने का काम किया जाये तो हर घर के सामने की दीवार मे नेम प्लेट की जगह किसी के घर मैं बेईमान हँ, मैं चोर हँ, मैं डकेत हँ, मैं राष्ट्रद्रोही हँ, मैं कामचोर हँ, मैं […] Read more » Respect of poor गरीब की इज्जत
आर्थिकी बांस बिन कैसे बजे वंशकारों की बांसुरी December 4, 2009 / December 25, 2011 | Leave a Comment न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। यह कहावत प्रदेश के लाखों वंशकारों की आजीविका पर आये संकट का हाल बंया करती है। बांस पर निर्भर रहने वाले इन बांस कारीगरों के लिये बांस वनों में न कोई जगह है और न ही राज्य सरकार की कार्ययोजना में। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत गठित होने वाली […] Read more » Flute बांस बांसुरी
राजनीति अम्बेडकर के समस्त विचारों का अधिष्ठान धर्म था December 4, 2009 / December 25, 2011 | 1 Comment on अम्बेडकर के समस्त विचारों का अधिष्ठान धर्म था सामाजिक समरसता के अभाव में समता का या तो निर्माण ही नहीं होगा और यदि जैसे-तैसे निर्माण हुआ भी तो वह अधिक समय तक टिकेगी नहीं। दलित बन्धुओं का नेतृत्व करने वाले डा. बाबा साहब अम्बेडकर के विचार इस संदर्भ में माननीय हैं। वे कहते हैं, ” मेरा सामाजिक तत्व ज्ञान निश्चित रूप से तीन […] Read more » Ambedkar अम्बेडकर