अकेलेपन की समस्या से जूझता समाज

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– ललित गर्ग- संचार के बढ़ते साधनों के बीच अकेलापन आधुनिक जीवन की त्रासदी बनती जा रही है। विडम्बनापूर्ण एवं भयावह अकेलापन आधुनिक जीवन की एक बड़ी सच्चाई है। यह न केवल भारत की समस्या है बल्कि दुनिया भी इससे त्रस्त एवं पीड़ित है। समस्या इतनी बड़ी है कि इससे निपटने के लिए ब्रिटिश सरकार… Read more »

तलाक के लिए कौन जिम्मेदार – अभिभावक, समाज या ज्योतिषी ?

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पं. दयानन्द शास्त्री आज नवविवाहित जोड़ों में 30 प्रतिशत दम्पति पहले दो साल के अन्दर ही तलाक लेने को क्यों प्रेरित हो जाते हैं। सबसे प्रथम दोष उन परिवारों का होगा जिनके अपने निवास या उनके बच्चों की ससुराल में रसोर्इ या निवास के उत्तर – पूर्व में आग गैस जलेगी। उनकी पुत्र – पुत्रवधु… Read more »

रंभाती संस्कृति को भूलता समाज

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गो-माता के विषय में यह तर्क देने की आवश्यकता हिन्दू समाज को नहीं है कि उससे हमको क्या-क्या फायदे हैं। समाचार-पत्र और पत्रिकाएं संभवतः स्मृतिहीन नई-पीढ़ी के लिये ही खनिज-लवण और पौष्टिक तत्वों की लिस्ट छापकर गाय के पक्ष में नारेबाजी करती रही हैं, और निष्कर्ष निकाले जाते हैं कि गाय क्योंकि हमारी आर्थिकी का… Read more »