Health खेल जगत मनोरंजन जीवन के लिए जरूरी साइकल का साथ June 1, 2026 / June 1, 2026 | Leave a Comment विश्व साइकिल दिवस Read more » विश्व साइकिल दिवस
महिला-जगत मीडिया लेख भारत में महिला सशक्तिकरण May 29, 2026 / May 29, 2026 | Leave a Comment भारत में महिला सशक्तिकरण Read more »
समाज कॉकरोच जनता पार्टी” के 2 करोड़ से अधिक सदस्य होने के निहितार्थ May 26, 2026 / May 26, 2026 | Leave a Comment कॉकरोच जनता पार्टी” के 2 करोड़ से अधिक सदस्य Read more » कॉकरोच जनता पार्टी” के 2 करोड़ से अधिक सदस्य
समाज एक आसन्न वैश्विक महासंकट की आहट और भविष्य की अंतिम आशा May 22, 2026 / May 22, 2026 | Leave a Comment गौधन (The Cownomics) एवंरूफटॉप फार्मिंग Read more » गौधन गौधन (The Cownomics) रूफटॉप फार्मिंग
समाज जेंडर भेदभाव में कैद लड़कियों के सपने May 19, 2026 / May 19, 2026 | Leave a Comment अभिलाषा कुमारीसीतामढ़ी, बिहार देश आज विकास, डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की बात कर रहा है। शहरों में लड़कियाँ इंजीनियर, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और वैज्ञानिक बन रही हैं। लेकिन भारत के अनेक ग्रामीण इलाकों में आज भी हजारों लड़कियों के सपने घर की चौखट से बाहर नहीं निकल पाते। स्कूल की ड्रेस पहनकर बड़े […] Read more » जेंडर भेदभाव में कैद लड़कियों के सपने
विश्ववार्ता भारत और नीदरलैंड में व्यापार को व्यापक बनाने व बढ़ावा देने के लिए अहम अनुबंध May 18, 2026 / May 18, 2026 | Leave a Comment इसी दिन मोदी जी नीदरलैंड के राजा और रानी के साथ दोपहर के भोजन आमंत्रित थे। नीदरलैंड के विदेश मंत्री टोम बेरेन्दसन व नीदरलैंड्स की शिखर कम्पनियों के सीईओ भी उनके साथ भोज में उपस्थित रहे। शाम को मोदी जी नीदरलैंड्स के युवा प्रधानमंत्री श्री रोब येत्तेन के साथ काट्सहाऊस में बैठक हुई। Read more » India and the Netherlands sign significant agreement to expand and promote trade भारत और नीदरलैंड में व्यापार
खान-पान खेत-खलिहान मंडियों में रुलता किसान देख ले May 18, 2026 / May 18, 2026 | Leave a Comment इन दिनों धान मंडियों में फसल की आवक अपने चरम पर है। रबी की फसल—जिसे पंजाबी में 'हाड़ी' कहा जाता है—के अप्रैल से शुरू होकर जून तक चलने वाले इस दौर में खरीद-फरोख्त Read more » मंडियों में रुलता किसान
शख्सियत महाराणा प्रताप : स्वाभिमान और संघर्ष की जीवित प्रेरणा May 11, 2026 / May 11, 2026 | Leave a Comment 9 मई 1540 को महाराणा प्रताप का जन्म हुआ। भारत के इतिहास में अनेक वीर योद्धा हुए, मातृभूमि की रक्षा के लिए असंख्य लोगों ने अपने प्राण न्योछावर किए लेकिन महाराणा प्रताप में कुछ ऐसा विशेष था कि पाँच सौ वर्षों बाद भी वे केवल इतिहास की पुस्तक का एक पात्र नहीं, बल्कि स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति की जीवित प्रेरणा के रूप में स्मरण किए जाते हैं। Read more » महाराणा प्रताप
राजनीति इस्तीफा नहीं दूंगी: धरना क्वीन ममता बनर्जी की यह नौटंकी क्यों ? May 7, 2026 / May 7, 2026 | Leave a Comment चालीस डिग्री से भी ज्यादा तापमान वाली भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बावजूद पश्चिम बंगाल के वोटर बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकले. वे जानते थे कि हर वोट मायने रखता है. और अब, बंगाल ने राहत की सांस ली है। Read more » धरना क्वीन ममता बनर्जी
प्रवक्ता न्यूज़ क्षत्रिय जिसने दुनिया को जागृति का मार्ग दिखाया May 4, 2026 / May 4, 2026 | Leave a Comment गजेंद्र सिंह सिद्धार्थ गौतम का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व लुम्बिनी (आज का नेपाल) में हुआ था। वे शाक्य कुल के क्षत्रिय थे। उनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के राजा थे। क्षत्रिय होने के नाते उनसे उम्मीद थी कि वे शासन करें, प्रजा की रक्षा करें और न्याय स्थापित करें। इसलिए बचपन से ही उन्हें एक महान राजा बनाने के लिए घुड़सवारी, धनुर्विद्या, शस्त्र चलाना और राजनीति की शिक्षा दी गई । कहा जाता है कि जन्म के समय ऋषि असित ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो महान सम्राट बनेगा या एक महान संत (बुद्ध)। राजा शुद्धोधन ने अपने पुत्र को हर तरह के दुःख से दूर रखने के लिए महल में सभी सुख-सुविधाएँ दीं । 29 वर्ष की आयु में जब सिद्धार्थ पहली बार नगर भ्रमण पर निकले, तो उन्होंने चार महत्वपूर्ण दृश्य देखे, एक वृद्ध व्यक्ति, एक रोगी, एक मृत शरीर और एक संन्यासी। इन दृश्यों ने उनके मन को गहराई से झकझोर दिया। एक योद्धा जो बाहरी शत्रुओं से लड़ना जानता था, अब जीवन के असली शत्रुओं, बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु से परिचित हुआ। शांत और संतुष्ट संन्यासी को देखकर उनके मन में सवाल उठा कि क्या इन दुखों से मुक्ति का कोई रास्ता है? उन्होंने सोचा, यदि वे अपनी प्रजा को मृत्यु और दुख से नहीं बचा सकते, तो राजा बनने का क्या अर्थ है? यही सवाल आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला बना। उसी रात सिद्धार्थ ने चुपचाप महल छोड़ दिया। इस घटना को महाभिनिष्क्रमण कहा जाता है। एक क्षत्रिय के लिए मुकुट, तलवार और राज्य छोड़ना बहुत बड़ा त्याग था। लेकिन उन्होंने यह कदम हार मानकर नहीं, बल्कि जीवन के बड़े सत्य की खोज के लिए उठाया । इसके बाद उन्होंने छह वर्ष तक उरुवेला के जंगलों में कठोर तपस्या की। उन्होंने आलार कालाम और उद्दक रामपुत्त से ध्यान की शिक्षा ली। फिर उन्होंने अपने शरीर को इतना कष्ट दिया कि वे दिन में केवल एक चावल के दाने पर ही रहने लगे। उनका संकल्प बहुत मजबूत था, या तो सत्य मिलेगा या मृत्यु। लेकिन अंत में उन्हें यह समझ आया कि शरीर को अत्यधिक कष्ट देना सही मार्ग नहीं है। इससे सत्य की प्राप्ति नहीं होती। यही समझ आगे चलकर उनके जीवन में एक नया रास्ता खोलती है। सुजाता नाम की एक कन्या से खीर ग्रहण करने के बाद सिद्धार्थ ने एक नया मार्ग चुना मध्यम मार्ग। यह भोग और कठोर तपस्या, दोनों के बीच का संतुलित रास्ता था। उनका समझना था कि किसी भी अति से शक्ति कमजोर होती है, जबकि संतुलन से ही जीवन का संघर्ष जीता जा सकता है। इसके बाद वे बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गए। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक उन्हें सत्य का ज्ञान (बोध) नहीं मिलेगा, वे उठेंगे नहीं। तभी मार ने उन्हें डर, प्रलोभन और भ्रम से विचलित करने की कोशिश की। लेकिन सिद्धार्थ अडिग रहे। उन्होंने पृथ्वी को साक्षी मानते हुए भूमिस्पर्श मुद्रा धारण की, जैसे कह रहे हों कि उनका संकल्प सच्चा है। अंततः वैशाख पूर्णिमा की भोर में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई, और वे बुद्ध कहलाए—अर्थात जाग्रत व्यक्ति। ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने लगभग 45 वर्षों तक पैदल चलकर अपने धर्म का प्रचार किया। उन्होंने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया, जिसे धर्म चक्र प्रवर्तन कहा जाता है । इस उपदेश में उन्होंने जीवन के चार आर्य सत्य समझाए—इस संसार में दुःख है; दुःख का कारण तृष्णा (इच्छाएँ) हैं; दुःख का अंत संभव है; और इस अंत तक पहुँचने का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है। इस मार्ग में सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि शामिल हैं। यही संतुलित, अनुशासित और व्यावहारिक जीवन-पथ बुद्धधर्म के रूप में जाना गया। भारत में जाति-व्यवस्था एक पुरानी सामाजिक संरचना रही है, लेकिन बुद्ध ने इसे स्पष्ट रूप से चुनौती दी। सिद्धार्थ, जो शाक्य कुल के क्षत्रिय राजकुमार थे, ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्होंने कहा “मनुष्य जन्म से नहीं, कर्म से महान बनता है।” उन्होंने अपने संघ में पूर्ण समानता स्थापित की। उदाहरण के लिए, नाई उपालि को भिक्षुओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। संघ में प्रवेश करते ही व्यक्ति को अपना पुराना नाम, गोत्र और जाति त्यागनी होती थी—बुद्ध केवल इतना पूछते थे, “क्या तुम मनुष्य हो?” उनका धम्म सभी के लिए था राजा हो या व्यापारी, वेश्या हो या चांडाल सबको समान स्थान और सम्मान मिला। उनके संघ में बिम्बिसार और प्रसेनजित जैसे राजा, अनाथपिण्डक जैसे सेठ, आम्रपाली जैसी गणिका, उपालि और सुनीत जैसे साधारण लोग सभी एक साथ थे। बुद्ध स्वयं क्षत्रिय थे, फिर भी उन्होंने जाति-अभिमान को सबसे बड़ा बंधन बताया। उन्होंने अपने पद और पहचान का उपयोग विशेषाधिकार बचाने में नहीं, बल्कि उसे समाप्त करने में किया। उनका संदेश स्पष्ट था सच्ची “आर्यता” जन्म या कुल से नहीं, बल्कि आचरण और कर्म से आती है। बुद्ध ने भिक्षु-भिक्षुणियों का संघ बनाया। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चलता था। निर्णय बहुमत से होते थे। स्वयं बुद्ध भी संघ के नियमों (विनय) के नियमों से ऊपर नहीं थे। यहाँ उन्होंने क्षत्रिय के संगठन और अनुशासन कौशल को आध्यात्मिक क्षेत्र में लगाया। 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर में अंतिम भोजन के बाद गौतम बुद्ध अस्वस्थ हो गए। साल वृक्षों के बीच विश्राम करते हुए उन्होंने अपने शिष्य आनंद से कहा “अत्त दीपो भव” (अपने दीपक स्वयं बनो, अपना उद्धार स्वयं करो)। उनका अंतिम संदेश था “अप्पमादेन सम्पादेथ”, अर्थात् प्रमाद रहित होकर अपना कार्य पूर्ण करो। मृत्यु के समय भी उन्होंने सजगता, अनुशासन और कर्म की महत्ता पर जोर दिया। बुद्ध ने कभी स्वयं को ईश्वर नहीं कहा; वे एक ऐसे मनुष्य थे जिन्होंने सत्य का मार्ग खोजा और दूसरों को दिखाया । बाद में सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद बुद्ध के धम्म को अपनाया और उसे पूरे एशिया में फैलाया। आज श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, चीन, जापान, तिब्बत से लेकर अमेरिका तक बुद्ध के विचारों का प्रभाव देखा जा सकता है। अशोक के शिलालेख बताते हैं कि उन्होंने “धम्म” को जाति से ऊपर रखा। उन्होंने धम्म-महामात्र नामक अधिकारियों की नियुक्ति की, जो सभी वर्गों , श्रमण, निर्धन और अनाथ में बिना भेदभाव के नैतिकता का प्रचार करते थे। उनके 11वें शिलालेख में कहा गया कि “धम्म-दान सबसे श्रेष्ठ है”, जिसमें दासों और सेवकों के साथ उचित व्यवहार भी शामिल है। उन्होंने सभी जातियों को स्तूप और विहारों में जाने की स्वतंत्रता दी और यह भी कहा “सभी मनुष्य मेरी संतान हैं।” आज आधुनिक विज्ञान भी “माइंडफुलनेस” और करुणा जैसे विचारों पर शोध कर रहा है। सिद्धार्थ गौतम ने यह दिखाया कि एक क्षत्रिय का सर्वोच्च धर्म बाहरी शत्रुओं को हराना नहीं, बल्कि अपने भीतर के लोभ, द्वेष और मोह पर विजय पाना है। इस प्रकार एक बिना राज्य का क्षत्रिय पूरे विश्व का मार्गदर्शक बन गया। गजेंद्र सिंह Read more »
मनोरंजन मीडिया न्यूज़ रूम में ‘कोड’ का राज: क्या AI छीन लेगा खबरों की रूह? May 2, 2026 / May 2, 2026 | Leave a Comment 2026 के चुनावी मौसम में हमने देखा कि तकनीक कैसे एक 'भस्मासुर' बन सकती है। डीपफेक तकनीक ने वह कर दिखाया जो कभी असंभव लगता था। किसी भी सम्मानित पत्रकार या राजनेता का चेहरा और आवाज चुराकर उससे कुछ भी कहलवाया जा सकता है। जनता के लिए अब यह पहचानना नामुमकिन हो गया है कि स्क्रीन पर दिख रहा Read more » क्या AI छीन लेगा खबरों की रूह न्यूज़ रूम में 'कोड' का राज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस