प्रवक्‍ता ब्यूरो

मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था 

डॉ. रूपेश जैन  मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा तअल्लुक़ आपसे आबदार करना चाहा था इंतिज़ार क्यूँ करें फ़स्ल-ए-बहाराँ सोचकर चमन ये ‘राहत’ खुशबूदार करना चाहा था

आपातकाल को लेकर जनता को जागरूक रहना चाहिये – हरेन्द्र प्रताप

  माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार वि.वि. में आपातकाल प्रसंग पर विमर्श  हरेन्द्र प्रताप