राजनीति डूसू चुनाव : मुद्दों पर धनबल और बाहुबल हावी September 8, 2018 / September 10, 2018 | Leave a Comment नीरज कुमार हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव सितम्बर महीने में हो रहे हैं | छात्र राजनीति में कम से कम चुनाव के स्तर पर एक शहर तथा एक यूनिवर्सिटी में यह दुनिया की संभवत: सबसे बड़ी घटना होती है | लेकिन वैचारिक गंभीरता के लिहाज़ से यह चुनावी कवायद […] Read more » डूसू चुनाव डॉ. लोहिया दिल्ली विश्वविद्यालय
राजनीति समाज गाड़ियों के अतिक्रमण से कब मिलेगी सड़कों को मुक्ति ? September 8, 2018 | Leave a Comment बरुण कुमार सिंह हम बात सुव्यवस्थित शासन प्रणाली की बात करते हैं तो उसमें बहुत सारी बातें देखने को आती हैं जिसमें केवल सुधार शासन के स्तर पर नहीं की जा सकती, उनमें जनभागीदारी का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन सारी कुछ नियम कानून होने के बावजूद भी उसका परिणाम सतह पर नहीं दिखाई […] Read more » मुख्य सड़कों गाड़ियों टू-व्हीलर पर्यावरण पीएमओ
कविता अदाकारी September 7, 2018 | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ ज़िंदगी के रंग मंच पर आदमी है सिर्फ़ एक कठपुतली । कठपुतली अपनी अदाकारी में कितने भी रंग भर ले आख़िर; वह पहचान ही ली जाती है, कि वह मात्र एक कठपुतली है । ऐसे ही आदमी चेहरे पर कितने ही झूठे-सच्चे रंग भरे अंत में, रंगीन चेहरे के पीछे असली चेहरा पहचान ही लिया जाता है | Read more » अदाकारी असली चेहरा ज़िंदगी के रंग मंच पर
कविता भयावह सपना September 7, 2018 | Leave a Comment -विनोद सिल्ला सपने में नित देता है दिखाई समाज का उधड़ता ताना-बाना घुलता फिजां में जहर साम्प्रदायिक कहर दलितों की रुकती घुड़चढ़ी खाप-पंचायतों की ललकार ऑनर कीलिंग की चीख-पुकार ढलता नैतिक मूल्यों का सूरज लुप्त होती संवेदना नित-नया भयावह सपना लगा डर लगने सोने से भयावह सपनों से Read more » खाप पंचायतों भयावह सपना समाज
प्रवक्ता न्यूज़ ख़लिश September 6, 2018 | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ जिस सहर पे यकीं था वो ख़ुशगवार न हुयी देखो ये कैसी अदा है नसीब की समझा था जिसे बेकार, वो बेकार न हुयी मांगी थी जब तड़प रूह बेक़रार न हुयी कहूँ अब क्या किसी से देखकर माल-ओ-ज़र भी मिरि चाहतें तलबगार न हुयीं सोचा था जिन्हे अपना वो साँसें मददगार न हुयीं है अजीब अशआर क़ुदरत की भूल से छोड़ा था जिसे हमने वो निगाहें शिकबागार न हुयीं Read more » ख़लिश ख़ुशगवार
कविता ‘क्या मौन में छुपा है कोई हल’ September 6, 2018 | Leave a Comment प्रीति सुराना आजमा के देख ये भी कुछ पल क्या मौन में छुपा है कोई हल हल न भी मिले तो लाभ ही है क्रोध की आग हो कुछ शीतल कुछ घड़ी शरीर को दे विश्राम कुछ घड़ी क्लेश ही जाए टल दे आराम भावों के आवेग को आवेश हो जाए शायद विफल क्षमा, चिंतन […] Read more » 'क्या मौन में छुपा है कोई हल' क्षमा चिंतन शरीर
व्यंग्य पति की अभिलाषा September 5, 2018 | Leave a Comment सुन्दर डीपी लगा रखी है मोहतरमा अब तो चाय पिला दें सुबह उठते से ही देखो की है तारीफ़ अब तो चाय पिला दें सोच रखा है छुट्टी का दिन सारा आराम करके गुजार दूँगा चाय पीके सो जाऊंगा, कहीं वो शॉपिंग की याद न दिला दें हफ़्ते भर की थकान मीठी नींद, भीने सपनो […] Read more » पति की अभिलाषा शॉपिंग सुन्दर डीपी
गजल जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई September 4, 2018 | Leave a Comment रूपेश जैन ‘राहत जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई दफ़्तरी से हुए वाबस्ता तो आवारगी चली गई शौक़ अब रहे न कोई ज़िंदगी की भागदौड़ में दुनियाँ के दस्तूर में मिरि कुशादगी चली गई ज़िम्मेदारियों का वज़न ज्यूँ बढ़ता चला गया ईमान पीछे छूट गया और शर्मिंदगी चली गई भागते भागते दौलतें न […] Read more » आवारगी जवानी जो आई बचपन की हुड़दंगी चली गई शर्मिंदगी
विश्ववार्ता पोंपिओ और मेटिस क्या करेंगे ? September 4, 2018 | Leave a Comment डॉ. वेदप्रताप वैदिक अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ और रक्षा मंत्री जिम मेटिस इस सप्ताह भारत और पाकिस्तान आएंगे। यह यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगी। भारत को अपना सामरिक भागीदार मानते हुए अमेरिका उसे लगभग सवा लाख करोड़ रु. के हेलिकाॅप्टर भी बेचना चाहता है और भारत पर यह दबाव भी डालना […] Read more » Featured अफगानिस्तान अमेरिका इमरान खान पाकिस्तान पोंपिओ और मेटिस क्या करेंगे ? विदेश मंत्री माइक पोंपिओ सोवियत संघ
गजल मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था September 3, 2018 | Leave a Comment डॉ. रूपेश जैन मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ इज़हार करना चाहा था धुएँ सी उड़ा दी आरज़ू पल में यार ने मिरि तिरा इस्तिक़बाल शानदार करना चाहा था भले लोगो की बातें समझ न आईं वक़्त पे मैंने तो हर लम्हा जानदार करना चाहा था तिरे काम आ सकूँ इरादा था बस इतना सा तअल्लुक़ आपसे आबदार करना चाहा था इंतिज़ार क्यूँ करें फ़स्ल-ए-बहाराँ सोचकर चमन ये ‘राहत’ खुशबूदार करना चाहा था Read more » ख़ाहिश-ए-ख़लीक़ फ़स्ल-ए-बहाराँ मैंने तो सिर्फ आपसे प्यार करना चाहा था
कविता कान्हा का धाम September 3, 2018 | Leave a Comment प्रीति सुराना गोकुल कान्हा का धाम न होता। जग में गौ मां का नाम न होता,.. अमृत मंथन से निकली गौ माते, धर्मशास्त्र हैं यह बात बताते। पूजी जाती है गाय युगों से, संस्कृति यही भारत की सदियों से। धर्म में भी ऐसा काम न होता, गोकुल कान्हा का धाम न होता। जग में गौ […] Read more » अमृत मंथन कान्हा का धाम गोकुल संस्कृति
समाज नव वर्ष एक उत्सव July 25, 2018 / July 25, 2018 | Leave a Comment गीता आर्य अलग अलग देशों में विभिन्न प्रकार के उत्सव एवं त्योहार मनाये जाते हैं । त्योहारों का अपना विशेष महत्त्व होता है । त्योहार जहाँ एक ओर हमें खुशी प्रदान करते हैं वहीं दूसरी ओर हम में सामाजिक रूप से एकता का भाव जाग्रत करते हैं । भारत और विश्व में अनेक प्रकार […] Read more » Featured क्रिसमस डे दिवाली देशों और धर्मों नये-नये पकवान बनाना नव वर्ष एक उत्सव पटाखे फोड़ना