आलोचना राजनीति साहित्य कौन सी पुरस्कार वापसी? November 3, 2015 | 3 Comments on कौन सी पुरस्कार वापसी? कौनसी पुरस्कार वापसी? कौनसी साहित्यिक प्रतिभा? कौन से देश और समाज के हमदर्द? कौनसी मानवता के हितेशी? कौनसी प्रजाति के कलमकार? कौनसी सरकारो के “भांड “? लगता है देश मे पहली बार कोई घटना हुई है ? देश मे १९५४ की ग़लतिया जिसके कारण देश को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने स्वार्थ सिद्धि […] Read more » Featured पुरस्कार वापसी
समाज भारत, भिखारी और भविष्य November 2, 2015 | Leave a Comment नुमाईश में खड़े उस बचपन पर लगभग हर रोज निगहबानी करता रहता हूं. सेल्फियों के जरिए लोगों द्वारा उनकी मासूमियत के संग चिपकी गरीबी को कैद होते हुए देखता हूं. नन्हे-नन्हे हाथ, जुबान पर कुछ निवालों की ख्वाहिश लिए भारत का विकास माने जाने वाले तमाम बच्चे आज अपने विकास की दरकार में दर-दर कहें […] Read more » भारत भिखारी और भविष्य
समाज बच्च्यिां कहीं सुरक्षित नहीं, न घर में, न बाहर November 2, 2015 | Leave a Comment जगजीत शर्मा। बच्चियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वह देश की राजधानी दिल्ली हो, कोलकाता हो, मुंबई हो, लखनऊ, भोपाल, पटना, रांची, चंडीगढ़ या फिर देश के किसी दूरस्थ इलाके में बसा कोई गांव ही हो। बच्चियों..और बच्चियों ही क्यों, पूरी स्त्री जाति ही सुरक्षित नहीं है। अब तो गांवों में भी 60-65 साल […] Read more » बच्च्यिां कहीं सुरक्षित नहीं
धर्म-अध्यात्म भगवान पर भ्रम October 31, 2015 | Leave a Comment चर्च ऑफ़ इंग्लैंड और दुनिया में बहुत दिनों से चल रही लैंगिग समानता पर बहस के बीच बिट्रेन के संसद हाउस ऑफ़ लार्डस में बैठने वाली पहली महिला पादरी रेशाल ट्रवीक ने कहा है कि “चर्च ऑफ़ इग्लैंड” को भगवान के लिए पुर्लिंग शब्द (HE) का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए! उन्हौने अपने संम्बोधन में […] Read more » भगवान पर भ्रम
जन-जागरण विविधा देश धर्म के नये क्रन्तिकारी ! October 30, 2015 | Leave a Comment राजीव चौधरी अभी पिछले कुछ दिन पहले की बात है, राजीव चौक गेट नम्बर 7 से आगे पालिका बाजार के सामने एक आदमी चाय पी रहा था उसने चाय पीने के बाद प्लास्टिक कप को बराबर में फेंक दिया उसके बाद जेब से सिगरेट की डब्बी से सिगरेट निकलकर उसे खाली कर फेंक दिया मैने […] Read more » देश धर्म के नये क्रन्तिकारी !
साहित्य पुरस्कार वापसी पर क्या कहते हैं बुद्धिजीवी October 30, 2015 | Leave a Comment अक्षय दुबे ‘साथी’ राहुल देव (वरिष्ठ पत्रकार) मैं ये मानता हूँ कि कोई भी राष्ट्रीय पुरस्कार कोई दल नहीं देता बल्कि एक चयन प्रक्रिया के बाद देश के द्वारा दिया जाता है,तो ऐसे में यह पुरस्कार लौटाना उचित नहीं है.लेकिन जो कुछ हो रहा है उसको सिरे से खारिज भी नहीं किया जा सकता […] Read more » Featured पुरस्कार वापसी
व्यंग्य साहित्य सूट बूट का प्रस्ताव October 29, 2015 | Leave a Comment डॉ वेद व्यथित बच्चा जब थोड़ा सा बड़ा होने लगता है तो उस की माँ उसे स्कूल जाने से पहले थोड़ा सा अंग्रेज बनाने की तैयारी शुरू कर देती है। वह भारत के तथाकथित अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की अपेक्षा के अनुसार ‘पार्ट ऑफ़ बॉडी ‘,फाइव फ्रूटस नेम आदि रटवाना शुरू कर देती है। फिर […] Read more » सूट बूट का प्रस्ताव
प्रवक्ता न्यूज़ “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर आज संगोष्ठी October 29, 2015 / November 5, 2015 | 1 Comment on “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर आज संगोष्ठी आज 29 अक्टूबर 2015, को प्रवक्ता.कॉम द्वारा “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर सायं 5:00 बजे दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित हिंदी भवन सभागार(आईटीओ मेट्रो से नजदीक) में एक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. हाल में जिस प्रकार से साहित्य अकदामी सम्मान वापसी का जो विमर्श पूरे देश में खड़ा हुआ है, […] Read more » “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” Featured
पर्व - त्यौहार विविधा परंपरा और विश्वास का त्योहार करवा चौथ October 28, 2015 / October 28, 2015 | Leave a Comment डॉ. वंदना सेन ओ चाँद तू कितना अनमोल है दर्शन करने को आतुर हम सभी शाम से ही आकाश में निहारतीं सजी धजी महिलाएं, तू अब तो निकल के आजा तेरे आने के बाद ही आएगी जान में जान हम करेंगे जल पान। करवा चौथ के इस व्रत में एक महिला का अपने पति के […] Read more » Featured करवा चौथ परंपरा और विश्वास का त्योहार
मीडिया जज्बातों से खेलना बन्द कीजिए ….. October 26, 2015 | Leave a Comment अरविन्द मंडलोई जो बात मैं लिखने जा रहा हूँ उसको सिर्फ इस संदर्भ में समझिये कि समाज का जो मनोविज्ञान है वो क्या है ? हर आदमी एक खास मुकाम हासिल कर जिन्दा रहना चाहता है । हर आदमी अपने काम को कर्त्तव्य नहीं समाज पर एहसान मानता है । केन्द्रीय कार्यालयों में सेवारत चपरासी […] Read more » Featured जज्बातों से खेलना बन्द कीजिए .....
व्यंग्य साहित्य धीरे-धीरे बोल बाबा सुन ना ले October 25, 2015 | 2 Comments on धीरे-धीरे बोल बाबा सुन ना ले दाल वो भी अरहर की दाल ,इसे लेकर बाबा रामदेव ने बड़े पते की बात कही है.बाबा ने जो कुछ कहा है उसके बारे में खुद योगाचार्य पतंजलि को कुछ पता नहीं था. बाबा बोले-दाल खाने से घुटनों का दर्द पैदा होता है.सचमुच हमें भी ये ब्रम्हज्ञान ब्राम्हण होने के बावजूद आज तक नहीं था.हमारे […] Read more » धीरे-धीरे बोल
प्रवक्ता न्यूज़ “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर संगोष्ठी October 23, 2015 / October 23, 2015 | Leave a Comment प्रवक्ता.कॉम द्वारा आगामी 29 अक्टूबर 2015, गुरुवार को “सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड” विषय पर सायं 5:00 बजे दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित हिंदी भवन सभागार(आईटीओ मेट्रो से नजदीक) में एक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. हाल में जिस प्रकार से साहित्य अकदामी सम्मान वापसी का जो विमर्श पूरे देश में खड़ा […] Read more » प्रवक्ता.कॉम संगोष्ठी सम्मान वापसी सम्मान वापसी : प्रतिरोध या पाखंड साहित्य अकदामी साहित्य अकदामी सम्मान वापसी