संदीप त्यागी

पेशे से पत्रकार हूँ। राजधानी में बीते लगभग एक दशक से पत्रकारिता से जुड़ा हूँ। कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन। वर्तमान में एक साप्ताहिक एवं दैनिक अखबार में कार्यकारी संपादक के तौर पर जुड़ा हूँ। संपर्क : 8744906838

आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा तक पर एतराज क्यों ..?

धीरे-धीरे ही सही लेकिन चीजें बदलनी शुरू हुई हैं। दलित और पिछड़े समाज का शहरी युवा भी राजनैतिक दलों के इस गोरखधंधे को बखूबी समझने लगा है और समझने लगा है, कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रतियोगिता से ही पार पाया जा सकेगा। यही नहीं आरक्षण के बूते दलित और पिछड़े समाज के राजनैतिक मठाधीशों को लेकर भी समाज में माहौल अब बदल रहा है। लोग मानने लगें कि आरक्षण का यह लाभ जरूरतमंदों तक न पहँुचकर कुछ लोगों की जागीर बन रहा है। दलित और पिछड़े समाज के जागरूक युवाओं में भी यह धारणा बन रही है, कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ जातिगत न होकर जरूरतमंदों को मिले तो समाज की तस्वीर ज्यादा तेजी के साथ बदलेगी।