विश्ववार्ता FCRA में बदलाब की चर्चा पर अमेरिका की बौखलाहट हास्यास्पद। June 17, 2026 / June 17, 2026 | Leave a Comment FCRA में बदलाब की चर्चा पर अमेरिका की बौखलाहट हास्यास्पद। Read more » केंद्र सरकार द्वारा विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA)
पर्यावरण लेख प्रकृति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी है पर्यावरण संरक्षण June 4, 2026 / June 4, 2026 | Leave a Comment वैश्विक स्तर पर पर्यावरणीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों के अनुसार पृथ्वी का औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले की तुलना में लगभग 1.1 से 1.3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। Read more » पर्यावरण संरक्षण
आर्थिकी सोना, सत्ता और सियासत : बदलती अर्थव्यवस्था के बीच नई बहस May 19, 2026 / May 19, 2026 | Leave a Comment हालांकि केंद्र सरकार की ओर से सोना खरीदने पर किसी प्रतिबंध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन इस मुद्दे ने राजनीति को जरूर गर्मा दिया है। विपक्षी दल सरकार पर आम लोगों की पारंपरिक बचत पर नियंत्रण की कोशिश का आरोप लगा रहे हैं। Read more » Gold power and politics power and politics: A new debate amid a changing economy सोना सत्ता और सियासत
राजनीति धार्मिक ‘कट्टरता’ के नाम पर राष्ट्रीय चिन्ह का ‘अपमान’ चिंताजनक September 10, 2025 / September 10, 2025 | Leave a Comment संतोष कुमार तिवारी देश में जिस तरह आज धर्म और जाति को लेकर लोगों में कट्टर बनने का प्रचलन बढ़ता जा रहा हैं, यह बेशक़ देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत ही चिंताजनक हैं, क्योंकि इस तरह के लोगों को न देश से कुछ लेना हैं और न परिवार से. उनको केवल अपनी […] Read more » धार्मिक 'कट्टरता' राष्ट्रीय चिन्ह का अपमान
राजनीति भारत के साहसिक कदम से अमेरिका की दादागिरी पर लग सकता है ‘ग्रहण’। August 12, 2025 / August 12, 2025 | Leave a Comment संतोष कुमार तिवारी अमेरिका की तरफ से भारत पर टैरिफ लगाने का सिर्फ रूस से तेल खरीदना ही एक कारण नहीं है बल्कि इसके पीछे कई और भी कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया है, जो 7 अगस्त से प्रभावी है और वहीं इस टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की चेतावनी दे चुके हैं, जिसके पीछे की वजह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदना बताया जा रहा है जबकि भारत का रूस सबसे बड़ा दोस्त है जो हमेशा भारत के साथ बड़े भाई की तरह खड़ा रहता है। इधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टंप ने गीदड़भभकी दिखाते हुए भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक टैरिफ को लेकर मसला नहीं सुलझ जाता है, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति को ज्ञात है कि भारत में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री है जो अपने देश के हित के आगे अमेरिका क्या दुनिया की किसी ताकत के साथ नहीं झुक सकते है। ट्रम्प के टैरिफ़ बढ़ाने की गीदड़भभकी के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ-साफ कह दिया कि देश के किसानों, पशुपालकों और मछुवारों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं।प्रधानमंत्री का यह बयान अमेरिका को और चुभ गया और ट्रम्प को समझ में आ गया कि भारत को झुकाना अब सरल नहीं है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देश के किसान, पशुपालक और मछुवारा व्यवसाय से जुड़े लोग काफ़ी खुश है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों और हिम्मत की सराहना कर रहे है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह चाहते हैं कि भारत अमेरिकी कृषि उत्पाद और डेयरी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम करे ताकि भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के इन उत्पादों को बेचा जा सके लेकिन भारत इन क्षेत्रों को देश में ज्यादा प्राथमिकता देता है. अगर भारत इन क्षेत्रों को अमेरिका के लिए खोलता है तो भारत के किसानों की आय पर असर होगा जिसे लेकर भारत कभी भी समझौता नहीं करना चाहेगा जबकि अमेरिका कृषि और दुग्ध उत्पादों के लिए शत प्रतिशत टैरिफ़ कम करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत रूसी तेल का आयात कम करे और अमेरिका से ज्यादा तेल का आयात करे जबकि भारत को अमेरिका की तुलना में सस्ता तेल रूस से मिल रहा है तो अमेरिका से भारत तेल क्यों ख़रीदे। भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के मुंह खाने के बाद अमेरिका के दादागिरी पर ग्रहण लगने की आशंका बन रही है क्योंकि अमेरिकी डॉलर दुनिया भर में इस्तेमाल की जाने वाली करेंसी है। वर्ष 1944 से ही अमेरिकी डॉलर का इस्तेमाल सभी देश व्यापार के लिए कर रहे हैं। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक अपने यहां डॉलर का रिजर्व रखते हैं। करीब 90 फीसदी विदेशी मुद्रा लेन-देन डॉलर में ही होती है लेकिन ब्रिक्स देशों ने इस पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाये जिसे लेकर ट्रंप बौखलाए हुए हैं क्योंकि ब्रिक्स संगठन के देश मिलकर वर्ल्ड इकोनॉमी में कुल 35 प्रतिशत का योगदान देते हैं। ऐसे में अगर इन देशों ने अमेरिका और डॉलर का विरोध किया तो अमेरिका के सुपर पॉवर बने रहने का स्थिति छिन सकती है। साथ ही डॉलर वर्ल्ड करेंसी से हट भी सकता है और अमेरिकी दादागिरी में ग्रहण लग सकता है। भारत और रूस के तेल व्यापार की बात की जाये तो भारत रूस से 2022 से तेल का आयात बढ़ाया है। भारत अभी रूस से हर दिन 1.7 से 2.2 मिलियन बैरल तक का रूसी तेल आयात करता है। भारत रूसी तेल का करीब 37 फीसदी हिस्सा आयात कर रहा है। वहीं सबसे ज्यादा चीन रूस से तेल खरीद रहा है। साल 2024 में भारत ने रूस से 4.1 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात किया है। जो अमेरिका को पच नहीं रहा है और अपनी दादागिरी के दम पर अपने देश के कृषि और दुग्ध उत्पाद को भारत जैसे बड़े बाजार में बिना टैरिफ़ के बेचने के लिए बेताब है और भारत द्वारा अमेरिका की बात न मामने पर 50 प्रतिशत टैरिफ़ बढ़ाने की बात कहीं जा रही है। जबकि अमेरिका के इस फैसले से भारत के विरोध में रहने वाला चीन भी अमेरिका के इस कदम को गलत बताया है। अब अमेरिका के लिए एक चिंता और हो रही है कि भारत,रूस और चीन जैसे महाशक्ति यदि एक हो जाएगी तो अमेरिका की दादागिरी भी खतरे में पड़ सकती है। अमेरिका के इस मनमानी टैरिफ़ पर न चीन बल्कि विश्व के कई देशों ने सही नहीं करार दिया है। भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने का विरोध तो अमेरिका का बहाना है, अमेरिका का मुख्य दर्द भारत जैसे बड़े बाजार में अमेरिका के कृषि और दुग्ध उत्पाद को बेचने का मौका न मिलना प्रमुख है। अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि और दुग्ध उत्पाद जैसे दूध, पनीर, घी आदि को भारत में आयात की अनुमति मिले। अमेरिका का तर्क हैं कि उनका दूध स्वच्छ और गुणवत्ता वाला है और भारतीय बाजार में सस्ता भी पड़ सकता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और इस क्षेत्र में करोड़ों छोटे किसान लगे हुए हैं। भारत सरकार को डर है कि अगर अमेरिकी दुग्ध उत्पाद भारत में आएंगे तो वे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत में ज्यादातर लोग शुद्ध शाकाहारी दूध उत्पाद चाहते हैं जबकि अमेरिका में कुछ दुग्ध उत्पादों में जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम का इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि गेहूं, चावल, सोयाबीन, मक्का और फलों जैसे सेब, अंगूर आदि को भारत के बाजार में कम टैक्स पर बेचा जा सके और भारत अपनी इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करे। इसके अलावा, अमेरिका जैव-प्रौद्योगिकी फसलों को भी भारत में बेचने की कोशिश करता रहा है लेकिन भारत की सरकार और किसान संगठन इसका कड़ा विरोध करते हैं। इसको लेकर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि देश के किसानों, पशुपालकों और मछुवारों के हितों के साथ समझौता नहीं हो सकता है। प्रधानमंत्री के इस बयान से अमेरिका समेत पूरे विश्व ने भारत के रुख को समझ लिया और सभी ने मान लिया कि भारत अमेरिका के आगे झुकने वाला देश नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रहित सर्वोपरि है, इसके लिए जो भी कीमत चुकानी पड़े उसके लिए वह तैयार रहते है। इसलिए इस समय पुरे देश के पक्ष और विपक्ष दलों के नेताओं, किसानों, पत्रकारों, बुद्धजीवियों और आम लोगो को अमेरिका के इस कड़े कदम का विरोध करते हुए सरकार के साथ खड़े होने की जरूरत है। संतोष कुमार तिवारी Read more » अमेरिका की दादागिरी
कला-संस्कृति पर्यावरण और आध्यात्म का अनोखा संगम है नागपंचमी July 29, 2025 / July 29, 2025 | Leave a Comment नाग पंचमी 29 जुलाई संतोष तिवारी भारत में व्रत त्यौहार कहीं न कहीं धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर ही मनाये जाते रहे है, भले ही आज लोग अपनी भागम भाग की जिंदगी में सही से समय नहीं दे पा रहे है। भारत के समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में तमाम त्यौहार हैं जिनमें नागपंचमी का एक विशेष स्थान है। यह पर्व नाग देवता की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें सनातन धर्म में जीवन रक्षक और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक के रूप में माना जाता है। यह त्यौहार मध्य बारिश के समय में मनाया जाता है जो कहीं न कहीं पर्यवारण के संरक्षण और आध्यत्मिक जुड़ाव को एक करता है। नाग पंचमी के दिन पुराने समय में गावों में तमाम तरह के खेलकूद का आयोजन होता था, जो आज केवल नाम मात्र का रह गया है। […] Read more » Nag Panchami is a unique confluence of environment and spirituality नागपंचमी
राजनीति सौगात-ए-मोदी’ से बीजेपी का बड़ा दांव, विपक्षी दलों के उड़े तोते March 27, 2025 / March 27, 2025 | Leave a Comment संतोष कुमार तिवारी भाजपा विरोधी दलों के नेता और समर्थक हमेशा से ही नरेंद्र मोदी और भाजपा क़ो मुस्लिम विरोधी बताकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में जुटे रहते है और मौका मिलते ही भाजपा के विरोध में माहौल बनाने में भी कोई गुरेज नही करते है जबकि भाजपा विरोधियों क़ो पता होना चाहिए कि सरकार […] Read more » BJP's big bet with 'Saugat-e-Modi' Saugat-e-Modi सौगात-ए-मोदी’ से बीजेपी का बड़ा दांव