लेखक परिचय

शालिनी तिवारी

शालिनी तिवारी

"अन्तू, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश की निवासिनी शालिनी तिवारी स्वतंत्र लेखिका हैं । पानी, प्रकृति एवं समसामयिक मसलों पर स्वतंत्र लेखन के साथ साथ वर्षो से मूल्यपरक शिक्षा हेतु विशेष अभियान का संचालन भी करती है । लेखिका द्वारा समाज के अन्तिम जन के बेहतरीकरण एवं जन जागरूकता के लिए हर सम्भव प्रयास सतत् जारी है ।

भारतीय महिलाओं की दिशा एवं दशा

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वर्तमान हालात-  गौरतलब है कि आजाद भारत में महिलाओं ने दिन-प्रतिदिन अपनी लगन, मेहनत एवं सराहनीय कार्यो द्वारा राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुई हैं. मौजूदा दौर में महिलाएँ नए भारत के आगाज़ की अहम कड़ी दिख रही हैं. लम्बे अर्से के अथक परिश्रम के बाद आज भारतीय महिलाएँ समूचे विश्व में… Read more »

हिन्द वतन को लाल सलाम

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स्वतंत्रता दिवस हम सबके लिए एक मंगल दिवस और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसकी अमर कहानी इतिहास में स्वर्णिम अच्छरों से दर्ज है. यह वही दिन था, जब समूचा भारत लाल सलाम का जयघोष करते हुए भारत माता को ब्रिटिस हुकूमतों के चंगुल से आजाद कराया था. उनकी कुर्बानियों की वजह से ही आज हम सब… Read more »



बिगड़ते वर्तमान हालात नवयुवकों एवं राष्ट्र के भविष्य के लिए बेहद चिंतनीय है.

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ब हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री किसी मुल्क के राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेट की थी और कहा था कि मेरे पास इससे ज्यादा देने को कुछ भी नहीं है और विश्व के पास इससे ज्यादा लेनें को भी कुछ नहीं है. परन्तु आज हमारी युवा पीढ़ी चौबीसो घड़ी सोशल साइट्स पर इतनी व्यस्त है कि उसके पास गीता जैसा नीतिशास्त्र और रामायण जैसा प्रयोगशास्त्र पढ़नें की फुरसत ही नहीं है.

मेरे लफ़्ज तुझसे यकीं माँगें

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शालिनी तिवारी झुरमुट में दिखती परछाइयाँ घुँघुरू की मद्दिम आवाज लम्बे अर्से का अन्तराल तुझसे मिलने का इन्तजार चाँद की रोशन रातों में पल हरपल थमता जाए ऐसा लगता है मानो तुम मुझसे आलिंगन कर लोगी पर कुछ छण में परछाइयाँ नयनों से ओझल हो जायें दिन की घड़ी घड़ी में बस बस तेरी ही… Read more »

हम सबकी जिम्मेदारी है : पिछड़े बालकों की समस्याएँ

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विकास व्यक्ति की अनुवांसिक क्षमताओं एवं वातावरण के मध्य होनें वाली आंतरिक क्रिया का परिणाम होता है. बालक की अनुवांसिक क्षमताओं का विकास वातावरण से ही होता है. इसके अतिरिक्त स्वयं वातावरण भी बालक के विकास की दिशा, दशा और गति निर्धारित करनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे

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यकीनन् यह हमें मानना ही होगा कि हम सब कुछ विशेष कार्य के निमित्त जन्में हैं. जीवन को व्यसनों, कुविचारों और अन्धकार में बिताने से तो ठीक ही है कि अपने मनो-मस्तिष्क एवं शब्दों को पवित्र रखें. हाँ कुछ लोग आज यह जरूर बोलते हैं कि अब इमानदारी का जमाना नहीं रहा. वह शायद आज यह भूल चुके हैं कि दुनियाँ को चलाने वाला सर्वशक्तिमान पहले भी वही था और आज भी वही है.

आवा हो भइया होली मनाई

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अब तो गावन कै लड़िका भी पप्पू टीपू जानि गएन,
‘यूपी को ये साथ पसन्द है’ ऐह जुम्ला का वो नकार दहेन,

प्राइमरी स्कूल ख़ामोश हैं !

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शालिनी तिवारी दास्तान: आज भारत के अधिकतर क्षेत्रों में निःस्वार्थ भाव से समाज को प्राथमिक शिक्षा बाँटता हुआ प्राइमरी स्कूल गाँवों, कस्बों या शहरों के एक कोने में तन्हा दिखाई दे रहा है. कई दशक पुराना प्राइमरी स्कूल गाँव में बसा होने के बावजूद गाँव से ही अलग-थलग पड़कर अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा… Read more »

गीत सुनाने निकली हूँ

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भारत माँ की बेटी हूँ और गीत सुनाने निकली हूँ, वीरों की गाथा को जन जन तक पहुँचाने निकली हूँ, भारत माँ के शान के खातिर सरहद पर तुम ड़टे रहे, सर्दी गर्मी बरसातों में भी तुम अड़िग वीर बन खड़े रहे, कोई माँ कहती है कि मेरा लाल गया है सीमा पर, दुश्मन को… Read more »

मतदान कीजिए, आपका मत महत्वपूर्ण है

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किसी भी राष्ट्र के मजबूत लोकतंत्र के लिए उस राष्ट्र के प्रत्येक मत की अहम भूमिका होती है. हमारे द्वारा चुना गया राजनीतिक नुमाइंदा प्रत्यक्ष रूप से लोकतंत्र का एक हिस्सा बनकर सत्ता तक समाज की विषमताओं को उजागर करके उनका हल निकालता है. नतीजन् जनता, जनप्रतिनिधि और सरकार तीनों की भागीदारी से एक व्यवस्थित,… Read more »