शालिनी तिवारी

"अन्तू, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश की निवासिनी शालिनी तिवारी स्वतंत्र लेखिका हैं । पानी, प्रकृति एवं समसामयिक मसलों पर स्वतंत्र लेखन के साथ साथ वर्षो से मूल्यपरक शिक्षा हेतु विशेष अभियान का संचालन भी करती है । लेखिका द्वारा समाज के अन्तिम जन के बेहतरीकरण एवं जन जागरूकता के लिए हर सम्भव प्रयास सतत् जारी है ।

बिगड़ते वर्तमान हालात नवयुवकों एवं राष्ट्र के भविष्य के लिए बेहद चिंतनीय है.

ब हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री किसी मुल्क के राष्ट्राध्यक्ष को गीता भेट की थी और कहा था कि मेरे पास इससे ज्यादा देने को कुछ भी नहीं है और विश्व के पास इससे ज्यादा लेनें को भी कुछ नहीं है. परन्तु आज हमारी युवा पीढ़ी चौबीसो घड़ी सोशल साइट्स पर इतनी व्यस्त है कि उसके पास गीता जैसा नीतिशास्त्र और रामायण जैसा प्रयोगशास्त्र पढ़नें की फुरसत ही नहीं है.

हम सबकी जिम्मेदारी है : पिछड़े बालकों की समस्याएँ

विकास व्यक्ति की अनुवांसिक क्षमताओं एवं वातावरण के मध्य होनें वाली आंतरिक क्रिया का परिणाम होता है. बालक की अनुवांसिक क्षमताओं का विकास वातावरण से ही होता है. इसके अतिरिक्त स्वयं वातावरण भी बालक के विकास की दिशा, दशा और गति निर्धारित करनें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

यकीऩ मानिए, आपके शब्द आपको महान बना देंगे

यकीनन् यह हमें मानना ही होगा कि हम सब कुछ विशेष कार्य के निमित्त जन्में हैं. जीवन को व्यसनों, कुविचारों और अन्धकार में बिताने से तो ठीक ही है कि अपने मनो-मस्तिष्क एवं शब्दों को पवित्र रखें. हाँ कुछ लोग आज यह जरूर बोलते हैं कि अब इमानदारी का जमाना नहीं रहा. वह शायद आज यह भूल चुके हैं कि दुनियाँ को चलाने वाला सर्वशक्तिमान पहले भी वही था और आज भी वही है.