पंडित दयानंद शास्त्री

ज्योतिष-वास्तु सलाहकार, राष्ट्रीय महासचिव-भगवान परशुराम राष्ट्रीय पंडित परिषद्, मोब. 09669290067 मध्य प्रदेश

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

माता का हमेशा सम्मान हो मां अर्थात माता के रूप में नारी, धरती पर अपने सबसे पवित्रतम रूप में है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे। किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है।

जानिए की क्यों नहीं करना चाहिए बिस्तर पर बैठ कर भोजन…???

  ऐसा करना दे सकता है शनिदेव  को आमंत्रण….. प्रिय पाठकों/मित्रों, कुछ कार्य ऐसे भी…

जानिए वास्तु और आइना (शीशा/दर्पण/कांच) का सम्बन्ध, इसके प्रभाव और लाभ-हानि–

किसी भी दर्पण को सोने के कमरे में नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी के सोने के कमरे में दर्पण से किसी तीसरे आदमी की मौजूदगी का अहसास होता है। रात के वक्त अंधेरे में अपना ही प्रतिबिंब हमें चौंका भी देता है। इसलिए अगर आईना या ड्रेसिंग-टेबल रखना भी हो , तो इस तरह से रखा जाना चाहिए कि सोने वाले का अक्स उसमें न दिखाई दे। और , क्योंकि टीवी की स्क्रीन भी शीशे का काम करती है इसलिए टीवी को भी बेड के सामने नहीं रखना चाहिए। अगर किसी वजह से ऐसा करना मुश्किल हो , तो सोने से पहले दर्पण को किसी कपड़े या पर्दे से ढक देना चाहिए

अक्षय तृतीया (आखा तीज) 2017

अक्षय तृतीया पर्व को कई नामों से जाना जाता है| इसे अखतीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है| इस वर्ष यह पर्व 28 अप्रैल 2017 (शुक्रवार) के दिन मनाया जाएगा. इस पर्व को भारतवर्ष के खास त्यौहारों की श्रेणी में रखा जाता है| अक्षय तृतीया पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है | इस दिन स्नान, दान, जप, होम आदि अपने सामर्थ्य के अनुसार जितना भी किया जाएं, अक्षय रुप में प्राप्त होता है | वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को “अक्षय तृतीया” या “आखा तृतीया” अथवा “आखातीज” भी कहते हैं।