विजय कुमार

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

प्यार की गरमी

मोहन उनकी इरादे समझ गया। वह बोलना तो नहीं चाहता था, पर आज उससे रहा नहीं गया, ‘‘हां, ठीक कहते हो। तुम्हारे स्वेटर और कोट इतने गरम हो भी नहीं सकते। चूंकि उनमें पैसों की गरमी है और मेरे स्वेटर में दीदी के प्यार की गरमी।

सब लड़कों का मुंह बंद हो गया।

कर्मठ कार्यकर्त्ता  श्री बालासाहब देवरस

संघ शिक्षा वर्ग की दिनचर्या में प्रतिदिन होने वाले बौद्धिक वर्ग का बहुत महत्त्व होता है। प्रायः वर्ग के सर्वाधिकारी ही उनका परिचय कराते हैं; परन्तु 1943 में पूना के वर्ग में जब एक दिन वक्ता का परिचय कराने के लिए सरसंघचालक श्री गुरुजी स्वयं खड़े हुए, तो स्वयंसेवक चकित रह गये।

अविरल और निर्मल गंगा

गंगा को सुधारना है, तो राजनीतिक इच्छाशक्ति, सामाजिक जागरूकता, विशेषज्ञों द्वारा निर्मित समयबद्ध योजना, कठोर कानून और उनका पालन, धर्म, विज्ञान और वर्तमान जनसंख्या की जरूरतों में व्यावहारिक समन्वय जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करना होगा, तब जाकर जगत कल्याणी मां गंगा स्नान और ध्यान, वंदन और आचमन के योग्य बन सकेगी।

मच्छर से कुछ सीखो भाई …………

मनुष्य भले ही स्वयं को संसार के प्राणियों में सबसे अधिक बुद्धिमान समझे, पर मैं इससे सहमत नहीं हूं। इन दिनों सब तरफ बाबा रामदेव और उनके योगासनों की धूम है; पर एक बार जरा आसनों के नाम पर तो नजर डालें। मयूरासन, श्वानासन, कुक्कुटासन, सिंहासन, गोमुखासन, मत्स्यासन, भुजंगासन, मकरासन, उष्ट्रासन… आदि। नाम गिनाना शुरू करें, तो सूची समाप्त नहीं होगी।