राजनीति राज्यसभा का औचित्य January 8, 2016 / January 8, 2016 | 1 Comment on राज्यसभा का औचित्य वीरेन्द्र सिंह परिहार गत दिनों ऐसा समाचार पढ़ने को मिला कि वर्ष 2016 में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों में लालू यादव बिहार से अपनी पत्नी राबड़ी देवी और पुत्री मीसा को राज्यसभा में भेजेंगे। उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के 80 सदस्य हैं। चूॅकि बिहार विधानसभा से […] Read more » Featured राज्यसभा का औचित्य
विविधा समाज मुस्लिम बनाम मुस्लिम या मुस्लिम बनाम गैर-मुस्लिम November 18, 2015 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार सीरिया, इराक, यमन और अफगानिस्तान में गृहयुद्ध के चलते शरणार्थियों का रेला यूरोपीय देशों की ओर सतत् बढ़ रहा है। यूरोपियन यूनियन के देश यह चर्चा करने को बाध्य हो रहे हैं कि वह इन देशों के कितने शरणार्थियों को जगह देने मे सक्षम हैं। निःसंदेह इन शरणार्थियों की वजह से यूरोपीय […] Read more » Featured मुस्लिम बनाम गैर-मुस्लिम मुस्लिम बनाम मुस्लिम
विधि-कानून विविधा न्यायपालिका की तानाशाही October 27, 2015 / October 28, 2015 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी सरकार के ‘‘न्यायिक नियुक्ति आयोग’’ को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया कि संविधान द्वारा न्यायपालिका को स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है और एनजेएसी एक्ट से इस अधिकार मे […] Read more » Featured न्यायपालिका की तानाशाही
राजनीति समाज ये बेचारे जाति के मारे September 26, 2015 | 3 Comments on ये बेचारे जाति के मारे बीरेन्द्र सिंह परिहार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघंचालक ने आरक्षण के संबंध में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि एक समिति बनाई जानी चाहिए जो यह तय करे कि किन लोगों को और कितनों दिनों तक आरक्षण की आवश्यकता है । उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी समिति में राजनीतिज्ञों […] Read more » Featured
राजनीति भ्रष्टाचार मिटाने की दिशा में प्रभावी कदम September 22, 2015 / September 22, 2015 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार हमारे देश में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। कुल मिलाकर यदि इसे देश की मुख्य समस्या ही नहीं बल्कि मूल समस्या कहा जाए तो कतई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कहने वाले कह सकते हैं कि देश में व्याप्त भयावह गरीबी, बेकारी एवं महंगाई को क्यों देश की मुख्य समस्या नहीं कहा जाना चाहिए? […] Read more » effective ways to eradicate corruption Featured भ्रष्टाचार
जन-जागरण हिन्दू आबादी बनाम मुस्लिम आबादी September 7, 2015 / September 7, 2015 | Leave a Comment वीरेन्द्र सिंह परिहार अभी गत माह ही केन्द्र सरकार ने वर्ष 2011 की धार्मिक जनगणना के आॅकडें जारी किए-जिसके अनुसार 2001 से 2011 के मध्य हिन्दुओं की आबादी 16.76 प्रतिशत की दर से बढ़ी तो मुस्लिम आबादी 24.6 प्रतिशत की दर से बढ़ी। गंभीर चिंता की विषय यह कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली […] Read more » Featured मुस्लिम आबादी हिन्दू आबादी
राजनीति ‘‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’’ August 16, 2015 | 3 Comments on ‘‘अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे’’ वीरेन्द्र सिंह परिहार ब्यापम घोटाले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घेराबन्दी करनें वाले प्रदेश के भतूपूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस पार्टी के बड़बोले नेंता दिग्विजय सिंह स्वतः कुछ ऐसे घिर गये हैं कि निकलने का रास्ता शायद ही मिल सके। उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह वर्ष 1993 से वर्ष 2003 तक […] Read more »
राजनीति सिर्फ हंगामा खड़ा करना…… July 28, 2015 / July 28, 2015 | 1 Comment on सिर्फ हंगामा खड़ा करना…… वीरेन्द्र सिंह परिहार म०प्र० विधानसभा का पावस-सत्र दो दिन में ही समाप्त हो गया, क्योंकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने विधानसभा चलने ही नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते सी.बी.आई. द्वारा भी व्यापम घोटाले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि चंूकि मुख्यमंत्री […] Read more » हंगामा खड़ा करना
राजनीति मोदी सरकार के एक वर्ष बनाम अच्छे दिन June 5, 2015 / June 5, 2015 | Leave a Comment -वीरेन्द्र सिंह परिहार- अब जब केन्द्र में मोदी सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसी स्थिति में ‘अच्छे दिन आ गए’ उस पर एक गहन समीक्षा की जरूरत है। जहां मोदी सरकार एवं भाजपा का दावा है कि ‘अच्छे दिन आए हैं,’ वहीं विरोधी दल मोदी सरकार को घेरने में […] Read more » Featured एनडीए सरकार नरेंद्र मोदी मोदी सरकार मोदी सरकार के एक वर्ष बनाम अच्छे दिन
राजनीति आधे-अधूरे सच के मायने May 31, 2015 / May 31, 2015 | Leave a Comment -वीरेन्द्र सिंह परिहार- 16 फरवरी 2011 को प्रधानमंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था -‘गठबंधन सरकारों की गई मजबूरियां होती है, जिसके कारण कई समझौते भी करने पडते है। क्योंकि गठबंधन धर्म का पालन करता होता है। वस्तुतः जब मनमोहन सिंह यह बात कह रहे थे, तो प्रकारांतर से वह अपने राज मंे हुए […] Read more » Featured आधे-अधूरे सच के मायने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
राजनीति प्रधानमंत्री नें जन-मन को अभिब्यक्त किया है April 9, 2015 / April 11, 2015 | 1 Comment on प्रधानमंत्री नें जन-मन को अभिब्यक्त किया है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोंदी नें गत दिनों न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के सम्मेंलन में न्यायपालिका के लिये स्पष्ट और बेबाक बातें बहुत ही सलीके से कहीं। प्रधानमंत्री नें कानूनीं प्रक्रिया में बड़े बदलावों के जरूरत पर बल दिया । पेचीदा कानूनों को हटानें पर जोर दिया । प्रधानमंत्री का कहना था कि जजों के ऊपर बहुत बड़ी […] Read more » Featured नरेन्द्र मोंदी न्यायपालिका प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नें जन-मन को अभिब्यक्त किया है वीरेन्द्र सिंह परिहार
कला-संस्कृति विविधा आर्य बनाम द्रविण April 3, 2015 / April 4, 2015 | 5 Comments on आर्य बनाम द्रविण बहुत दिनों तक निष्पक्ष यूरोपीय विद्वान संस्कृति को लैटिन, ग्रीक आदि सभी भाषाओं की जननी मानते थे। मैक्समूलर ने एक विशेष योजना के तहत कहा कि संस्कृत, लेैटिन ग्रीक आदि भाषाए बहनें हैं और इन भाषाओं की जननी प्राचीन भाषा थी, जिस उसने आर्य भाषा कहा। आगे रायल एशियाटिक सोसाइटी की अप्रैल 1866 को हुई […] Read more » arya vs dravin language aryan vs dravin civilisation Featured आर्य बनाम द्रविण वीरेन्द्र सिंह परिहार