लेखक परिचय

गोपाल बघेल 'मधु'

गोपाल बघेल 'मधु'

President Akhil Vishva Hindi Samiti​ टोरोंटो. ओंटारियो, कनाडा

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वाल बहु व्यस्त जगत विच रहता,
निरीक्षण करना बहुत कुछ होता;
जाना पहचाना पुरातन होता,
परीक्षण करना पुन: पर होता !

समय से बदलता विश्व रहता,
द्रष्टा भी वैसा ही कहाँ रहता;
द्रष्टि हर जन्म ही नई होती,
कर्म गति अलहदा सदा रहती !

बदल परिप्रेक्ष्य पात्र पट जाते,
रिश्ते नाते भी हैं सब उलट जाते;
रहे छोटे जो बड़े हो जाते,
वरेण्य शिशु बने नज़र आते !

सिखाया जिनको वे सिखा जाते,
आत्म पर सबके हैं वही रहते;
नयन से सयाने श्याम लगते,
लीला वे यशोदा से करवाते !

जीव जग वैसे ही व्यग्र रहते,
प्रौढ़ परमात्म भाव चुप रहते;
‘मधु’ प्रभु आँख में लखा होता,
ठुमकते लड़खड़ाते चल पड़ता !

गोपाल बघेल ‘मधु’

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