बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम

—–विनय कुमार विनायक
बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!

सन् उन्नीस सौ नौ के प्रथम सितंबर
यूरोप में जन्मे हिन्दी के एक पक्षधर
बेल्जियम का रम्सकपैले
तबसे बन गया बांदाग्राम!

माता मरियम बन गई हुलसी
पिता अदोल्फ बने आत्माराम!

बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!

एक यूरोपीय बेल्जियाई,
धर्म से एकनिष्ठ ईसाई,
सुनकर तुलसी की चौपाई,
तुम भारत आ बने भारतीय
तेरी मातृभाषा फ्लेमिस की
हिन्दी ने तबसे ले ली स्थान!

बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!
मानस की पुकार पर तेरा
बाइबिल लेकर भारत आना
झारखंड जन अरण्य गुमला में
फिर एक चित्रकुट बसाना!

कुछ ऐसे ही जैसे राम थे ईसा
या ईसा थे पूर्व में प्रभु राम!

बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!

तुमने हमें ‘शब्दकोश’ दिया
‘राम कथा:उत्पत्ति और विकास’,
‘रामकथा और तुलसीदास’लिखकर
तुमने हीं हे ऋषिवर दिया
वाल्मीकि-तुलसी का फिर से
आधुनिक विश्व को नव पैगाम!

बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!

तुम्हें कहे कोई फादर
या गुडमार्निंग सर
तो तुम्हारा चिढ़ जाना
बदले में बाबा कहलाना
और प्रणाम करना-कराना!

आज हमें ऐसा लगता
सचमुच में तुम थे एक
चलता-फिरता हिन्दुस्तान!

बाबा तुलसी के अधुनातन नाम,
बाबा कामिल वुल्के तुम्हें प्रणाम!
—–विनय कुमार विनायक

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