लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा जब कल भारत पहुँचे तो उनके कई चेहरे नजर आए। इनमें पहला मानवीय चेहरा नजर आया है। ओबामा के मानवीय पहलू पर टीवी चैनलों ने खूब जोर दिया है। बराक ओबामा ने आते ही 26/11 के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और जिस तरह का गंभीर भाषण दिया वह काबिले तारीफ़ है।

ओबामा किसी भी किस्म के उन्माद से रहित होकर 7 मिनट बोले उससे एक संकेत तो यही गया है कि आतंकवाद के खिलाफ उन्मादी भाषण काम नहीं आते बल्कि वे आग में घी का काम करते हैं। यह बात ओबामा पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के पराभव और हाल में सम्पन्न अमेरिकी चुनावों में अपने दल की पराजय से सीख चुके हैं।

ओबामा ने बड़े ही ठंड़े दिमाग से 26/11 के शहीदों की याद में उन्होंने जो कुछ कहा वह काफी मूल्यवान है और यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो भारत में आतंकवाद विरोधी मुहिम के नाम पर पाकविरोधी घृणा फैला रहे हैं। आतंकवाद पर ओबामा का ताजहोटल में दिया गया भाषण ठंड़ा और शानदार भाषण है। इस भाषण का पहला संदेश है आतंकवाद से लड़ो पाक से नहीं। दूसरा संदेश है आतंकवाद से उन्माद फैलाकर,घृणा फैलाकर नहीं लड़ा जा सकता है। ठंड़े दिमाग से लड़ो।

अधिकांश टीवी चैनल वाले यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि ओबामा जब 26/11 के बारे में बोलेंगे तो पाक का हवाला जरूर देंगे। उन्होंने 26/11 में पाक की भूमिका का कहीं कोई जिक्र नहीं किया। ऐसा करके ओबामा ने एकदम सही काम किया। वे जानते हैं कि आतंकवाद को उन्माद या घृणा फैलाकर नहीं पछाड़ सकते। हमारे टीवी चैनल 26/11 के बहाने और अन्य मौकों पर पाक विरोधी घृणा का प्रचार करते रहते हैं और कल भी अधिकांश टीवी चैनलों में यही भावना व्यक्त की गई कि ओबामा को कम से कम इस घटना में पाक की घृणित भूमिका की निंदा करनी चाहिए थी ।

यह सच है पाक 26/11 की घटना का आयोजक था और आज भी सीमापार से आतंकवादी गतिविधियों का संचालन पाक के प्रमुख संस्थान कर रहे हैं। समस्या यह है कि पाक के खिलाफ राय बनायी जाए या आतंकवाद के खिलाफ राय बनायी जाए। इसी संदर्भ में ओबामा ने जोर आतंकवाद के खिलाफ राय बनाने पर दिया है और ऐसा करके उन्होंने ठीक किया है। ओबामा का यह कहना ही काफी है कि हम 26/11 की इमेजों को नहीं भूल सकते । आतंकी हमले के संदर्भ में ओबामा ने बड़े ही सकारात्मक मनोभाव का परिचय दिया है। उन्होंने आतंकियों को हत्यारे की संज्ञा दी है। उन्होंने मुंबई की जनता,होटल के स्टाफ,पुलिस जवानों की बहादुरी आदि की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन लोगों के परिवारीजनों से भी मिले जो इस हमले में मारे गए थे। ओबामा ने कहा “We’ll never forget the awful images of 26/11, including the flames from this hotel that lit up the night sky. We’ll never forget how the world, including the American people watched and grieved with all of India.”

जो लोग ओबामा में उन्माद की तलाश कर रहे हैं उन्हें पहले दिन के भाषण से निराशा हाथ लगी है। क्योंकि उनकी इस यात्रा में अमेरिका के बड़े हित दांव पर लगे हैं ,बड़े हितसाधन करने के लिए उन्मादी भाषण मदद नहीं करते। ठंड़े भाषण मदद करते हैं।

ओबामा की इस यात्रा का लक्ष्य है अमेरिका के व्यापारिक-सैन्य हितों का विस्तार करना। देखना यह है कि ओबामा की पब्लिक रिलेशन की यह पद्धति कितनी प्रभावी सिद्ध होती है।

ओबामा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे भारत से क्या लेकर जाते हैं। पहलीबार कोई अमेरिका राष्ट्रपति भारत से कुछ मांगने आया है,ओबामा ने बड़ी साफगोई के साथ अपने देश के संकट का जिक्र कर दिया है ,उन्हें भारत से व्यापार करना है और वे चाहते हैं कि अमेरिकी युवाओं को नौकरियां मिलें। भारत में कभी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने युवाओं के लिए नौकरियां नहीं मांगी हैं,ओबामा ने कल भारत की जितनी प्रशंसा की है उतनी प्रशंसा भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं की हैं।

ओबामा की इस साफगोई और मानवीय भावनाओं के पीछे सुरक्षा,संप्रभुता और मातहत बनाने का बड़ा खेल चल रहा है। ओबामा का सामने मानवीय चेहरा मुझे निजी तौर पर अच्छा लग रहा है लेकिन उसके सैन्य और संप्रभुता संबंधी निहितार्थ खतरनाक लग रहे हैं। देखना है कहीं ओबामा की मानवीय इमेज की ओट में भारत की संप्रभुता को नष्ट करने का शैतानी खेल तो नहीं चल रहा ? क्योंकि कल ही ‘टाइम्स नाउ’ चैनल ने एक बड़ा ही सनसनीखेज दस्तावेज जारी किया है जिसमें बताया गया है कि अमेरिका के द्वारा भारत को सैन्य और तकनीकी रूप से मातहत बनाने की साजिशें चल रही हैं।

पेंटागन और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच में ‘इंटर ऑपरेविलिटी एग्रीमेंट’ नांमक समझौते पर अंदर ही अंदर वार्ताएं चल रही हैं। अगर यह समझौता हो जाता है तो भारत के लिए बड़ा अहितकारी होगा। चैनल के अनुसार भारत को इस सैन्य समझौते के तहत पेंटागन का मातहत बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। चैनल ने यहां तक का कहा कि य़ह एक और पाकिस्तान बनाने की योजना है।

इस दस्तावेज का सनसनीखेज खुलासा ओबामा की यात्रा के पहले दिन करके चैनल ने उस खेल की ओर संकेत किया है जो ओबामा की इस यात्रा की आड़ में चल रहा है। देखना होगा कि ओबामा भारत से जाते हैं तो क्या लेकर जाते हैं और क्या देकर जाते हैं।

संभावनाएं यही हैं कि ओबामा इस यात्रा से अमेरिका में अपनी खोई हुई साख को बचाना चाहते हैं। वे अमेरिकी जनमानस को यह सदेश देना चाहते हैं कि मैं भारत से अमेरिका के आम नागरिकों के लिए बहुत कुछ लेकर आया हूँ। ओबामा के पहले दिन के कार्यक्रमों पर ‘टाइम्स नाउ’ चैनल की संदेह दृष्टि लगी थी। वहीं अन्य चैनलों जैसे एनडीटीवी ,सीएनएन-आईबीएन आदि ने इस यात्रा के पहले दिन के कवरेज में

अमेरिकी सरकार के जनसंपर्क चैनल की तरह काम करते हुए ओबामा की व्यापार और मानवीयता की भावना को खूब उभारा है।

3 Responses to “बराक ओबामा की मानवीयता और हमारी संप्रभुता”

  1. Himwant

    सोनिया की सत्ता द्वारा अपनाई गई विदेश निति ने भारत को अमेरिकी खेमे मे ला खडा किया है। भारत की मिडिया जिस प्रकार बाराक हुसैन ओबामा से चीन एवम पाकिस्तान के विरुद्ध अमेरिकी सहयोग के लिए आग्रह करती दिख रही है उसे देख मुझे हिनता-बोध हो रहा था। ईतिहास से हमे यह सिखना चाहिए की वह ब्रिटेन/अमेरिका ही है जो दक्षिण एसिया तथा हिमालय आर-पार दुश्मनी कराता आया है। भारत को यह कोशीश करनी चाहिए खुद को मजबुत करे, खुद को मजबुत करने मे अमेरिका सहायक होता है तो इसमे कोई बुराई नही है। लेकिन भारत का दीर्घकालिन हित इस बात मे निहीत है की वह पडोसियो से बेहतर रिश्ते बना कर रखे। भारत, चीन एवम पाकिस्तान मिल कर मित्रतापुर्वक रहे इसमे ही सबकी भलाई है। अतः भारतीय विदेश निति मे संतुलन एवम परिपक्वता आवश्यक है। मिडिया एवम संघ को चीन व पाकिस्तान के विरुद्ध वाक-युद्ध से बचना चाहिए क्योकि उससे लाभ की बजाय हानी होती है ।

    विगत में अमेरिका से कई मोर्चो पर भारत धोखा मिला है, लेकिन बदली परिस्थितियो से अमेरिका ने भी कुछ सिखा है। अतः भविष्य में अमेरिका भारत का अच्छा मित्र (एलाई) बना रहेगा यह विश्वास भारत कर रहा है। अमेरिका भारत को बजार के रुप मे देखता है और अपने राष्ट्रिय-हितो के लिए भारत का उपयोग करना चाहता है । वह कुछ बेचता है तो भी यह जताता है की हम पर कृपा कर रहा है तथा कुछ खरीदता है तो भी हमे कृतार्थ कर रहा है ऐसा दिखाता है। हमे भी अपने राष्ट्रिय हितो के लिए वस्तुनिष्ठ ढंग से अमेरिका से मित्रता करनी चाहिए। अमेरिका से हम क्या पा रहे है और क्या दे रहे है इसका लेखा जोखा भारत की प्रबुद्ध जनता अवश्य करेगी। भारतीय मिडिया के लेखा-जोखा और विश्लेषण पर भारतीय जनता विश्वास नही करती है, क्योकीं उनमे छद्म अमेरीकी निवेष है।

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  2. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    ओबामा की भारत यात्रा के निहितार्थ कमोवेश यही हैं जो आलेख में दृष्टव्य हैं .ये तो तय है की भारत और अमेरिकी संबंधो के इतिहास में भारत को भावनात्मक धरातल पर अमेरिकी हितों का सृजनहार ही होना पड़ा है .अमेरिका के वर्तमान आर्थिक संकट में चीन ने वित्तीय घेरेबंदी की है .यह स्वाभाविक ही है की अब दुनिया का दुसरे नंबर का बड़ा बाजार याने भारत ही अब अमेरिका को उभार सकता है .श्री ओबामा रुपी श्रीकृष्ण भिक्षा पात्र लेकर सुदामा के तंदुल {भारत के सार्वजानिक उपक्रम ]छीनने आये हैं .थोडा मस्का भी लगा रहे हैं हम भोले भारतीय इसी में खुश हैं .कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पकिस्तान से जरा ज्यादा ही भयभीत हैं सो ओबामा रुपी कृष्ण के सुदर्शन के अभिलाषी हैं .

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  3. nand kashyap

    वस्तुतः बराक ओबामा जिस पृष्ठभूमि से आये हैं वह आम भारतीय से काफी कुछ मेल खाती हे वे हमारा दिल जीतने में सफल रहे .बाकि कटु सत्य यही है कि वे उत्कृष्ट salesman हैं और अपना हर सामान बेच गए .नन्द

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