आप मानो या न मानो वो आपका पप्पू है

विवेक कुमार पाठक
अगर राहुल गांधी पप्पू हैं तो बड़े बड़े नेता अपने पप्पुओं को प्यार पुचकार के राजनीति में ला रहे हैंआजकल जनता को अव्वल दर्जे की मूर्ख समझा जाता है। बड़े बड़े बुद्धिमान भरी दोपहरी ठग रहे हैं। वंशवाद का मुद्दा उछालते हैं मगर दुभात के साथ। उन्हें दूसरे दल में वंशवाद दिखता है। वे विपक्षी दल के युवराज को पानी पी पीकर कोसते हैं। पुरानी पार्टी की मुखिया का बेटा उनके लिए वंशवाद का वटवृक्ष है। वो वृक्ष है जो कई दशकों से तमाम प्रतिभाओं को ढके रहा। उस घने सघन वंशवाद ने सत्ता का उजियारा और नेतृत्व का अवसर किसी को मिलने ही नहीं दिया।वो तमाम प्रतिभाओं को पीछे करके अब फिर दल सरताज बना दिया गया है। उसके इस तरह से दल का सर्वेसर्वा बनने से उसकी जगह हंसाई की जा रही है। सत्ता की नींव उसे पप्पू बताकर रखी जा रही है। वो बड़े सत्ताधारी परिवार का बेटा है इसलिए वो पप्पू है बाकी पप्पू के दल के अलावा सब परम तत्व और परम ज्ञानी हैं।आदरणीयश्री। खुश रहने और दिल बहलाने के लिए यह इकतरफा नजरिया बढ़िया है मगर ये घर परिवार और मोहल्ले की गप्पबाजी नहीं है महाशय। यहां आप देश की दिशा प्रभावित करने वाली बहस कर रहे हैं। सवा अरब लोगों का देश है भारत। 1 अरब को अपनी खुशी के लिए वज्रमूर्ख मान लीजिए। आगे के 10 करोड़ को मूर्ख मान लीजिए। अगले 10 करोड़ को सीधा साधा भोला भाला भारतीय मान लीजिए मगर बचे 5 करोड़ पर तो रहम कीजिए। आप राष्ट्रीय स्तर के माननीय हैं। 5 करोड़ लोगों के लिए ही सही मगर कुछ तो संस्कार और विचार की राजनीति कीजिए। आप जो मुद्दे देश में गरज गरज कर उठाते हैं। जिन मुद्दों से आप प्रदेश में विपक्षी नेता पर शब्दबाण चलाते हैं। कभी आपने ये मुद्दे अपने दल में उठाए हैं। कभी इस मुद्दे पर तेजी से बढ़ते अपने दल के मुखिया को घेरा है। कभी वंशवाद खुद और अपने आसपास देखा है। अगर दूसरे का वंशवाद पसंद नहीं है तो फिर खुद क्यों अपना वंशवाद बढ़ा रहे हैं माननीय। क्या विपक्षी और आपके वंशवाद में क्वालिटी का फरक है। विपक्षी का बेटा सत्ता शिरोमणि बनकर पप्पू बनाया जा रहा है और अपना बेटा दुलारा और पुचकारा जा रहा है। हौले हौले दोस्त यारों के सहारे अपने युवराज को गद्दी तक पहुंचाया जा रहा है।
आपके विचार का सम्मान है। आपको वंशवाद पसंद नहीं है तो बहुसंख्यक जनता आपके आदर्शों को अपना आदर्श मानती है।
 उसे भी आपकी तरह वंशवाद पसंद नहीं है। समाज और समय ने कभी वंशवाद को बहुत अधिक बर्दाश्त नहीं किया है। कई सल्तनत और शहंशाह अपने बेटा बेटियों को हिन्दुस्तान का बादशाह बनाने में खप गए मगर बेटा बेटियों की काबिलियत ने ही उन्हें अर्श या फर्श पर बरकरार रखा। आपको पुरानी पार्टी में सत्ता नियंत्रक परिवार पप्पू लगता है तो फिर सारे सत्ता नियंत्रक परिवारों की संतानों को पप्पू कहिए। वो सत्तापुत्र होने के कारण देश भर का पप्पू बना दिया गया है तो आपकी सत्ता उसे क्या बनाएगी। आप कहो न कहो वो आपका पप्पू है।
 अगर आपको उनका पप्पू पसंद नहीं है तो फिर अपने पप्पू पर भी सत्ता लाड़ मत करिए।

Leave a Reply

%d bloggers like this: