प्रणब दा को मोदी का तोहफा

भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आपसी संबंध इतने अच्छे रहे हों, जितने प्रणब मुखर्जी और नरेंद्र मोदी के रहे हैं, ऐसा न तो मैंने कभी पढ़ा, न सुना और न ही जाना। प्रणब दा पर छपी एक चित्रकथा का विमोचन करते हुए मोदी ने कहा कि उनके और प्रणब दा के संबंध बाप-बेटे की तरह रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच कोई ऐसा विवाद नहीं हुआ, जैसे डा. राजेंद्रप्रसाद और नेहरु तथा डा. राधाकृष्णन और नेहरु के बीच हुआ करते थे।

ज्ञानी जैलसिंह और राजीव गांधी के बीच तो लंबी तनातनी चलती रही। कार्यकारी राष्ट्रपति ब.दा. जती और मोरारजी तथा के.आर. नारायणन और अब्दुल कलाम के ज़माने में भी दोनों सर्वोच्च पदाधिकारियों में खींचतान बनी रही। प्रणब मुखर्जी और मोदी के बारे में भी यही समझा जा रहा था कि दोनों की कैसे पटेगी ?

जीवन भर एक कांग्रेस के नेता रहे हैं और दूसरे भाजपा के ! एक उत्तरी ध्रुव है और दूसरा दक्षिणी ध्रुव ! दोनों ही जिद्दी स्वभाव के हैं और दोनों के बारे में उनके साथी कहते हैं कि दोनों अहंकारी हैं और अकड़बाज हैं लेकिन इस पुस्तक-विमोचन समारोह में दोनों के भाषणों से यह गलतफहमी एकदम दूर हो गई है।

प्रणब दा ने कहा कि मोदी सरकार से मेरे मतभेद कुछ मुद्दों पर हुए लेकिन गाड़ी कभी अटकी नहीं। मैंने अपनी राय साफ-साफ जाहिर की तो प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों ने मुझे भी पूर्ण रुप से संतुष्ट करने की कोशिश की। जैसे नोटबंदी और बार-बार अध्यादेश जारी करने पर मैंने चेतावनी दी। मोदी ने कहा कि उनका सौभाग्य है कि प्रणब दा की उंगली पकड़कर वे दिल्ली की जिंदगी में जमे।

मोदी-जैसे व्यक्ति का यह कथन उनके व्यक्तित्व के बेहद अनजान और सुंदर पहलू को उजागर करता है। यदि ऐसे ही संबंध वे अपने पार्टी-बुजुर्गों और साथी मंत्रियों से रखें तो वे एक सफल प्रधानमंत्री बन सकते हैं और लंबे समय तक अपने पद पर टिके रह सकते हैं। प्रणब दा और मोदी ने एक-दूसरे के बारे में जो कहा है, वह राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री संबंधों का उच्च आदर्श उपस्थित करता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच यदि इसी तरह के संबंध बने रहें तो भारतीय संविधान और गणतंत्र को कोई बड़ा खतरा होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। किसी राष्ट्रपति की बिदाईं पर किसी प्रधानमंत्री की तरफ से इससे बढ़िया तोहफा क्या दिया जा सकता है ?

Leave a Reply

%d bloggers like this: