रोज रोज का खाना खाना.
बड़ी चकल्लस है|
दादी दाल भात रख देती.करती फतवा जारी|
तुम्हें पड़ेगा पूरा खाना.नहीं चले मक्कारी|
दादी का यह पोता देखो कैसा परवश है|
बड़ी चकल्लस है|
“भूख नहीं रहती है फिर भी कहते खालो खालो|
घुसो पेट में मेरे भीतर.जाकर पता लगालो|
तुम्हें मिलेगा पेट लबालब.भरा ठसाठस है|”
बड़ी चकल्लस है|

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