लेखक परिचय

अमित शर्मा

अमित शर्मा

Posted On by &filed under राजनीति.


modi-manjhiआज मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मांझी की मुलाक़ात के बाद कयासों का दौर शुरू हो गया है. राजनीतिक हलकों में मोदी और मांझी की इस मुलाक़ात को अलग-अलग नज़रिए से देखा जा रहा है. हालाकि पूछने पर श्री माझी ने इस मुलाकात को अनौपचारिक मुलाकात बताया और कहा कि वे इस चुनाव में किसी भी दल के साथ कोई गठबंधन नहीं करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अपने छोटे से मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने दलित-वंचित समाज के लिए बहुत कुछ काम किया है और आने वाले समय में वे जनता के समक्ष उसी काम के सहारे वोट मांगने जायेगे.

परन्तु राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जनता परिवार के एक होने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. दिल्ली के चुनाव परिणाम ने भाजपा को दुबारा सोचने पर मजबूर कर दिया है. भाजपा को पता है कि नीतीश कुमार और लालू अगर एक साथ मिल चुनाव में उतरते हैं तो उनकी परेशानी बढ़ जाएगी. इसके अलावा अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस के पास लालू-नीतीश से मिलने के आलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता है. अगर ये तीन प्रमुख दल एक साथ आ जायेंगे तो मोदी ब्रांड पर बिहार की मुहर नहीं लग पायेगी. इसका असर बिहार के अलावा उत्तरप्रदेश तक में भी पड़ेगा जिसे फतह करना मोदी-अमित शाह के एजेंडा में सबसे ऊपर है.

यही कारण है कि इस मुलाक़ात के बहाने मोदी-माझी बिहार में राजनीतिक गोटियां बिछा रहे हैं. लेकिन जीतन राम मांझी का कहना था, “गठजोड़ की बात हम प्रधानमंत्री से क्यों करेंगे? लोग तो आपस में गठजोड़ कर ही रहे हैं. हम कोई गठजोड़ क्यों करेंगे?”

हलाकि नीतीश कुमार पर अपनी नाराजगी दिखाते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश को छोडकर पूरे बिहार में सभी के साथ उनका रिश्ता हो सकता है.

मांझी कहते हैं, “हमने इतना अच्छा काम किया है बिहार के लोगों के लिए. हम जहां जाते हैं लोग हमें अकेले में कहते हैं, ‘चुनाव अकेले लड़िए आप.’ किसी के साथ कोई गठजोड़ मत करिए. तो हम जनता कि बात मानेंगे या किसी और की बात मानेंगे? इसीलिए हमने निर्णय लिया है कि चुनाव अकेले लड़ेंगे.”

हलाकि कुछ दिन पहले ही मांझी ने भाजपा पर धोखा देने का आरोप लगाया था. लेकिन राजनीति में इस तरह के आरोपों प्रत्यारोपों का खास असर नहीं होता, ये सब जानते हैं.

लेकिन बातचीत के दौरान भाजपा के प्रति उनके तेवर नरम ज़रूर दिखाई दिए जब उन्होंने कहा, “अकेले लड़ेंगे और अकेले लड़कर जीतेंगे भी. उस समय अगर कुछ कमी-बेशी होगी, अगर समर्थन लेने या देने की ज़रुरत आ पड़ी तो तब देखा जाएगा. उसमें भाजपा भी शामिल है. भाजपा से भी हमें परहेज़ नहीं है. सिर्फ़ नीतीश कुमार से हमें परहेज़ है.”

मांझी को लगता है कि दलित नेता के रूप में खुद को स्थापित करना मुश्किल काम है क्योंकि अनुसूचित जाति के नेताओं की राजनीति में भी उपेक्षा होती रही है.

उनका कहना है कि इस उपेक्षा की वजह से दलितों नेताओं को हमेशा से चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है. मांझी कहते हैं, “पता नहीं मायावती जी ने कौन सी राजनीति की है कि आज वो चुप हैं. और पासवान जी तो सिर्फ़ अपनी जाति की ही राजनीति करते रहे. वो उससे आगे कभी बढ़ नहीं पाए.” अपने समर्थकों में इजाफा करने की गरज से उन्होंने बताया, “मैंने तो सवर्णों में भी जो दलित हैं उनकी बात भी की है. उनके लिए भी आरक्षण की हिमायत की है. दलित की राजनीति के साथ-साथ ग़रीब की राजनीति भी होनी चाहिए.”

उनका कहना था, “हम मानते हैं कि पिछड़े वर्ग में भी दलित हैं. हम अल्पसंख्यकों में दलितों के बारे में भी सोचते हैं. इसलिए दलित तो मेरे साथ हैं ही, मुझे अगड़ी जातियों और समाज के हर वर्ग के ग़रीबों का समर्थन मिल रहा है.”

बिहार में मुख्यमंत्री पर अपने कार्यकाल की चर्चा करते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जिन योजनाओं की घोषणा की थी वो सभी वर्गों के ग़रीबों के लिए थीं.

-अमित शर्मा

2 Responses to “बिहार चुनाव: मांझी के सहारे बिहार जीतेगी भाजपा”

  1. Dr Ashok Kumar Tiwari

    13-३-14 के समाचार के अनुसार बड़ोदा में बिहारी सम्मलेन में संसार की भ्रष्टतम कंपनी रिलायंस के परिमल नथवाणी को बुलाया जा रहा है कितनी दुखद बात है कि यही रिलायंस के सगे भाई बी. जे. पी. के नेता कहते थे ‘अविवाहित लड़के सदस्य बनें तो उनकी शादी बिहार की लड़कियों से करवाएंगे’ . हर गुजराती की जबान पर है कि कुछ समय तक रेल मंत्रालय बिहार वालों के हाथ में चला गया था इसलिए घटा हुआ है ( बिहारी टिकट नहीं लेते हैं और कहीं भी चैन पुलिंग करके गाड़ी रोक लेते हैं , काम न करके केवल भ्रष्टाचार से कमाते हैं ) इसीलिए मजबूरी में मोदी साहब को १७% रेल भाड़ा बढ़ाना पड़ा है और आज बिहार की वो स्वाभिमानी मानसिकता ( जब-जब देश का स्वर्ण युग था राजधानी पाटलिपुत्र थी )जिनका संसार कायल है —- अपनी बेइज्जती करने वाले इन ग्रुपों को भूल कर संसार की भ्रष्टतम कंपनी रिलायंस के परिमल नथवाणी का स्वागत कर रही है ??? :- –वास्तव में आज़ हमारी अस्मिता को क्या हो गया HAI – ??? :——-
    परिमल नथवाणी – उनके बेटे धनराज नथवाणी से प्रताड़ित होकर aur रिलायंस की प्रताड़नाओं से तंग आकर रिलायंस पेट्रोलियम फैक्ट्री जामनगर ( गुजरात ) से सटे गांव ” नवागांव की महिला सरपंच झाला ज्योत्सना बा घनश्याम सिंह ( २3- २-१५ ) को अपने पूरे परिवार के साथ जहर खाना पड़ता है, उनका गुनाह केवल ये है कि वे अपने गाँव की गायों के चराने की चारागाह रिलायंस को हड़पने नहीं दे रही हैं। इस कुकृत्य को छुपाने की कोशिस की जा रही है —इस किसान परिवार ने स्थानीय थाने से लेकर मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री और उच्च और सर्वोच्च न्यायालय तक गुहार लगाई थी पर सब रिलायंस के आगे – बेकार….” सब हमारे जेंब में हैं ” ऐसा रिलायंस के अधिकारी खुलेआम कहते हैं और यह साबित होता है क्योंकि महिला सरपंच तथा उनके परिवार द्वारा आत्महत्या के प्रयास पर भी अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है ( संलग्न फ़ाइलें अवश्य देखें ) !!!
    रिलायंस की हराम की कमाई डकार कर महिला समितियाँ और मानवाधिकार समितियाँ भी चुप हैं —
    मिस्टर अज़ीज़ ( 7600639265, ८७३३९३८५४३) सिक्का पटिया गाँव जामनगर( गुजरात ) निवासी को रिलायंस (वालों ने गलत इल्जाम लगाकर नेशनल सेक्यूरिटी एक्ट में बंद करवा दिया है जिससे आसपास के किसान लोग भी डरकर अपने जमीन के बकाया पैसे माँगने रिलायंस के पास नहीं जा रहे हैं !—– . क्या आप किसानों को न्याय दिलाएंगे ( Contact- 9978041892 ) ???????
    भले ही आज रिलायंस के दबाव में आकर मोदी साहब ने बिना किसी कारण के ३३% गैस के दाम बढ़ाकर किसानों की जिंदगी से खिलवाड़ करके देश को महँगाई-तबाही की तरफ धकेला है पर एक समय ऐसा भी था — नाक रगड़कर रिलायंस वाले मर गए थे पर मोदी साहब ने नथवाणी को गुजरात से राज्य सभा के लिए नहीं भेजा था फिर उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता बिकने को तैयार बैठे थे और रिलायंस ने सीबू सोरेन साहब की मदद से नथवाणी को राज्यसभा पहुंचा दिया जो अब वहां रिलायंस के लिए दलाली करते हैं. झारखंड के किसान और आम व्यक्ति उनसे परेशान है। एक मिस्टर yogendr सॉव जो कांग्रेस के नेता थे और रिलायंस के खिलाफ किसान आंदोलन को झारखण्ड में नेतृत्व दिया था उन्हें रिलायंस वालों ने न केवल पोस्ट से हटवाया अपितु उनपर झूठा केस भी करवा दिया।
    एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी सपना ( 9824597192) को रिलायंस द्वारा बहुत घृणित और अमानवीय व्यवहार के साथ निकाला गया वो गरीब महिला अधिकारियों के पैर पकड़कर फुट-फुट कर रोती रही और ये रिलायंस के राक्षस अधिकारी हँसते हुए महिलाओं की दुर्दशा करते रहते हैं ——- पर गरीबों की कौन सुनता है — रिलायंस कंपनी के स्कूलों में हिंदी शिक्षक -शिक्षिकाओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार होता है लिखित निवेदन पर भी सरकार चुप है –
    1८ चैनल्स को खरीदकर रिलायंस ने पत्रकारिता की अंतिम क्रिया कर दी है , इसलिए कोई रिलायंस-गुजरात की सच्चाई नहीं दिखा रहा है . कॉरपोरेट जगत रिलायंस में तो रिलायंस स्कूल के प्रिंसिपल पाकिस्तानी बॉर्डर जाम्नगर ( गुजरात ) में बच्चों के मन में जहर भरते हैं वो भी हिंदी दिवस ( 14-9-10 ) के दिन माइक पर प्रात:कालीन सभा में :- ” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है आपके शिक्षक-शिक्षिकाएँ गलत पढ़ाते हैं तथा गाँधी जी को भूल जाओ वो पुराने हो गए फेसबुक को अपनाओ, माता-पिता भी डाँटें तो पुलिस में शिकायत कर सकते हो- –रिलायंस कंपनी के स्कूलों में हिंदी शिक्षक -शिक्षिकाओं के साथ जानवरों जैसा व्यवहार होता है लिखित निवेदन पर भी सरकार चुप है फिर भी गुजरात मॉडल राज्य है ???
    अभी भी सम्हल जाओ नीचे से ऊपर तक सबको रिलायंस ने खरीदा हुआ है तभी तो नीरा राडिया टेप मामले पर न्यायालय भी चुप है !!! ऐसे ही देशद्रोहियों मैं लड़ रहा हूँ ! …….”
    दोस्तों नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक अम्बानी है.नक्सलियों का दायरा सीमित है और अम्बानी की पहुँच देश के कोने कोने तक है ..नकसली अपना हक़ छीनने के लिए लड़ते है और अम्बानी दूसरो का हक़ छीनने की जद्दो जहद में लगा हुआ है .
    Aap Ka Sadh
    अम्बानी का खोफ अब जज भी खाने लगे है इस मोदी सरकार में …कुठाराघात है ये लोकतंत्र पर मोदी सरकार द्वारा ………..!!!
    गैस कीमत में बढ़ोतरी को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के खिलाफ दर्ज एफआईआर मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने खुद को अलग कर लिया।
    उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से इस मामले की सुनवाई किसी अन्य जज को सौंपने का आग्रह किया है। आरआईएल और केंद्र सरकार ने दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी।
    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विभू बाखरू की अदालत में सुनवाई तय थी।http://www.delhincr.amarujala.com/…/judge-denies-to-hear-c…/
    ( मैं गुजरात में पिछले 15 सालों से रहकर अम्बानी की सच्चाई देख रहा हूँ -11 साल तो अम्बानी की लंका ( रिलायंस ) में भी रहा हूँ कोई भी ईमानदार आदमी इन लोगों की तरह नहीं रहना चाहेगा !अम्बानी के रिलायंस टाउनशिप जामनगर (गुजरात ) के बारे में आप जानते नहीं हो – वहाँ आए दिन लोग आत्महत्याएँ कर रहे हैं ! उनकी लाश तक गायब कर दी जाती है !!!!
    पूरे रिलायंस को तो एक मिसेज बारोत, जो 19-सी, सेक्टर-23, रिलायंस टाउनशिप, जामनगर गुजरात में रहती हैं( जिनके सिर पर देवी जी आती हैं) उनके दरबार में एच.आर.हेड की पत्नी भक्तों को चाय बनाकर पिलाती हैं !!!
    और एच.आर.हेड — ???
    रिलायंस जामनगर के बारे में आप जानते नहीं हो – वहाँ आए दिन लोग आत्महत्याएँ कर रहे हैं ! :–
    मैथ टीचर मनोज परमार को इतना प्रताड़ित किया गया कि मीटिंग में ही उनका ब्रेन हैमरेज हो गया, फिजिक्स टीचर मुहम्मद अकबर अपने रिलायंस क्वार्टर में ही फाँसी लगा लिया, 41-बी,सेक्टर-6 में रहने वाले धनंजय शर्मा चीफ टेक्नीशियन तालाब में कूदकर आत्महत्या कर लिए – घृणा के कारण एफ-206, सोरेल अपार्टमेंट सेटेलाइट अहमदाबाद का मकान मिसेज शर्मा ने बिल्कुल त्याग दिया है – पता कर सकते हो मरने वालों की लाश तक गायब कर दी जाती है या बनावटी दुर्घटना दिखाया जाता है और इस अन्याय में कांग्रेस-बी.जे.पी. बराबर के जिम्मेदार हैं – इन सब का विनाश होना ही चाहिए ——क्योंकि ये सभी आँखें बंद करके रिलायंस के जघन्य अपराधों को मौन स्वीकृति दे रहे हैं —
    रिलायंस जैसी कंपनी जो पाकिस्तानी बॉर्डर पर भारतीय सभ्यता संस्कृति के प्रति बच्चों के मन में जहर भरती है – – किसानों मजदूरों को प्रताड़ित करके आत्महत्या करने को मजबूर करती हैं उस भ्रष्ट कंपनी के परिमल नथवाणी को बिहार दिवस में बुलाना घोर अन्याय और पाप है ——- क्या ऐसे व्यक्ति को शुभ कार्य में बुलाएं चाहिए ???

    Reply
  2. surash karmarkar

    अटलबिहारीजी के वक्त चुनाव ६ माह पाहिले करवाये भाजपा हार गयी। मोदीजी ने लोकसभा चुनाव के तत्काल बाद चुनाव नहीं करवाये भाजपा हार गयी. महाराष्ट्र में आत्मविशवास रखकर शिवसेना के दवाब को सहन नहीं किया ,जीत गयी, हरियाणा में चौटाला के साथ में नहीं पडी चुनाव जीत गयी. अब बिहार में मांझी के फेर में पड़ी तो मझदार में रहेगी. दिल्ली में सतीश उपाध्याय के स्थान पर किरण बेदी को सेनापति बनाया तो वह असफल रही। अब बिहार में ऐसी गलती न हो. अन्यथा दिल्ली से शुरू हुई उसकी स्थिति का ग्राफ कहाँ तक जाएगा पता नही.

    Reply

Leave a Reply to surash karmarkar Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *