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    बिहार को बिहारी ही चलाएगा’ का क्या मतलब ?

    मिलन सिन्हाnitish

    बिहार को बिहारी ही चलाएगा, ऐसा चुनाव के इस मौसम में नीतीश कुमार कहने लगे हैं, क्यों कि उन्हें बिहारी मतदाताओं को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को बाहरी बता कर उन पर भरोसा न करने के लिए प्रेरित करना है. राजनीति में ऐसा कहना-करना गैर मुनासिब नहीं कहा जा सकता है. लेकिन तब इस बात से जो बात निकलेगी, उसे भी स्वीकारना तर्क संगत होगा.
    बहरहाल, एक बात तो साफ़ है कि बिहारी में बिहार चलाने की क्षमता है जिसे सभी जानते और मानते हैं. तभी तो अब तक बिहार के मुख्य मंत्री बिहारी ही रहे हैं और आगे भी रहेंगे. तब क्या नीतीश कुमार लोगों को यह कह कर दिग्भ्रमित करना चाहते हैं कि मौजूदा चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी या अमित शाह के नेतृत्व में बिहार में सरकार गठित होगी और तब बिहार का सत्यानाश हो जाएगा. चुनावी राजनीति के कम जानकार भी ऐसा घटित होने की कल्पना तक नहीं कर सकते.
    यद्दपि भारतीय संविधान में हर नागरिक को देश में कहीं से भी चुनाव लड़ने का अधिकार है, तथापि ‘बिहार को बिहारी ही चलाएगा’ वाले बयान से अगर नीतीश कुमार का आशय यह है चुनावी राजनीति में बिहार का प्रतिनिधित्व करने का हक बिहारी को मिलना चाहिए, तो इसका स्वागत होना चाहिए. ऐसा इसलिए कि न तो बिहार में मेधा की कमी है और न ही मेहनत व संघर्ष के बूते आगे बढ़ने की क्षमता रखने वाले लोगों की. लेकिन तब नीतीश कुमार को बिहार की जनता से माफी मांगते हुए राज्य सभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले शरद यादव, के. सी. त्यागी, पवन वर्मा सरीखे शुद्ध गैर बिहारियों से अविलम्ब इस्तीफा देने का आग्रह करना चाहिए.
    ज्ञातव्य है कि देश के अन्य प्रदेशों में अपनी–अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने एवं तलाशने में विफल रहे अनेक राजनीतिक नेताओं को बिहार के हमारे नीतीश कुमार जैसे नेताओं ने ही सर–आँखों पर बिठाया, जिससे बिहार के अनेक समर्थ नेताओं को उनके वाजिब हक से वंचित रहना पड़ा. ज्ञातव्य है कि सम्प्रति राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व करने वाले कुल 16 सांसदों में से 6 सांसद बिहार से बाहर के हैं और इन 6 सांसदों में से 5 नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से हैं.

    मिलन सिन्हा
    मिलन सिन्हाhttps://editor@pravakta
    स्वतंत्र लेखन अब तक धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, नवनीत, कहानीकार, समग्रता, जीवन साहित्य, अवकाश, हिंदी एक्सप्रेस, राष्ट्रधर्म, सरिता, मुक्त, स्वतंत्र भारत सुमन, अक्षर पर्व, योजना, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, आज, प्रदीप, राष्ट्रदूत, नंदन सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेक रचनाएँ प्रकाशित ।

    1 COMMENT

    1. चुनाव अमित शाह और नरेंद्र मोदी के नाम से लड़ा जा रहा है.ऐसा क्यों?इसके अगर भाजपा जीत गया तो किसी कठपुतली को बैठा दिया जाएगा.अब बात आती है उचित और अनुचित की, जब अमित शाह और उनके सुर में सुर मिला कर सुशील मोदी ने कह दिया कि महागठबंधन की जीत पर पाकिस्तान में पटाखे चलेंगे ,तो इस वक्तव्य से तो वे नीचता की सभी सीमा लांघ गए.इसके बाद कैसी नैतिकता और कौन सी नैतिकता?

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