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    खेलों की दुनिया के चमकते सितारे

    योगेश कुमार गोयल

                एक जमाना था, जब हम बचपन में सुनते थे, ‘खेलोगे कूदोगे, बनोगे खराब। पढ़ोगे लिखोगे, बनोगे नवाब।’ लेकिन आज खेलों की दुनिया कैरियर को लेकर भी पूरी तरह बदल चुकी है। खेल अब महज खेल नहीं रह गए हैं बल्कि कैरियर का बेहतरीन विकल्प बनकर उभर रहे हैं। विभिन्न खेल स्पर्द्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों के लिए अब पैसे और मान-सम्मान की कोई कमी नहीं है। खेल जगत का इतिहास ऐसे अनेक खिलाडि़यों से भरा पड़ा है, जिन्होंने बेहद गरीबी और संघर्षों के दौर से गुजरकर अपनी एक अलग पहचान बनाई और अपने शानदार खेल प्रदर्शन से पूरे देश का नाम दुनियाभर में रोशन किया। ऐसे ही कुछ खिलाडि़यों को हर साल 29 अगस्त को खेल दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष कुल सात केटेगरी के 74 खिलाडि़यों और कोचों को कोरोना के चलते पहली बार हुए वर्चुअल समारोह में राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

                दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्मृति में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ पहली बार कुल पांच खिलाडि़यों क्रिकेटर रोहित शर्मा, टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा, हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल, पहलवान विनेश फोगाट तथा पैरालम्पिक गोल्ड मेडलिस्ट मरियप्पन थांगावेलू को प्रदान किया गया। इससे पहले 2016 में एक साथ चार खिलाडि़यों को यह पुरस्कार मिला था। तब रियो ओलम्पिक में रजत जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु, महिला रेसलिंग में कांस्य जीतने वाली साक्षी मलिक के अलावा जिमनास्ट दीपा कर्माकर तथा शूटर जीतू को यह सम्मान मिला था। जैसा कि इस सम्मान के नाम से ही जाहिर है कि यह पुरस्कार खेल जगत के रत्नों अर्थात् विभिन्न खेलों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों को दिया जाता है। इस पुरस्कार में एक पदक, एक प्रशस्ति पत्र और साढ़े सात लाख रुपये प्रदान किए जाते थे लेकिन पुरस्कार राशि बढ़ाकर इस बार से 25 लाख रुपये कर दी गई है।

                खेल रत्न पुरस्कार की शुरूआत 1991-92 में की गई थी और तब शतरंज के ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को पहली बार यह सम्मान प्राप्त करने का गौरव हासिल हुआ था। 2001 में निशानेबाज अभिनव बिंद्रा महज 18 वर्ष की आयु में यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने थे। अभी तक कुल 43 खिलाडि़यों को खेल रत्न पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। 12 सदस्यीय राष्ट्रीय खेल पुरस्कार चयन समिति ओलम्पिक, पैरालम्पिक, एशियाई तथा राष्ट्रमंडल खेलों जैसे विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के बाद ही अपनी सिफारिशें खेल एवं युवा मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेजती है।

                इस वर्ष जिन पांच खिलाडि़यों को खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, उन्होंने अपने जीवन में बहुत कड़ा संघर्ष करने के बाद इस मुकाम को छुआ है। तमिलनाडु के सालेम जिले में एक बहुत गरीब परिवार में जन्मे मरियप्पन के पिता बहुत सालों पहले ही परिवार छोड़कर चले गए थे और मां सरोजा ने सब्जियां बेचकर परिवार का भरण-पोषण किया। जब मरियप्पन पांच साल के थे, तब एक बस उनके पैर के ऊपर से गुजर जाने के कारण उनका पैर कट गया था। उस भयानक सड़क दुर्घटना के बाद 17 साल की लंबी अदालती लड़ाई के पश्चात् उनके परिवार को केवल दो लाख रुपये मुआवजा मिला, जिसमें से एक लाख रुपये वकीलों की फीस में चले गए और एक लाख मरियप्पन के भविष्य के लिए बैंक खाते में जमा कर दिए गए। उनके इलाज के लिए लिया गया तीन लाख रुपये का ऋण भी उनके द्वारा पैरालम्पिक में गोल्ड मैडल जीते जाने तक नहीं चुकाया जा सका था। उन्होंने 2016 के रियो पैरालम्पिक में ऊंची कूद में स्वर्ण पदक हासिल कर देश को गौरवान्वित किया। पैरालम्पिक में भारत के लिए पदक जीतने पर केन्द्र सरकार ने उन्हें 75 लाख रुपये और तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने दो करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा की थी।

                टीम इंडिया के हिटमैन रोहित शर्मा का जीवन भी संघर्षों से भरा रहा है। महाराष्ट्र के नागपुर में 30 अप्रैल 1987 को जन्मे रोहित को बचपन से ही क्रिकेट का शौक था लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें क्रिकेट की कोचिंग दिलाई जा सके। उनके चाचा और कुछ मित्रों द्वारा छोटी-छोटी राशि एकत्र करने के बाद उनका दाखिला एक छोटी सी अकादमी में करवाया गया। वहां उन्होंने अपनी प्रतिभा से हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और एक क्रिकेट शिविर में कोच दिनेश लाड का ध्यान उन पर गया। उसके बाद उन्होंने अगले चार साल तक रोहित के लिए स्कॉलरशिप का प्रबंध करा दिया और फिर रोहित ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कभी स्पिन गेंदबाजी से क्रिकेट कैरियर की शुरूआत करने के बाद वे कब मध्यम क्रम बल्लेबाजी से टीम इंडिया के एक सफल और भरोसेमंद ओपनर और टेस्ट मैचों के सलामी बल्लेबाज बन गए, पता ही नहीं चला। आज रोहित के नाम रिकॉर्डों का ऐसा अंबार लगा है कि उन्हें रिकॉर्डों का बेताज बादशाह भी कहा जाता है।

                महिला हॉकी टीम की कप्तान 25 वर्षीया रानी रामपाल का जीवन भी अभावों के दौर से गुजरा। उनके पिता रामपाल घोड़ा गाड़ी चलाकर और ईंटें बेचकर परिवार का गुजारा किया करते थे। रानी को बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था लेकिन उनके शौक को पूरा करने में गरीबी आड़े आ रही थी। फिर भी रानी की जिद के आगे पिता उन्हें हॉकी की ट्रेनिंग दिलाने के लिए तैयार हो गए। जैसे-तैसे रानी का दाखिला शाहबाद हॉकी अकादमी में हो गया और गुरू द्रोणाचार्य अवार्डी कोच बलदेव सिंह के सानिध्य में रानी की प्रतिभा ऐसी चमकी कि 15 साल की उम्र में ही वह सबसे युवा भारतीय खिलाड़ी के रूप में विश्व कप में भाग लेने वाली टूर्नामेंट की शीर्ष फील्ड गोल स्कोरर रही और टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी चुनी गई। उसके बाद रानी ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलकर कई पुराने रिकॉर्ड तोड़े और भारत को कई अंतर्राष्ट्रीय मैचों में शानदार जीत दिलाई। टीम इंडिया को टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई कराने में अहम भूमिका निभाने वाली रानी हॉकी में खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला और अब तक की कुल तीसरी हॉकी खिलाड़ी हैं।

                राष्ट्रमण्डल और एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी मनिका बत्रा ने महज चार वर्ष की उम्र में ही टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। राष्ट्रमंडल खेलों की चैम्पियन रही 25 वर्षीया मनिका टेबल टेनिस की पहली ऐसी खिलाड़ी हैं, जिन्हें उनके बेहतरीन खेल प्रदर्शन के लिए ‘खेल रत्न’ पुरस्कार दिया गया है। राज्य स्तरीय अंडर-8 प्रतियोगिता जीतने के बाद मनिका लगातार आगे बढ़ती रही और 2011 में चिली ओपन में अंडर-21 श्रेणी का रजत पदक अपने नाम किया। 2015 की राष्ट्रमंडल टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में कुल तीन पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 2016 के दक्षिण एशियाई खेलों में भी मनिका ने तीन स्वर्ण पदक और एक रजत पदक अपने नाम किए। मनिका के नेतृत्व में टीम इंडिया ने 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में सिंगापुर को हराकर महिला टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने उन राष्ट्रमंडल खेलों में महिला टीम और महिला एकल में स्वर्ण सहित कुल चार पदक जीते थे। जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में भी उन्होंने ऐतिहासिक मिश्रित युगल का कांस्य पदक जीता था। वह अभी तक ऐसी ही कई मुश्किल स्पर्धाओं में भी अनेक पदक जीतकर टेबल टेनिस में भारत का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करा चुकी हैं। अपने 2018 सीजन के बाद से वह भारतीय टेबल टेनिस की पोस्टर गर्ल रही हैं। खेल रत्न अवार्ड मिलने पर मनिका का कहना है कि उनके लिए अब एक अतिरिक्त जिम्मेदारी है कि वे आगे बढ़ें और देश को और अधिक सम्मान दिलाएं।

                खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित की गई विनेश फोगाट के नाम की सिफारिश इसी साल जून माह में रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा की गई थी। विनेश टोक्यो ओलम्पिक के लिए क्वालिफाई करने वाली एकमात्र भारतीय महिला पहलवान हैं। 53 किलोग्राम भार वर्ग में ओलम्पियन पहलवान विनेश फोगाट भारत की सबसे सफल महिला पहलवानों में से एक हैं। उन्होंने 2018 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और 2020 की एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। विनेश कहती हैं कि खेल रत्न पुरस्कार मिलने के बाद उनसे लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं और अब वह अगले साल होने वाले टोक्यो ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतने के लिए कड़ी मेहनत करेंगी। वह कहती है कि वह उन्हें दिए गए सर्वोच्च खेल सम्मान का मान रखेंगी।

    योगेश कुमार गोयल
    योगेश कुमार गोयल
    स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

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