धर्म-अध्यात्म दक्षिण भारत के संत (16) शैवाचार्य नयनार August 26, 2015 by बी एन गोयल | Leave a Comment बी एन गोयल करचरणकृतं, वाक्कायजं कर्मजं वा, श्रवण नयनजं, मानसमवापराधं| विहितमविहितं सर्वमेततक्षमस्व जय जय करुणाब्धे, श्री महादेव शम्भो|| हाथों से, पैरों से, वाणी से अथवा कर्मों से, कानों से, अथवा आँखों से, अथवा मन से, जाने अथवा अनजाने में यदि कभी कोई कहीं अपराध हो गया हो तो हे करुणा के सागर […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मूर्तिपूजा के इतिहास पर महर्षि दयानन्द का उपदेश August 24, 2015 / August 24, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment महर्षि दयानन्द के इतिहास विषयक एक उपदेश जिसमें उन्होंने महाभारत काल व उसके बाद देश में धर्म व अध्ययन अध्यापन पर प्रकाश डाला है, को हमनें अपने पूर्व लेख में प्रस्तुत किया था। उसी क्रम में उसके बाद देश में वेदाध्ययन को छोड़कर मूर्तिपूजा के प्रचलन विषयक घटी घटनाओं के इतिहास पर उनके उपदेश […] Read more »
धर्म-अध्यात्म महर्षि दयानन्द का भारत के यथार्थ इतिहास पर महत्वपूर्ण उपदेश August 22, 2015 / August 22, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द (1825-1883) का सारा जीवन ईश्वर की खोज, मृत्यु पर विजय, योग, अध्ययन-अध्यापन, उपदेश, वेद-धर्म प्रचार, शास्त्रार्थ, समाज सुधार व अनुमानतः सन् 1857 के देश की आजादी के लिए संग्राम में गुप्त रूप से कार्य करने में व्यतीत हुआ था। महर्षि दयानन्द बाल ब्रह्मचारी थे। वह जन्म से ही […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मैं और मेरा धर्म August 21, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on मैं और मेरा धर्म मैं कौन हूं और मेरा धर्म क्या है? इस विषय पर विचार करने पर ज्ञात होता है कि मैं एक मुनष्य हूं और मनुष्यता ही मेरा धर्म है। मनुष्य और मनुष्यता पर विचार करें तो हम, मैं कौन हूं व मेरे धर्म मनुष्यता का परिचय जान सकते हैं। इसी पर आगे विचार करते हैं। […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मैं और मेरा आचार्य दयानन्द August 20, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment देश व संसार में अनेक मत-मतान्तर हैं फिर हमें उनमें से ही किसी एक मत को चुन कर उसका अनुयायी बन जाना चाहिये था। यह वाक्य कहने व सुनने में तो अच्छा लगता है परन्तु यह एक प्रकार से सार्थक न होकर निरर्थक है। हमें व प्रत्येक मनुष्य को यह ज्ञान मिलना आवश्यक […] Read more » मेरा आचार्य दयानन्द
धर्म-अध्यात्म वर्तमान शिक्षा में समग्र वैदिक विचारधारा को सम्मिलित करना सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास और देशोन्नति के लिए आवश्यक August 20, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment सभी नागरिकों, नेताओं व सुधी जनों का कर्तव्य हैं कि वह देश की अधिक से अधिक उन्नति पर विचार करें और अच्छे-अच्छे सुझाव समाज व देश को दें। देश में जो लोग व शक्तियां देश व सर्वहितकारी विचारों व योजनाओं का किसी भी कारण से विरोध करें, देश की शिक्षित प्रजा को मत-सम्प्रदाय-पन्थ आदि […] Read more »
धर्म-अध्यात्म विविधा दक्षिण भारत के संत (15) पेरियलवार विष्णुचित्त August 17, 2015 by बी एन गोयल | 2 Comments on दक्षिण भारत के संत (15) पेरियलवार विष्णुचित्त बी एन गोयल हे ईश्वर हमारी रक्षा करो। हमारे परिवार के सभी सदस्य, हमारे सभी पूर्वज और हमारी आगामी पीढ़ियाँ, सब आप के सेवक हैं। आपके भक्त हैं, आप के अनुचर हैं, आप ही हमारी रक्षा करें, आप ही हम पर अपनी कृपा करें।…………… पल्लाण्डु तिरुनलवेली ज़िले के श्री विल्लीपुत्तुर नमक गाँव में मुकुंद […] Read more » दक्षिण भारत के संत पेरियलवार विष्णुचित्त
धर्म-अध्यात्म धार्मिक अंधविश्वासों का कारण सद्ग्रन्थों का स्वाध्याय न करना August 17, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment अंधविश्वास को किसने जन्म दिया है? विचार करने पर ज्ञात होता है कि अविद्या और अज्ञान से अन्धविश्वास उत्पन्न होता है। अन्धविश्वास दूर करने का उपाय क्या है, इस पर विचार करने पर ज्ञात होता है कि ज्ञान व विद्या से अन्धविश्वास दूर होते हैं। ज्ञान व अविद्या कहां मिलती है? इसका उत्तर है […] Read more » धार्मिक अंधविश्वासों का कारण सद्ग्रन्थों का स्वाध्याय
धर्म-अध्यात्म क्या अज्ञान, अन्धविश्वास, अन्धी श्रद्धा व आस्था का खण्डन अनुचित है? August 16, 2015 by मनमोहन आर्य | 2 Comments on क्या अज्ञान, अन्धविश्वास, अन्धी श्रद्धा व आस्था का खण्डन अनुचित है? सभी मनुष्यों का धर्म एक है या अनेक? वर्तमान में सभी समय में प्रचलित अनेक मत व धर्मों में लोग किसी एक को मानते हैं। प्रश्न का उत्तर देने के लिए हमें धर्म व मत को जानना होगा। यथार्थ धर्म को जान लेने के बाद स्वयं उत्तर मिल जायेगा। धर्म मनुष्य जीवन में श्रेष्ठ […] Read more » अन्धविश्वास अन्धी श्रद्धा व आस्था का खण्डन अनुचित है?
धर्म-अध्यात्म ईश्वर की कृपा व वेदाध्ययन से ही नास्तिकता की समाप्ति सम्भव August 15, 2015 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment ‘खुदा के बन्दो को देखकर खुदा से मुनकिर हुई है दुनिया, कि जिसके ऐसे बन्दे हैं वो कोई अच्छा खुदा नहीं।।‘ आजकल संसार में सभी मतों के शिक्षित व धनिक मनुष्यों का आचरण प्रायः श्रेष्ठ मानवीय गुणों के विपरीत पाया जाता है जो मनुष्यों को नास्तिक बनाने में सहायक होता। इसका एक कारण ऐसे […] Read more » नास्तिकता की समाप्ति
धर्म-अध्यात्म विविधा क्या फलित हो पाया है आजादी का सपना? August 15, 2015 / August 15, 2015 by ललित गर्ग | Leave a Comment ललित गर्ग पन्द्रह अगस्त हमारे राष्ट्र का गौरवशाली दिन है, इसी दिन स्वतंत्रता के बुनियादी पत्थर पर नव-निर्माण का सुनहला भविष्य लिखा गया था। इस लिखावट का हार्द था कि हमारा भारत एक ऐसा राष्ट्र होगा जहां न शोषक होगा, न कोई शोषित, न मालिक होगा, न कोई मजदूर, न अमीर होगा, न कोई गरीब। […] Read more » आजादी का सपना?
धर्म-अध्यात्म कलयुग के यह स्वयंभू भगवान August 14, 2015 by निर्मल रानी | 2 Comments on कलयुग के यह स्वयंभू भगवान निर्मल रानी भारतवर्ष को पूरे विश्व में विभिन्न प्रकार के धर्मों,आस्थाओं,नाना प्रकार के विश्वास तथा अध्यात्मवाद के लिए जाना जाता है। इस देश की धरती ने जितने महान संत,फ़क़ीर तथा अध्यात्मिक गुरू पैदा किए उतने संभवत: किसी अन्य देश में नहीं हुए। यही वजह है कि भारतवर्ष को राम-रहीम,बुद्ध और नानक की धरती के रूप […] Read more » कलयुग के यह स्वयंभू भगवान