चिंतन राजनीति ‘सेक्युलर’ कौन? और ‘सेक्युलर’ मतलब क्या? June 25, 2012 / June 25, 2012 by मा. गो. वैद्य | 7 Comments on ‘सेक्युलर’ कौन? और ‘सेक्युलर’ मतलब क्या? मा. गो. वैद्य हमारे देश में ‘सेक्युलर’ शब्द का खूब हो-हल्ला मचा है. यह हो-हल्ला मचाने वाले, ‘सेक्युलर’ शब्द का सही अर्थ ध्यान में नहीं लेते और वह शब्द राजनीतिक प्रणाली में कैसे घुसा यह भी नहीं समझ लेते. ‘सेक्युलर’ का अर्थ ‘सेक्युलर’ शब्द का अर्थ है इहलोक से संबंधि, ऐहिक. अंग्रेजी में this-worldly इसका, […] Read more » धर्मनिरपेक्षता सेक्युलर सेक्युलरिज्म
धर्म-अध्यात्म धर्म-कर्म में दिखावे से बचें June 24, 2012 / June 24, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on धर्म-कर्म में दिखावे से बचें पब्लिसिटी से क्षीण होता है पुण्य डॉ. दीपक आचार्य धर्म धारण करने का विषय है, प्रचार-प्रसार का नहीं। धर्म का मूल मर्म लोकोपकारी जीवनयापन और ऊर्ध्वगामी यात्रा से पूर्व अधिकाधिक पुण्य संचय का है। आजकल धर्म और पुण्य के नाम पर कई प्रकार के आडम्बरों और धूर्त्तताओं का जमाना है। पहले धर्म का नाम सुनते […] Read more » धर्म
धर्म-अध्यात्म ऐतिहासिक मन्दिरों को ध्वस्त करने का षड्यंत्र June 21, 2012 / July 5, 2012 by विनोद बंसल | 2 Comments on ऐतिहासिक मन्दिरों को ध्वस्त करने का षड्यंत्र दिल्ली हवाई अड्डा प्राधिकरण व जी एम आर ने बन्धक बनाए राजधानी के अनेक मन्दिर, दर्शनों से रोकने पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त रोष विनोद बंसल दिल्ली के दक्षिण में एक गांव ने अपनी ज़िन्दगी के हजारों सालों में न सिर्फ़ अनेक उतार-चढ़ाब देखे बल्कि देश की आज़ादी के आन्दोलन व श्री विनोबा भावे के भू […] Read more »
चिंतन गौघृत जरूरी है यज्ञ-अनुष्ठानों में June 21, 2012 / June 20, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on गौघृत जरूरी है यज्ञ-अनुष्ठानों में डॉ. दीपक आचार्य गौघृत जरूरी है यज्ञ-अनुष्ठानों में वरना पसरता है अनिष्ट का साया आजकल सभी जगह होने वाले धार्मिक समारोहों और यज्ञ-अनुष्ठानों की धूम को देखकर लगता है जैसे पूरा परिवेश और हमारा क्षेत्र धार्मिक होने लगा है और अब सतयुग आ रहा है। धर्म के नाम पर आयोजनों का दौर निरन्तर रहने लगा […] Read more » cow gheein hawan
चिंतन गौवंश के बगैर व्यर्थ है जीवन June 18, 2012 / June 18, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on गौवंश के बगैर व्यर्थ है जीवन डॉ. दीपक आचार्य न धर्म संभव है, न पुण्यार्जन पृथ्वी के अस्तित्व का सीधा संबंध गौवंश से है। इस दैवीय पशु के बिना न जीवन की कल्पना की जा सकती है न और कुछ। व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त होने वाले सभी संस्कारों में गायों की किसी न किसी रूप में भूमिका को […] Read more » life without cow is useless
चिंतन मानवता का होना जरूरी June 11, 2012 / June 11, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on मानवता का होना जरूरी डॉ. दीपक आचार्य मनुष्य शरीर ही काफी नहीं मानवता का होना जरूरी है दुनिया भर में जनसंख्या विस्फोट का दौर निरन्तर जारी है। हजारों-लाखों रोज पैदा हो रहे हैं। हमारे यहाँ भी खूब पैदा होते रहे हैं, हो रहे हैं और होंगे। लेकिन हाल के वर्षों में समाज की जो स्थिति सामने दिख रही है […] Read more » मनुष्य शरीर
चिंतन जीते जी सराहना की आदत डालें June 10, 2012 / June 10, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on जीते जी सराहना की आदत डालें डॉ. दीपक आचार्य मरने के बाद कीर्तिगान की बजाय जीते जी सराहना की आदत डालें मानव समुदाय में अच्छे कार्यों और हुनर की बदौलत प्रतिष्ठा पाने और अच्छा मुकाम बनाने के लिए हर कोई व्यक्ति अनथक प्रयास करता है और इनमें से कई अपनी मंजिल पाते भी हैं। कोई देर से तो कोई धीरे। कई […] Read more » admiring people सराहना की आदत
चिंतन मजा तो तब है जब अच्छे काम करें June 9, 2012 / June 9, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य मजा तो तब है जब अच्छे काम करें बुरे काम करने वाले तो खूब हैं दुनिया में अपने स्वार्थ और ऎषणाओं की पूत्रि्त के लिए लोग इतने जतन करते रहते हैं जितने वे सच्चे इंसान बनने के लिए ये पूरी जिन्दगी भर भी नहीं कर पाते। आज हालात यह हो गए हैं कि […] Read more » do good work अच्छे काम करें
चिंतन टिप्पणी करें तब ध्यान रखें June 8, 2012 / June 8, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 3 Comments on टिप्पणी करें तब ध्यान रखें डॉ. दीपक आचार्य टिप्पणी करें तब ध्यान रखें अपने और सामने वाले के कद का प्रतिक्रिया करना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन इसके पहले हमें स्वयं और दूसरे पक्षों के कद का ध्यान रखना चाहिए तभी प्रतिक्रिया को गरिमामय तथा शालीन कहा जा सकता है और ऎसी प्रतिक्रिया अपना अच्छा तथा दीर्घकालीन प्रभाव छोड़ […] Read more » टिप्पणी करें तब ध्यान रखें
चिंतन नीयत साफ हो तभी नियति साथ June 6, 2012 / June 6, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 2 Comments on नीयत साफ हो तभी नियति साथ सारी उपासनाओं, साधनाओं और कर्मयोग का यही सार है कि जिसकी नीयत साफ है, भगवान उसी के साथ है। फिर जिसके साथ भगवान है उसे नियति भी हरसंभव सहयोग देती है। मनुष्य के जीवन में सफलता पाने के लिए मन का साफ होना पहली और अनिवार्य शर्त है। जो भी भजन-पूजन और आराधना की जाती […] Read more »
चिंतन लावारिश पशुओं से ज्यादा घातक हैं स्वच्छन्द विचरते आवारा आदमी June 4, 2012 / June 4, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | 1 Comment on लावारिश पशुओं से ज्यादा घातक हैं स्वच्छन्द विचरते आवारा आदमी डॉ. दीपक आचार्य आजकल हर कहीं आवारा या लावारिश मवेशियों की चर्चा होती है और इन पर प्रतिबंध की बातें अक्सर छायी रहने लगी हैं। एक बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि इस देश में कोई लावारिश नहीं है। जिस ईश्वर ने उसे धरा पर भेजा है वह उन सबका वारिस है। वही परमपिता […] Read more » useless men more fatal than uselessanimals पशुओं से ज्यादा घातक हैं
चिंतन समाज बदहाल कानून के साये में जिंदगी June 3, 2012 / June 3, 2012 by राखी रघुवंशी | Leave a Comment राखी रघुवंशी अपने चरम पर हैं। हर रोज अखबार में अपराध से जुड़ी दो खबरें तो निशिचत तौर पर प्रकाशित होती ही हैं। मर्डर, चोरी, बलात्कार, दुर्घटना या फिर विधार्थियों द्वारा आत्महत्या। इनमें सबसे निर्मम है, ट्रक या डंपर चालकों का आम व्यकित को बेरहमी से कुचलते हुए जाना। हम रोज सुबह की शुरूआत अखबार […] Read more » crime in M.P मध्यप्रदेश में अपराध