चिंतन पीढ़ियाँ करती हैं जयगान सृजन के इतिहास का August 31, 2012 / August 31, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ . दीपक आचार्य रचनात्मक प्रवृत्तियाँ और सृजन धर्म हमेशा सर्वोपरि महत्त्व रखता है और यही वह कारण है जो समाज और परिवेश को युगों और सदियों तक जीवन्त बनाये रखते हुए यादगार रहता है। बात चाहे बुनियादी जरूरतों की सहज उपलब्धता की हो या सुख-सुविधाओं और स्वाभिमानी जीवन निर्वाह के लिए जरूरी संसाधनों की। […] Read more »
धर्म-अध्यात्म कहाँ गया देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र? August 30, 2012 by हिमकर श्याम | 2 Comments on कहाँ गया देश का धर्मनिरपेक्ष चरित्र? हिमकर श्याम देश की एकता और अखंडता के सामने आज जितनी बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है, उतनी इसके पहले कभी नहीं थी। सत्ता की राजनीति ने एकता के सूत्रों को न सिर्फ कमजोर किया है बल्कि उसे अपने फायदे के लिए तहस-नहस भी किया है। सहिष्णुता का झीना आवरण उतरता और धर्मनिरेपक्ष भारत का […] Read more » धर्मनिरपेक्षता
धर्म-अध्यात्म साहित्य द्रोपदी के पांच पति थे या एक: क्या कहती है महाभारत? August 30, 2012 / August 30, 2012 by राकेश कुमार आर्य | 12 Comments on द्रोपदी के पांच पति थे या एक: क्या कहती है महाभारत? -राकेश कुमार आर्य द्रोपदी महाभारत की एक आदर्श पात्र है। लेकिन द्रोपदी जैसी विदुषी नारी के साथ हमने बहुत अन्याय किया है। सुनी सुनाई बातों के आधार पर हमने उस पर कई ऐसे लांछन लगाये हैं जिससे वह अत्यंत पथभ्रष्ट और धर्म भ्रष्ट नारी सिद्घ होती है। एक ओर धर्मराज युधिष्ठर जैसा परमज्ञानी उसका पति […] Read more » द्रोपदी के पांच पति थे
चिंतन न करें उत्सवी परम्पराओं की हत्या August 29, 2012 / August 29, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य न करें उत्सवी परम्पराओं की हत्या सामाजिक सांस्कृतिक हों या परिवेशीय भारतीय संस्कृति की तमाम परंपराएं वैज्ञानिकता की कसौटी पर इतनी खरी और ऋषि-मुनियों द्वारा परखी हुई हैं कि जब तक उनका अवलम्बन होता रहेगा, तब तक मानवी सृष्टि को किसी भी बाहरी आपदाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। बात धार्मिक, आध्यात्मिक, […] Read more »
चिंतन पराभव के दिनों का आगमन August 25, 2012 / August 27, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य सज्जनों से दूरी का मतलब है पराभव के दिनों का आगमन हमारा जीवन सिर्फ अपनी आत्मा और शरीर से ही संबंध नहीं रखता है बल्कि हमारे आस-पास रहने वाले लोग और परिवेशीय हलचलें भी हमारे जीवन से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं में निर्णायक साबित होती हैं और इन्हीं के आधार पर हमारे […] Read more »
धर्म-अध्यात्म महत्वपूर्ण लेख हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत August 22, 2012 / August 24, 2012 by प्रवक्ता.कॉम ब्यूरो | 7 Comments on हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत क्या आप हमारी इस साझी विरासत के बारे में जानते हैं जिसमें हिन्दू धर्म व इस्लाम में सांस्कृतिक समावेश और मेलजोल के कुछ अनोखे उदाहरण मिलते हैं जैसे: 1. अवध के नवाब तेरह दिनों तक होली मनाते थे। नवाब वाजिद अली शाह के दरबार में कृष्ण रासलीला खेली जाती थी। भगवान हनुमान के सम्मान के […] Read more » हिंदू-मुस्लिम साझी विरासत
धर्म-अध्यात्म फकीर राजाओं का भी राजा हो जाता है August 19, 2012 / August 18, 2012 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे एक रात्रि को आकाश में घनघोर बादल छाये हुए थे, रूक रूक कर बिजली कडक रही थी । एक वृद्ध खिडकी के पास खडे हो कर अपने विगत जीवन के बारे में विचार रहे थे कि बाल्यावस्था ,स्कूल मित्रों के साथ खेलना कूदना ,वह भोलापन ,बचपन की अल्हडताएं रह रह कर याद आती […] Read more »
जन-जागरण धर्म-अध्यात्म म. प्र. सरकार की तीर्थयात्रा योजना: एक अभिनव प्रयास August 16, 2012 / August 16, 2012 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी हमारे देश में, हमारे पुराणों में और व्यवहारिक धरातल पर हिंदु जीवन शैली में तीर्थ यात्रा का बड़ा भारी महत्व है किन्तु आज के इस महंगाई और आर्थिक संघर्ष के विकट दौर में कई परिवार और उनके बुजुर्ग अपनी आशाओं के अनुरूप धनाभाव के कारण तीर्थ दर्शन नहीं कर पाते है. शिवराज सरकार […] Read more » pilgrimage tours of hindus subsidy to hindus तीर्थयात्रा योजना म. प्र. सरकार की तीर्थयात्रा योजना
चिंतन व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ August 12, 2012 / August 12, 2012 by डॉ. दीपक आचार्य | Leave a Comment डॉ. दीपक आचार्य व्यक्तित्व को ढालना है हमारे हाथ रचनात्मक बनायें या विध्वंसात्मक व्यक्तित्व का निर्माण व्यक्ति के अपने हाथ में होता है। इसे वह चाहे जिस साँचे में ढालने को स्वतंत्र है। वंशानुगत संस्कारों, पारिवारिक माहौल, मित्रों के संसार और परिवेश तथा परिस्थितियों आदि सभी प्रकार के कारकों का व्यक्तित्व पर प्रभाव पड़ता है। […] Read more » रचनात्मक विध्वंसात्मक
धर्म-अध्यात्म कृष्ण जन्माष्टमी को हुई थी विश्व हिंदू परिषद् की स्थापना August 10, 2012 by प्रवीण गुगनानी | Leave a Comment प्रवीण गुगनानी विश्व हिंदू परिषद उस संगठन का नाम है जो संभवतः देश में संगठन कम और परिवार अधिक के रूप में चिर परिचित है; इस देश के बहुसंख्य हिंदुओं ने इस संगठन को जहां परिवार के रूप में देखा व स्वयं को इसकी इकाई के रूप में महसूसा वहीँ इसे संगठन के रूप में […] Read more » विश्व हिंदू परिषद
चिंतन थोड़ा दूसरों के लिये भी सोचें August 4, 2012 / August 4, 2012 by रामस्वरूप रावतसरे | Leave a Comment रामस्वरूप रावतसरे नरेंद्रनाथ ने रामकृष्ण देव से कहा – ठाकुर ! मुझे एकांत में समाधि लगानी है । मुझे ऐसा करने में बहुत आन्नद आता है आप मुझे ऐसा ही करने का आशीर्वाद दें कि मैं ऐसा कर सकूं । ठाकुर श्री रामकृष्ण परमहंस बोले पागल ! कैसी छोटी छोटी बातें करता है तू ! […] Read more »
धर्म-अध्यात्म बच्चों की तस्करी व उत्पीडन के आरोपों में घिरे चर्च व मिशनरी संस्थाएं July 30, 2012 by समन्वय नंद | 2 Comments on बच्चों की तस्करी व उत्पीडन के आरोपों में घिरे चर्च व मिशनरी संस्थाएं समन्वय नंद ओड़िशा के कंधमाल जिले से पढाई कराने की बात कह कर ईसाई पास्टर पांच जनजातीय बच्चों को भुवनेश्वर ले कर आ गये थे । लेकिन वहां उन्हें पढाने के बजाए उनसे नौकरों की तरह काम करवाते थे और उत्पीडन करते थे । ये बच्चे किसी तरह से उस पास्टर के चुंगुल से भाग […] Read more » चर्च ईसाई तस्करी