धर्म-अध्यात्म

“ईश्वर जीवात्मा के कल्याण के लिये उसे शरीर में भेजते हैं तथा समय आने पर उसका शरीर बदल देते हैं : डॉ. वागीश शास्त्री”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 आर्यसमाज धामावाला, देहरादून के 139वे वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन प्रातःकालीन

परमात्मा ने पशु-पक्षियों की भांति मनुष्यों को जीवनयापन का ज्ञान नहीं दिया, इसका कारण पता नहीं चलता : डॉ. वागीश शास्त्री

मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 महर्षि दयानन्द द्वारा सन् 1879 में स्थापित आर्यसमाज-धामावाला, देहरादून का

‘यज्ञ करने से परमात्मा की पूर्ण भक्ति हो जाती हैः डॉ. महेश विद्यालंकार’

-मनमोहन कुमार आर्य गुरुकुल गौतमनगर दिल्ली का वार्षिकोत्सव एवं चतुर्वेद पारायण यज्ञ रविवार दिनांक 16-12-2018

“ईश्वर उपासना से सहनशीलता प्राप्त होती हैः डॉ. सोमदेव शास्त्री”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 हमें दिनांक 15-12-2018 की सायं गुरुकुल पौंधा-देहरादून के आचार्य डॉ.

“यज्ञ-स्वाध्याय-सत्संग आदि के प्रेरक महात्मा दयानन्द वानप्रस्थ”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 महात्मा दयाननन्द जी वानप्रस्थ वैदिक साधन आश्रम तपोवन में दीर्घकाल

“क्या हमारे प्रचारकों का जीवन ऋषि दयानन्द व स्वामी श्रद्धानन्द आदि के समान हैं”

–मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।                 आर्यसमाज का उद्देश्य वेदों के सिद्धान्तों, मान्यताओं व विचारधारा का

“अंग्रेज सरकार की गुरुकुल कांगड़ी पर तिरछी नजर का प्रामाणिक विवरण”

मनमोहन कुमार आर्य,  महर्षि दयानन्द जी के प्रमुख शिष्य स्वामी श्रद्धानन्द, पूर्व नाम महात्मा मुंशीराम