धर्म-अध्यात्म लेख सात्विक धन एवं पुण्य कर्म ही लोक-परलोक में जीवात्मा के सहायक August 2, 2021 / August 2, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य को अपना जीवन जीनें के लिए धन की आवश्यकता होती है। भूमिधर किसान तो अपने खेतों में अन्न व गो पालन कर अपना जीवन किसी प्रकार से जी सकते हैं परन्तु अन्य लोग चाहें कितने विद्वान हों, यदि नौकरी या व्यापार न करें तो उनका जीवन व्यतीत करना दुष्कर होता […] Read more » Satvik wealth and virtuous deeds are the helpers of the soul in the afterlife. सात्विक धन एवं पुण्य कर्म
धर्म-अध्यात्म क्या आप तीन अनादि पदार्थों को जानते हैं? July 30, 2021 / July 30, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम संसार में जन्म लेकर आंखों से अपने सम्मुख विचित्र संसार को देखते हैं तो इसकी सुन्दरता एवं विविध पदार्थों को देखकर उन पर मुग्ध हो जाते हैं। यह संसार किससे, कब व कैसे बना? ऐसे प्रश्न बुद्धिमान व कुछ ज्ञान रखने वाले मनुष्य के मन में उपस्थित होते हैं। इसका प्रायः यही […] Read more »
धर्म-अध्यात्म मनुष्य कर्म-बन्धन में फंसा एक चेतन, अनादि व अविनाशी जीवात्मा है July 30, 2021 / July 30, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम परस्पर जब किसी से मिलते हैं तो परिचय रूप में अपना नाम व अपनी शैक्षिक योग्यता सहित अपने कार्य व व्यवसाय आदि के बारे में अपरिचित व्यक्ति को बताते हैं। हमारा यह परिचय होता तो ठीक है परन्तु इसके अलावा भी हम जो हैं वह एक दूसरे को पता नहीं […] Read more » अविनाशी जीवात्मा
धर्म-अध्यात्म विश्व में ईश्वरीय ज्ञान वेद का धारक, रक्षक एवं प्रचारक आर्यसमाज है July 23, 2021 / July 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यप्रश्न क्या परमात्मा है? क्या वह ज्ञान से युक्त सत्ता है? क्या उसने सृष्टि की आदि में मनुष्यों को ज्ञान दिया है? यदि वह ज्ञान देता है तो वह ज्ञान उसने कब किस प्रकार से मुनष्यों को दिया था? इन प्रश्नों पर विचार करने पर उत्तर मिलता है कि परमात्मा का अस्तित्व सत्य […] Read more » Aryasamaj ईश्वरीय ज्ञान वेद का धारक
धर्म-अध्यात्म वेदों ने विद्या प्राप्त मनुष्यों के लिये द्विज शब्द का प्रयोग किया है July 23, 2021 / July 23, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यसंसार में दो प्रकार के लोग हंै जिन्हें हम शिक्षित एवं अशिक्षित तथा चरित्रवान एवं चारीत्रिक दृष्टि से दुर्बल कह सकते हैं। सृष्टि के आरम्भ में वेदोत्पत्ति से पूर्व न तो भाषा थी, न ज्ञान और न ही किसी प्रकार का शब्द भण्डार। यह सब वेदों की देन है। वेदों की रचना वा […] Read more » द्विज शब्द
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लेख जय जगदीश हरे आरति के रचयिता पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी July 16, 2021 / July 16, 2021 by आत्माराम यादव पीव | Leave a Comment आत्माराम यादव पीव भारतवर्ष ही नहीं अपितु देश-दुनिया में कई देशों के सनातन धर्मावलम्बियों, वैष्णवों, साधु-संतों व ईश्वर के प्रति उत्कट प्रेम करने वाले भक्तों के हृदयों को पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा सन 1870 में 32 वर्ष की आयु में रचित आरति ’’ओम जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे, भक्तजनों के संकट क्षण में […] Read more » पण्डित श्रद्धाराम फिल्लौरी
धर्म-अध्यात्म सृष्टि की आदि-ज्ञान-पुस्तक वेद का महत्व और हमारा कर्तव्य July 16, 2021 / July 16, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने अपना जीवन ईश्वर के सत्यस्वरूप की खोज एवं मृत्यु पर विजय पाने के उपायों को जानने के लिये देश के अनेक स्थानों पर जाकर विद्वानों की संगति व दुर्लभ पुस्तकों के अध्ययन में बिताया था। इस प्रयोजन के लिये ही उन्होंने अपने माता–पिता सहित बन्धु–बान्धवों, कुटुम्बियों व जीवन […] Read more » वेद का महत्व और हमारा कर्तव्य
धर्म-अध्यात्म वैदिक मंत्रों में ही निहित होते हैं मंत्र देवता का नाम अर्थात विषय July 14, 2021 by अशोक “प्रवृद्ध” | Leave a Comment -अशोक “प्रवृद्ध”वैदिक मतानुसार जिसे शब्दों में वर्णन किया जा सके, उसे पदार्थ कहा जाता है, और दिव्य गुण युक्त पदार्थ को देवता कहते हैं। वर्णन करने योग्य दिव्य ज्ञान युक्त पदार्थ व्यक्त अथवा अव्यक्त दोनों हो सकते हैं, क्योंकि परमात्मा से लेकर पृथ्वी पर्यंत सभी पदार्थ वर्णनीय हो सकते हैं, और यदि उसमें कोई दिव्य […] Read more » वैदिक मंत्रों में ही निहित होते हैं मंत्र देवता का नाम
धर्म-अध्यात्म सत्याचरण से अमृतमय मोक्ष की प्राप्ति मनुष्य जीवन का लक्ष्य July 14, 2021 / July 14, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहमारी जीवात्माओं को मनुष्य जीवन ईश्वर की देन है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान होने के साथ सर्वज्ञ भी है। उससे दान में मिली मानव जीवन रूपी सर्वोत्तम वस्तु का सदुपयोग कर हम उसकी कृपा व सहाय को प्राप्त कर सकते हैं और इसके विपरीत मानव शरीर का सदुपयोग न करने के कारण हमें […] Read more » The goal of human life is to attain nectar of salvation through truthfulness. सत्याचरण से अमृतमय मोक्ष की प्राप्ति
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की ही तरह पशु-पक्षियों को भी जीनें का अधिकार है July 13, 2021 / July 13, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यपरमात्मा ने संसार में जीवात्माओं के कर्मों के अनुसार अनेक प्राणी-योनियों को बनाया है। हमने अपने पिछले जन्म में आधे से अधिक शुभ व पुण्य कर्म किये थे, इसलिये ईश्वर की व्यवस्था से इस जन्म में हमें मनुष्य जन्म मिला है। जिन जीवात्माओं के हमसे अधिक अच्छे कर्म थे, उन्हें अच्छे माता-पिता व […] Read more »
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज के गौरव, वैदिक धर्मानुरागी एवं ऋषिभक्त स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती July 7, 2021 / July 9, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment स्वामी प्रणवानन्द जी को 75वें जन्मदिवस पर बधाई-मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून।स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती जी (जन्म दिवस 7-7-1947) आर्यजगत् के विख्यात संन्यासी है। आपने अपना पूरा जीवन वैदिक धर्म और आर्यसमाज की सेवा में लगाया है। आप ने आर्ष पाठविधि से गुरुकुल झज्जर तथा गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार में अध्ययन किया है। स्वामी ओमानन्द सरस्वती तथा डा. […] Read more » आर्यसमाज के गौरव वैदिक धर्मानुरागी एवं ऋषिभक्त स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती
धर्म-अध्यात्म ऋषियों का सन्देश कि संसार के सभी प्राणियों में एक समान आत्मा है July 6, 2021 / July 6, 2021 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम मनुष्य हैं। हम वेदों एवं अपने पूर्वज ऋषियों आदि की सहायता से जानते हैं कि संसार में जितनी मनुष्येतर योनियां पशु, पक्षी, कीट-पतंग व जीव-जन्तु आदि हैं, उन सबमें हमारी आत्मा के समान ही एक जैसी जीवात्मा विद्यमान है। यह जीवात्मा शरीर से पृथक एक सत्य, सनातन एवं चेतन सत्ता है। जीवात्मा […] Read more » संसार के सभी प्राणियों में एक समान आत्मा है