मृतकों का श्राद्ध अशास्त्रीय एवं वेद विरुद्ध होने से त्याज्य कर्म

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-मनमोहन कुमार आर्य आश्विन मास का कृष्ण पक्ष मृत पितरों का श्राद्ध कर्म करने के लिए प्रसिद्ध सा हो गया है। इन दिनों पौराणिक नाना प्रकार के नियमों का पालन करते हैं। अनेक पुरुष दाढ़ी नहीं काटते, बाल नहीं कटाते, नये कपड़े नहीं खरीदते व सिलाते, यहां तक की विवाह आदि का कोई भी शुभ… Read more »

आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य

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सबकी शारीरिक सामाजिक आत्मिक उन्नति सहित संसार का उपकार करना आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द जी ने आर्यसमाज की स्थापना सर्वविद्यामय ईश्वरीय ज्ञान वेदों के प्रचार के लिए की थी। ज्ञान से बढ़कर संसार में दूसरा कोई धन या महत्वपूर्ण पदार्थ नहीं है। शरीर व आत्मा की उन्नति के लिए विद्या वा… Read more »

सत्य का मार्ग ही जीवन की सफलता का मार्ग है

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मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है? इसके उत्तर में कह सकते हैं कि सत्य को जानना, समझना, उस पर गहनता से विचार करना, ऋषि दयानन्द सरस्वती आदि महापुरुषों के जीवन चरितों व उपदेशों का अध्ययन करना, ईश्वर, जीवात्मा व प्रकृति का सत्य ज्ञान कराने वाले वेद एवं सत्यार्थाप्रकाशादि ग्रन्थों को प्राप्त करना व उनका अध्ययन… Read more »

वेद ईश्वरीय ज्ञान और सृष्टि के आरम्भ और बाद में उसकी आवश्यकता

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मनमोहन कुमार आर्य ईश्वरीय ज्ञान की चर्चा से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर क्या है वा ईश्वर किसे कहते हैं। ईश्वर एक सत्य-चित्त-आनन्द युक्त सत्ता का नाम है। यह सत्ता निराकार एवं सर्वव्यापक है। यह सर्वज्ञ है एवं इसी ने सत्व, रजस व तम गुणों वाली त्रिगुणात्मक सूक्ष्म प्रकृति से इस संसार की… Read more »

विश्व में सत्य की प्रचारक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था आर्य समाज

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मनमोहन कुमार आर्य    सत्य को मानना व उसका प्रचार करना ही धर्म है और जो असत्य है उसे जानना व उसका त्याग करना व कराना भी धर्म ही है। आजकल हम देखते हैं कि संसार अनेक मत-मतान्तर व पंथों से भरा हुआ है। सबकी परस्पर कुछ समान व कुछ असमान मान्यतायें हैं। सबके अपने… Read more »

गायत्री मन्त्र के जप से मन्द बुद्धि बालक विख्यात विद्वान बना

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मनमोहन कुमार आर्य महात्मा(पूर्व आश्रम का नाम खुशहाल चन्द) का नाम आज भी प्रायः प्रत्येक आर्यसमाज का सक्रिय अनुयायी जानता है। आपके प्रवचन पुस्तक रूप में प्रकाशित मिलते हैं जिन्हें लोग बहुत श्रद्धा से पढ़ते हैं। इन्हें पढ़कर कोई भी व्यक्ति वैदिक मान्यताओं व सिद्धान्तों का जानकार बन सकता है। जो भी पढ़ेगा उसका निश्चित… Read more »

शिव एक विशिष्ट देव

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डा. राधेश्याम द्विवेदी शिव हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से हैं। वे त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव भी कहते हैं। इन्हें महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। तंत्र साधना में इन्हे ‘भैरव’ के नाम से भी जाना जाता है। वेद में इनका नाम… Read more »

आइये जाने इस वर्ष 2017 में  महालय/पितृपक्ष/श्राद्ध पक्ष क्या,क्यों और कैसे मनाये..???

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इस वर्ष पितृपक्ष-5 सितंबर से 20 सितंबर 2017 (पूर्णिमा) से आरम्भ होने जा रहे हैं |   प्रिय मित्रों/पाठकों, श्राद्ध, पूजा, महत्व, श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह, मत्स्य आदि पुराणों एवं महाभारत, मनुस्मृति आदि शास्त्रों में यथास्थान किया गया है। श्राद्ध का अर्थ अपने देवों, परिवार, वंश परंपरा, संस्कृति और… Read more »

मनुष्य का जीवन व चरित्र उज्जवल होना चाहिये

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जीवन व चरित्र उज्जवल होना चाहिये परन्तु आज ऐसा देखने को नहीं मिल रहा है। जो जितना बड़ा होता है वह अधिक संदिग्ध चरित्र व जीवन वाला होता है। धर्म हो या राजनीति, व्यापार व अन्य कारोबार, शिक्षित व अशिक्षित सर्वत्र चरित्र में गड़बड़ होने का सन्देह बना रहता है।… Read more »

शहीद भगत सिंह के दादा सरदार अर्जुन सिंह की आर्यसमाज की विचारधारा को पुष्ट करने के  लिए लिखी पुस्तक ‘हमारे गुरु साहिबान वेद के पैरोकार थे’ और उसकी पृष्ठभूमि

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-मनमोहन कुमार आर्य इतिहास की हर छोटी बड़ी बात सभी ऋषि भक्तों को स्मरण हो, यह सम्भव नहीं है। इसके लिए समय समय पर इस विषय के ग्रन्थों को पढ़ना उपुयक्त रहता है। स्वाध्याय से हमें सबसे बड़ा लाभ यही प्रतीत होता है कि इस प्रवृत्ति से मनुष्य के ज्ञान में निरन्तर वृद्धि होती जाती… Read more »