धर्म-अध्यात्म हम मनुष्य कहलाते हैं परन्तु क्या मनुष्य बनने का प्रयत्न करते हैं? June 8, 2020 / June 8, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य स्वयं को मनुष्य कहता है परन्तु मनुष्य किसे कहते हैं, इस पर वह कभी विचार नहीं करता। हमारे वैदिक विद्वान बताते हैं कि मनुष्य को मनुष्य विचारशील तथा सत्य व असत्य का मनन करने के कारण से कहते हैं। मनुष्य के पास बुद्धि होती है जिससे वह उचित–अनुचित, सत्य–असत्य, कर्तव्य–अकर्तव्य, […] Read more » मनुष्य
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज को सशक्त बनाने वाले डा. सोमदेव शास्त्री के कुछ प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय कार्य May 31, 2020 / May 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य डा. सोमदेव शास्त्री, मुम्बई आर्यसमाज के प्रमुख एवं शीर्ष विद्वानों में हैं। आपने वैदिक आर्ष प्रणाली से विद्याध्ययन किया है। आप एक प्रभावशाली वक्ता हैं। आपका व्यक्तित्व आकर्षक एवं प्रभावशाली है। आपकी व्याख्यान शैली में पाठकों को आकर्षित करने तथा उन्हें विषय से बांधे रखने की क्षमता है। आप देश भर में […] Read more » डा. सोमदेव शास्त्री
धर्म-अध्यात्म ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी एवं सृष्टिकर्ता है May 31, 2020 / May 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यहम इस संसार आये और रह रहे हैं परन्तु हमें यह नहीं पता कि हम कहां से आये, हमें यहां कौन लाया व हमारे यहां लाये जाने का प्रयोजन क्या था? हमारा सामाजिक एवं शैक्षणिक वातावरण भी ऐसा है कि हमें इन प्रश्नों के उत्तर नहीं मिलते। इस कारण हम इन प्रश्नों की […] Read more »
धर्म-अध्यात्म वेदों व वेदानुकूल शिक्षाओं के पालन से जीवन की उन्नति May 31, 2020 / May 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जो भी कर्म करता है उससे उसे लाभ व हानि दोनों में से एक अवश्य होता है। लाभ उन कर्मों से होता है जो उसके वास्तविक कर्तव्य होते हैं। मनुष्य का प्रथम कर्तव्य अपने स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसके लिये समय पर सोना व जागना, प्रातः ब्राह्म मुहुर्त में […] Read more » Advancement of life by following Vedas and Vedana teachings वेदानुकूल शिक्षा
धर्म-अध्यात्म जीवात्मा का जन्म एक बार नहीं अपितु बार-बार होते रहते हैं May 31, 2020 / May 31, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य व सभी प्राणी इस मृत्यु लोक में जन्म लेते हैं। शैशवावस्था से बाल, किशोर, युवा, सम्पूर्ति तथा वृद्धावस्था को प्राप्त होकर वह मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान ने अनेक विषयों पर अनेक गम्भीर प्रश्नों का समाधान किया है। जीवन के सम्बन्ध […] Read more » जीवात्मा का जन्म
धर्म-अध्यात्म स्वाध्याय एवं ईश्वरोपासना जीवन में आवश्यक एवं लाभकारी हैं May 26, 2020 / May 26, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य आत्मा एवं शरीर से संयुक्त होकर बना हुआ एक प्राणी हैं। आत्मा अति सूक्ष्म तत्व व सत्ता है। इसे शरीर से संयुक्त करना सर्वातिसूक्ष्म, सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वव्यापक, सर्वान्तर्यामी, अनादि, नित्य व अविनाशी ईश्वर का काम है। आत्मा स्वयं माता के गर्भ में जाकर जन्म नहीं ले सकती। आत्मा को माता […] Read more » ईश्वरोपासना स्वाध्याय स्वाध्याय एवं ईश्वरोपासना
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म मनोरंजन यज्ञ में मन्त्रों से आहुति क्यों? May 25, 2020 / May 25, 2020 by शिवदेव आर्य | Leave a Comment – शिवदेव आर्य ‘यज्ञ’ शब्द यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु धातु से नङ्प्रत्यय करने से निष्पन्न हुआ है। जिस कर्म में परमेश्वर का पूजन, विद्वानों का सत्कार, संगतिकरण अर्थात् मेल और हवि आदि का दान किया जाता है, उसे यज्ञ कहते हैं। यज्ञ शब्द के कहने से नानाविध अर्थों का ग्रहण किया जाता है किन्तु यहाँ पर […] Read more » Why the chanting of mantras in the yajna यज्ञ में मन्त्रों से आहुति क्यों
धर्म-अध्यात्म धर्म सत्य गुणों के धारण व वेदानुकूल आचरण को कहते हैं May 25, 2020 / May 25, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य की प्रमुख आवश्यकता सद्ज्ञान है जिससे युक्त होकर वह अपना जीवन सुखपूर्वक व्यतीत कर सके और संसार व जीवन विषयक सभी शंकाओं व प्रश्नों के सत्य उत्तर वा समाधान प्राप्त कर सके। यह कार्य कैसे सम्भव हो? यदि सृष्टि के आरम्भ की स्थिति पर विचार करें तो परिस्थितियों के आधार […] Read more » वेदानुकूल आचरण
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने ईश्वर और मातृभूमि के किन ऋणों को चुकाया? May 23, 2020 / May 23, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य महर्षि दयानन्द सृष्टि की आदि में प्रवृत्त वैदिक ऋषि परम्परा वाले एक ऋषि थे। उन्होंने विलुप्त वेदों का अत्यन्त पुरुषार्थपूर्वक ज्ञान अर्जित किया था। ईश्वर की उन पर कृपा हुई थी जिससे वह अपने अपूर्व प्रयत्नों से वेदज्ञान को प्राप्त करने में सफल हुए थे। वेदज्ञान प्राप्त करने पर उन्हें वेद […] Read more » ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म आत्मा की उन्नति के बिना सामाजिक तथा देशोन्नति सम्भव नहीं May 22, 2020 / May 22, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य मननशील प्राणी को कहते हैं। मनन का अर्थ सत्यासत्य का विचार करना होता है। सत्यासत्य के विचार करने की सामथ्र्य मनुष्य को विद्या व ज्ञान की प्राप्ति से होती है। विद्या व ज्ञान प्राप्ति के लिये बाल्यावस्था में किसी आचार्य से किसी पाठशाला, गुरुकुल या विद्यालय में अध्ययन करना होता […] Read more » आत्मा की उन्नति
धर्म-अध्यात्म संसार का ईश्वर के एक सत्यस्वरूप पर सहमत न होना कल्याणकारी नहीं May 22, 2020 / May 22, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह संसार एक अपौरुषेय सत्ता द्वारा बनाया गया है। वही सत्ता इस संसार को बनाती है व चलाती भी है। संसार को बनाकर उसने ही अपनी योजना के अनुसार अनादि, अविनाशी, नित्य व जन्म–मरण धर्मा जीवात्माओं को इस संसार में भिन्न–भिन्न प्राणी योनियों में जन्म दिया है। जीवात्माओं का जन्म […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म विश्व की सभी अपौरुषेय रचनायें ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण हैं May 20, 2020 / May 20, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य अधिकांश मनुष्यों को यह नहीं पता कि संसार में ईश्वर है या नहीं? जो ईश्वर को मानते हैं वह भी ईश्वर के पक्ष में कोई ठोस प्रमाण प्रायः नहीं दे पाते। ऋषि दयानन्द ने अपने समय में ईश्वर की उपस्थिति व अस्तित्व के विषय में विचार कर स्वयं ही ईश्वर के […] Read more » ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण