धर्म-अध्यात्म सृष्टि, प्राणी-जगत, भाषा एवं ज्ञान की उत्पत्ति किससे हुई? September 16, 2020 / September 16, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हम संसार में रहते हैं और सृष्टि वा संसार को अपनी आंखों से निहारते हैं। सृष्टि का अस्तित्व प्रत्यक्ष एवं प्रामणिक है। हमारी यह सृष्टि कोई अनुत्पन्न, अनादि व नित्य रचना नहीं है। इसका अतीत में आविर्भाव व उत्पत्ति हुई है। इसके अनेक प्रमाण है। यह सर्वसम्मत सिद्धान्त है कि सृष्टि […] Read more » From whom did creation language and knowledge originate? भाषा एवं ज्ञान की उत्पत्ति
धर्म-अध्यात्म अन्य कार्य करते हुए ईश्वर के उपकारों का चिन्तन आवश्यक है September 14, 2020 / September 14, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्यमनुष्य को जीवन में अनेक कार्य करने होते हैं। उसे अपने निजी, पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों की पूर्ति के लिये समय देना पड़ता है। धनोपार्जन भी एक गृहस्थी मनुष्य का आवश्यक कर्तव्य है। इन सब कार्यों को करते हुए मनुष्य को अवकाश कम ही मिलता है। अतः सभी कामों को समय विभाग के […] Read more » ईश्वर के उपकारों का चिन्तन
धर्म-अध्यात्म वेद एवं वैदिक साहित्य के स्वाध्याय से मनुष्य श्रेष्ठ मनुष्य बनता है September 13, 2020 / September 13, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वेद सृष्टि की आदि में परमात्मा द्वारा अमैथुनी सृष्टि में उत्पन्न चार ऋषियों को दिया गया ईश्वरीय सत्य व निर्दोष ज्ञान है। प्राचीन मान्यता है कि वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है। वेदों में सब मनुष्यों को ‘मनुर्भव’ अर्थात् मनुष्य बनने का सन्देश दिया गया है। इसका अर्थ है कि […] Read more » वेद एवं वैदिक साहित्य
धर्म-अध्यात्म ईश्वर, जीव व प्रकृति न होते तो संसार का अस्तित्व न होता September 12, 2020 / September 12, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार में तीन अनादि सत्तायें हैं। यह सत्तायें नित्य अर्थात् सदा रहने वाली हैं। इनका अभाव कभी नहीं होता। जो पदार्थ अनादि होता है वह अनन्त अर्थात् नाशरहित व अमर भी होता है। इस कारण से इन तीनों पदार्थों का कभी नाश व अभाव नहीं होगा। हमारा आधुनिक विज्ञान वेदों से […] Read more » creatures and nature were not there The world would not exist if God संसार का अस्तित्व
धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द ने विश्व कल्याण की भावना से वेदों का प्रचार किया September 11, 2020 / September 11, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना किसी नवीन मत–मतान्तर के प्रचार अथवा प्राचीन वैदिक धर्म के उद्धार के लिये ही नहीं की थी अपितु उन्होंने वेदों का जो पुनरुद्धार व प्रचार किया उसका उद्देश्य विश्व का कल्याण करना था। यह तथ्य उनके सम्पूर्ण जीवन व कार्यों पर दृष्टि डालने व मूल्याकंन […] Read more » Rishi Dayanand preached the Vedas with the spirit of world welfare. ऋषि दयानन्द वेदों का प्रचार
धर्म-अध्यात्म मनुष्य की पूर्ण आत्मोन्नति वेदज्ञान एवं आचरण से ही सम्भव है September 10, 2020 / September 10, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का शरीर जड़ प्रकृति से बना होता है जिसमें एक सनातन, शाश्वत, अनादि, नित्य चेतन सत्ता जिसे आत्मा के नाम से जाना जाता है, निवास करती है। जीवात्मा को उसके पूर्वजन्मों के कर्मों का भोग कराने के लिये ही परमात्मा उसे जन्म व शरीर प्रदान करते हैं। शुभ व पुण्य […] Read more » वेदज्ञान
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज शुद्ध ज्ञान व कर्मों से युक्त मनुष्य का निर्माण करता है September 7, 2020 / September 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment देश और समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि सभी मनुष्यों की बुद्धि व शरीर के बल का पूर्ण विकास कर उन्हें शुद्ध ज्ञान व शक्ति सम्पन्न मनुष्य बनाया जाये। ऐसे व्यक्ति ही देश व समाज के लिये उत्तम, चरित्रवान, देशभक्त तथा परोपकार की भावना से युक्त होते हैं व देश व समाज के […] Read more »
चिंतन धर्म-अध्यात्म देश एवं मानव निर्माण में गोरक्षा एवं गोसंवर्धन का महत्वपूर्ण स्थान September 7, 2020 / September 7, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने मनुष्य एवं इतर आत्माओं के लिये इस सृष्टि को उत्पन्न कर धारण किया है। परमात्मा में ही यह सारा ब्रह्माण्ड विद्यमान है। आश्चर्य होता है कि असंख्य व अनन्त लोक–लोकान्तर परमात्मा के निमयों का पालन करते हुए सृष्टि उत्पत्ति काल 1.96 अरब वर्षों से अपने अपने पथ पर चल […] Read more » Important place of cow protection Important place of cow protection and cow culture Important place of cow protection and cow culture in country and man-making गोरक्षा एवं गोसंवर्धन
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज ईश्वरीय ज्ञान वेद का प्रचारक संसार का अनोखा संगठन है September 5, 2020 / September 5, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य संसार में अनेक संगठन है जिनके अपने-अपने उद्देश्य व लक्ष्य हैं तथा जिसे पूरा करने के लिये वह कार्य व प्रचार करते हैं। सभी संगठन या तो धार्मिक होते हैं या सामाजिक। इनसे इतर भी अनेक विषयों को लेकर अनेक संगठन बनाये जाते हैं। देश की रक्षा करने के लिये भी […] Read more » आर्यसमाज
धर्म-अध्यात्म मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श, प्रेरक एवं अनुकरणीय जीवन September 2, 2020 / September 2, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य वैदिक धर्म एवं संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन आदर्श, अनुकरणीय एवं प्रेरक उदाहरणों से युक्त जीवन है। वह आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा, आदर्श शत्रु, आदर्श मित्र, ईश्वर, वेद एवं ऋषि परम्पराओं को समर्पित, उच्च आदर्शों एवं चरित्र से युक्त महापुरुष व महामानव थे। त्रेता युग […] Read more » inspirational and exemplary life of Maryada Purushottam Ram मर्यादा पुरुषोत्तम राम मर्यादा पुरुषोत्तम राम का आदर्श
धर्म-अध्यात्म सत्य सिद्धान्तों के प्रचार से ही देश व समाज का कल्याण होगा September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य संसार के सभी मनुष्य एक समान हैं। जन्म से सब एक समान व अज्ञानी उत्पन्न होते हैं। जीवन में ज्ञान की मात्रा व आचरण से ही उनके व्यक्तित्व व जीवन का निर्माण होता है। ज्ञान का आदि स्रोत चार वेद ही हैं। वेद न होते तो ज्ञान भी न होता। वेदों […] Read more » Promotion of true principles will only lead to welfare of the country and society
धर्म-अध्यात्म परमात्मा सब जीवात्माओं के जन्मदाता व माता-पिता होने से उपासनीय हैं September 1, 2020 / September 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा और आत्मा का सम्बन्ध व्याप्य-व्यापक, उपास्य-उपासक, स्वामी-सेवक, मित्र बन्धु व सखा आदि का है। परमात्मा और आत्मा दोनों इस जगत की अनादि चेतन सत्तायें हैं। ईश्वर के अनेक कार्यों में जीवों के पाप-पुण्यों का साक्षी होना तथा उन्हें उनके कर्मानुसार सुख व दुःख रूपी भोग प्रदान करना है। हमारा जो […] Read more » God is worshiped by being the creator and parent of all beings. परमात्मा