धर्म-अध्यात्म ऋषि दयानन्द और आर्यसमाज ने वैदिक धर्म का पुनरुद्धार और देशोत्थान का कार्य किया April 1, 2020 / April 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द (1825-1883) के समय में सृष्टि के आदिकाल से आविर्भूत ज्ञान व विज्ञान पर आधारित सत्य सनातन वैदिक धर्म विलुप्त हो चुका था। इसके स्थान पर देश में वैदिक धर्म का स्थान अविद्या, अन्धविश्वास, पाखण्ड, सामाजिक असमानता, पक्षपात व अन्यायपूर्ण व्यवहार तथा परम्पराओं से युक्त मत–मतान्तरों ने ले लिया था। […] Read more » ऋषि दयानन्द
धर्म-अध्यात्म कोरोना महामारी पर विजय सहित वेद व धर्म की रक्षा पर विचार April 1, 2020 / April 1, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य, हमारा देश ही नहीं अपितु विश्व के अधिकांश देश इस समय कोरोना वायरस के संक्रमण के संकट से जूझ रहे हैं। हमारे देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सुयोग्य हाथों में है। देश सुरक्षित है और कोरोना के संक्रमण से हमें कम हानि हो रही है। यह केवल […] Read more » corona corona pandemic including the victory over the Corona epidemic. Thoughts on the defense of the Vedas and religion कोरोना महामारी
धर्म-अध्यात्म लेख समाज श्रीराम हैं न्यायप्रिय शासन व्यवस्था के महासूर्य April 1, 2020 / April 1, 2020 by ललित गर्ग | Leave a Comment रामनवमी- 2 अप्रैल, 2020 पर विशेष-ः ललित गर्ग:-रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को उत्सवपूर्ण ढं़ग से मनाया जाता है। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन मर्यादा-पुरूषोत्तम भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। हिन्दु धर्मशास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की स्थापना के […] Read more » lord rama Ram navami Shriram is the champion of justice-loving governance रामनवमी- 2 अप्रैल श्रीराम
धर्म-अध्यात्म अनुकरणीय पाथेय है श्रीराम का जीवन April 1, 2020 / April 1, 2020 by डॉ. वंदना सेन | 2 Comments on अनुकरणीय पाथेय है श्रीराम का जीवन रामनवमी पर विशेष- डॉ. वंदना सेन भारतीय सांस्कृतिक दर्शन की धारा को प्रवाहित करने वाले भारतीय साहित्य में वसुधैव कुटुम्बकम का भाव सदैव समाहित रहा है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण और संत तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस ने सामाजिक समरसता के भाव का प्रवाहन बहुत ही गहनता से किया है। उदारता के भाव से अनुप्राणित […] Read more » श्रीराम का जीवन
धर्म-अध्यात्म ईश्वर सुयोग्य व पात्र भक्त व उपासकों की प्रार्थना स्वीकार करता है” March 28, 2020 / March 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य अपने पूर्वजन्म के कर्मों वा प्रारब्ध के अनुसार इस सृष्टि में जन्म लेता है। उसने जो कर्म किये होते हैं उनका सुख व दुःख रुपी फल उसे अवश्य ही भोगना होता है। जाने व अनजानें में मनुष्य जो कर्म करता है उसका कर्म के अनुसार परमात्मा की व्यवस्था से फल […] Read more » ईश्वर
धर्म-अध्यात्म सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा वेदज्ञान न देता तो अद्यावधि सभी मनुष्य अज्ञानी व असभ्य होते March 28, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य वर्तमान संसार अनेक भाषाओं एवं ज्ञान-विज्ञान से युक्त है। इन सब भाषाओं एवं ज्ञान-विज्ञान का विकास कैसे व कब हुआ, इस प्रश्न का उठना स्वाभाविक है। इन प्रश्नों का समाधान खोजने का सबको प्रयत्न करना चाहिये। हम जानते हैं कि संसार कि सबसे पुरानी सभ्यता वैदिक सभ्यता है। इस सभ्यता का […] Read more » वेदज्ञान
धर्म-अध्यात्म संसार को बनाने व पालन करने वाली सत्ता ईश्वर ही सबकी उपासनीय है March 20, 2020 / March 20, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य संसार में माता–पिता से एक शिशु के रूप में जन्म लेता है। वह पहली बार जब आंखे खोलता है तो शायद अपनी माता को अपनी आंखों के सम्मुख देखता है। माता के बाद वह अपने परिवार के अन्य सदस्यों यथा पिता व भाई–बहिनों सहित दादा व दादी आदि को देखता […] Read more » The power to create and follow the world is worshiped by God ईश्वर
धर्म-अध्यात्म आर्यसमाज विश्व की प्रथम संस्था है जो संगठित वेदप्रचार से विश्व में शान्ति स्थापित होना स्वीकार करती है March 18, 2020 / March 18, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज वेदों के मर्मज्ञ विद्वान ऋषि दयानन्द सरस्वती द्वारा दिनांक 10 अप्रैल, 1875 को मुम्बई में स्थापित वह संस्था है जो आज प्रायः पूरे विश्व में जानी पहचानी होने सहित सक्रियरूप से कार्यरत है। आर्यसमाज की स्थापना से पूर्व ऋषि दयानन्द (1825-1883) ने देश के अनेक भागों में जाकर वेद की […] Read more » वेदप्रचार
धर्म-अध्यात्म मनुष्य का कर्तव्य मननपूर्वक सत्य मार्ग का अनुसरण करना है March 18, 2020 / March 18, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। मनुष्य को मनुष्य इस लिये कहा जाता है कि वह अपने सभी काम मनन करके करता है। जो मनुष्य बिना मनन के कोई काम करता है तो उसे मूर्ख कहा जाता है। मनन करने के लिये यह आवश्यक होता है कि हम भाषा सीखें एवं ज्ञान अर्जित करें। भाषा से […] Read more » र्वक सत्य मार्ग का अनुसरण
धर्म-अध्यात्म संसार का स्वामी दुष्कर्म करने वाले सभी पापियों को यथोचित दण्ड देता है March 14, 2020 / March 14, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य हमारा यह ब्रह्माण्ड स्वयं नहीं बना। संसार की कोई भी उपयोगी वस्तु स्वतः नहीं बनती अपितु इन्हें कुछ ज्ञान-विज्ञान से पूर्ण मनुष्यों द्वारा उत्पन्न किया जाता है। किसी भी वस्तु की रचना के तीन प्रमुख कारण होते हैं। प्रथम कारण चेतन निमित्त कर्ता हुआ करता है। दूसरा प्रमुख कारण उपादान कारण […] Read more » The lord of the world punishes all sinners who commit misdeeds यथोचित दण्ड
धर्म-अध्यात्म मनुष्य का कर्तव्य धर्म पालन सहित सरकार के अच्छे कार्यों का समर्थन है March 13, 2020 / March 13, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment -मनमोहन कुमार आर्य परमात्मा ने हमारे पूर्वजन्म के कर्मों के आधार पर हमें इस जन्म में मनुष्य बनाया है। हम सब अपनी अपनी आयु के कुछ सोपान पार चुके है। जीवन का जो समय बीत गया वह वापिस नहीं आ सकता परन्तु जो वर्तमान व भविष्य का समय है उस पर विचार व चिन्तन […] Read more » धर्म पालन
धर्म-अध्यात्म मत-मतान्तरों की सत्यासत्य मान्यताओं का बिना परीक्षा किये आचरण करना उचित नहीं March 12, 2020 / March 12, 2020 by मनमोहन आर्य | Leave a Comment –मनमोहन कुमार आर्य सृष्टि में मनुष्य जाति का आरम्भ वर्तमान समय से 1.96 अरब वर्ष पूर्व ईश्वर द्वारा सृष्टि रचना पूर्ण कर अमैथुनी सृष्टि में मनुष्य आदि सभी प्राणियों को उत्पन्न करने पर हुआ। सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने चार ऋषियों अग्नि, वायु, आदित्य एवं अंगिरा आदि को एक एक वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, […] Read more » आचरण