ऋषि दयानन्द ने संसार को ईश्वर के सच्चे स्वरूप और उसकी उपासना से परिचित कराया

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  मनमोहन कुमार आर्य हम मनुष्य हैं और हमारा यह मनुष्य जन्म ईश्वर के नियमों के अनुसार प्रारब्ध के कर्मों के भोग व नये कर्मों को करके विवेक प्राप्ति व जीवन उन्नति के लिए हुआ है। मनुष्य का आत्मा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, ज्ञानादि गुणयुक्त, अल्पज्ञ और नित्य है। आत्मा अनादि, नित्य, अजर, अमर, एकदेशी,… Read more »

आज का मनुष्य अपने जन्मदाता और स्वयं के ज्ञान से अनभिज्ञ

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-मनमोहन कुमार आर्य क्या हम अपने आप और अपने जन्मदाता को जानते हैं। हमें लगता है कि संसार के 99 प्रतिशत लोग न तो अपने आप को जानते हैं न अपने जन्म दाता को ही जानते हैं। इस न जानने का मुख्य कारण अविद्या है। विद्या उसे कहते हैं कि जिससे पदार्थों का यथार्थ ज्ञान… Read more »

मेरा धर्मग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश

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  मनुष्य जब जन्म लेता है तो उसे किसी भाषा का ज्ञान नहीं होता है, अन्य विषयों के ज्ञान होने का तो प्रश्न ही नही होता। सबसे पहले वह अपनी माता से उसकी भाषा, मातृभाषा, को सीखता है जिसे आरम्भिक जीवन के दो से पांच वर्ष तो नयूनतम लग ही जाते हैं। इसके बाद वह भाषा ज्ञान को व्याकरण की सहायता से जानकर उस पर धीरे धीरे अधिकार करना आरम्भ करता है। भाषा सीख लेने पर वह व्यक्ति उस भाषा की किसी भी पुस्तक को जानकर उसका अध्ययन कर सकता है। संसार में मिथ्या ज्ञान व सद्ज्ञान दोनों प्रकार के ग्रन्थ विद्यमान हैं। मिथ्या ज्ञान की पुस्तकें, भले ही वह धार्मिक हां या अन्य, उसे असत्य व जीवन के लक्ष्य से दूर कर अशुभ कर्म वा पाप की ओर ले जाती हैं।

इंसानियत का पैगाम देता एक निराला संत : आचार्य श्रीमद् नित्यानन्द सूरीजी

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आचार्य नित्यानंद सूरीश्वरजी ने वर्ष 2013 का चातुर्मास जम्मू में किया। जम्मू कश्मीर की असामन्य स्थितियों एवं हिंसा की परिस्थितियों में इस चातुर्मास के द्वारा शांति, अहिंसा एवं साम्प्रदायिक सौहार्द का अपूर्व वातावरण निर्मित हुआ। इसी चातुर्मास के दौरान अमरनाथ यात्रा को लेकर संकट की स्थितियां खड़ी हुई एवं यात्रा को बाधित होना पड़ा। इन स्थितियों में आचार्यजी के प्रयासों से यात्रा भी प्रारंभ हुई एवं शांति का वातावरण भी निर्मित हुआ। जम्मू कश्मीर सरकार ने उनके इस उल्लेखनीय भूमिका के लिए उन्हें समारोहपूर्वक प्रांतीय सरकार का महात्मा गांधी शांति पुरस्कार प्रदत्त किया गया।

 आत्म-विशुद्धि एवं कृत-कर्माें की समीक्षा का पर्व

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वर्तमान रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को दशावतारों के रूप में पूजा जाता है, उनमें विष्णु, वराह, कूर्म, नृसिंह, परशुराम, श्रीराम, श्रीकृष्ण, वामन, बुद्ध, कल्की हैं। जगन्नाथ मंदिर की पूजा, आचार-व्यवहार, रीति-नीति और व्यवस्थाओं नेे शैव, वैष्णव, बौद्ध, जैन धर्मावलम्बियों को भी प्रभावित किया है। रथ का रूप श्रद्धा के रस से परिपूर्ण होता है। वह चलते समय शब्द करता है। उसमें धूप और अगरबत्ती की सुगंध होती है।

ऋषि दयानन्द जीवन के प्रमुख महान कार्य

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ऋषि दयानन्द का पहला प्रमुख कार्य तो उनका गुरु विरजानन्द जी से आर्ष शिक्षा को प्राप्त करना था जिससे वह वेदों के यथार्थ स्वरूप सहित वेद मन्त्रों के यथार्थ अर्थ जान सके। यदि यह न हुआ होता तो फिर ऋषि दयानन्द, दयानन्द व स्वामी दयानन्द ही रहते जैसे कि आज अनेकानेक साधु संन्यासी व विद्वान हैं। कोई उनको जानता भी न। गुरु विरजानन्द जी की शिक्षा ने उन्हें संसार के सभी विद्वानों से अलग किया जिसका कारण उनकी प्रत्येक मान्यता का आधार वेद सहित सत्य व तर्क पर आधारित होने के साथ उनका सृष्टि क्रम के अनुकूल होना भी है।

पुनर्जन्म का ज्ञानपूर्ण व बुद्धिसंगत कारण व आधार

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  मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य जन्म का आधार प्रत्यक्ष रूप में माता-पिता होते हैं परन्तु अप्रत्यक्ष रूप में इस सृष्टि में व्यापक एक चेतन सत्ता जो सृष्टि की उत्पत्ति की सामर्थ्य सहित मनुष्य व अन्य प्राणियों की उत्पत्ति व रचना का ज्ञान रखती है, वह दोनों हैं। हमने माता-पिता से इतर सृष्टि में व्यापक एक… Read more »

जानें, किस दिन कर्ज लेना या देना होता है हानिकारक एवं लाभकारी—

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वैसे तो कभी न कभी कर्ज की जरूरत हर मध्यम वर्ग को पड़ती है।धन ऐसी मूलभूत अवश्यकता है, जिसके अभाव में जीवनयापन करना असंभव है। अवश्यकता पड़ने पर किसी से उधार लेना या किसी की जरूरत के समय उसे उधार देना आम बात है| पिछले दिनों ब्याज पर पैसा लेने वाले कई व्यापारियों ने सूदखोरों… Read more »

जानिए वास्तु अनुसार आदर्श घर कैसा होना चाहिए?

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 वास्तु कुछ नियमों का पालन का विकास करने,इमारतों और हमारे आसपास के प्राकृतिक सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए एक बहुत पुरानी प्रथा है। भारतीय सभ्यता की यह सदियों पुरानी प्रथा अद्भुत परिणाम देती है और इसके चिकित्सकों का जीवन सफल, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाती है |बढ़ती हुई आबादी और जगह की कमी की… Read more »

जानिए सरसो के तेल के कुछ प्रभावी और लाभकारी टोटके/उपाय….

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-किसी भी शनिवार के दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख कर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं , उसमें सरसों के कुछ दाने, 2 लौंग और एक कपूर का टुकड़ा डाल कर 3 बार बजरंग बाण का पाठ करें और हनुमान जी से प्रार्थना करें की अमुक व्यक्ति आपका सारा धन जल्दी से जल्दी वापस कर दे। अब इसी जलते हुए दीपक से एक चम्मच पर एक दो बूँद तेल चुपड़ कर काजल बना लें।