आर्थिकी

वस्तु एवं सेवा कर : समस्या या समाधान

1 जुलाई से लागू होने जा रहा है एक समान कर वाला जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विसिस टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो टैक्स के बड़े जाल से मुक्ति दिलाएगा। जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएगी जबकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी। लेकिन सबसे बड़ा फायदा होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा। 18 से ज्यादा टैक्सों से मिलेगी मुक्ति और पूरे देश में होगा सिर्फ एक टैक्स जीएसटी।

राष्ट्रीय विकास में युवाओं की भूमिका सुनिश्चित करता भारत का युवा कौशल विकास मिशन

आजकल देश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों तथा सभी व्यावसायिक व तकनीकी स्कूलों और पोलिटेक्निक व अन्य व्यावसायिक कॉलेजों में युवा कौशल विकास के लिए अध्ययन प्रवर्तन उद्यमों से लेकर अनेक औपचारिक एवम् अनौपचारिक प्रशिक्षणों द्वारा स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए ई-लर्निंग और वेब-आधारित तथा दूरस्थ अध्ययन आधारित कौशल विकास प्रशिक्षणों की सुविधाएं दी जा रही हैं।

जीएसटी-मोदी सरकार के तीन वर्षो की बड़ी कामयाबी

बात जीएसटी की आवश्यकता क्यों पड़ी ? इसकी की जाये तो विभिन्न राज्यों के बीच जिस तरह टैक्स में असंतुलन आ गया था, उससे निपटने के लिए जीएसटी आवश्यक हो गया था। इसके लागू होने से उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनोरंजन कर, प्रवेश शुल्क, लग्जरी टैक्स जैसे तमाम टैक्स समाप्त हो जाएंगे। इस समय देश में केंद्र और राज्यों के आठ से दस अप्रत्यक्ष कर सेस है, जीएसटी लागू होने के बाद ये खत्म हो जाएंगे और इसका मतलब है कि दोहरे कराधान से सबको निताज मिल जायेगी। इ

तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

बहरहाल, हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है? जो लोग गांधीजी के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा पर संदेह कर रहे हैं, उन्हें ध्यान करना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे अधिक प्रचारित ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को महात्मा गांधी को ही समर्पित किया है। इस अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए गांधीजी के चित्र और उसके प्रतीकों का ही उपयोग किया जाता है।