आर्थिकी

प्रधानमंत्री से रक्षा बजट पर देश को उम्‍मीदें

हाल ही में आई शोध फर्म आइएचएस मार्किट की जेन्स डिफेंस बजट्स रिपोर्ट 2016 बताती है कि रक्षा पर खर्च करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों में अमेरिका, चीन और ब्रिटेन के बाद भारत का चौथा स्थान है। इस साल भारत का रक्षा बजट 50.7 अरब डॉलर (करीब 3.41 लाख करोड़ रुपये) है। जबकि पिछले साल यह 46.6 अरब डॉलर था। इस रिपोर्ट के आंकड़े देखकर एक बात की संतुष्‍ट‍ि तो है कि केंद्र में सत्‍ता परिवर्तन का लाभ सामरिक मामले में भी हुआ है

‘मेरा भारत महान’, जहाँका ‘जनजन बेईमान’

इस देश के रग-रग में भ्रष्टता है, चाहे वो नोट बंदी में चीखे या न चीखे। मुझे बस एक ही ईमानदार दिखाई दे रहा है। इस कुरुक्षेत्र में वो प्रधान सेवक है, वो बर्बरीक है, जिसने अपने ही हाथों अपनी गर्दन काटकर (भ्रष्टाचार मुक्त करने का संकल्प लेकर) खूब तमाशा देख व दिखा रहा है। उस बर्बरीक ने सबको नंगा करके रख दिया है । अपनों को,गैरों को, मुझको, आपको और सबको।हम यदि उसको सहयोग ना कर सके तो कमसे कम हो-हल्ला करने वालों को रोकने-टोकने वा जनता में उसके सही मैसेज को पहुंचाने का काम तो कर ही सकते हैं।

बीता साल नोटबन्दी का हाहाकार : क्राइम ग्राफ नीचे

#नोटबंदी के बाद काली कमाई को ठिकाने लगाने के कई दिलचस्प किस्से सामने आए. कहीं जुगाड़ से काले धन को बैंक में जमा करा लिया तो कहीं पर पैसों को दान-दक्षिणा में बांट दिया…लेकिन, जब इतने से भी मामला सेट नहीं हुआ तो धन कुबेरों को पानी में बहाना पड़ा काली कमाई का खजाना.

नीचे के भ्रष्टाचार पर भी कार्यवाही हो

भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक प्रकार से आयुर्वेद जैसी उपचार पद्धति अपनाई है। आयुर्वेद उपचार की विशेषता है कि धीरे धीरे ही सही समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी। किसी भी प्रकार की समस्या को इस पद्धति से समाप्त करने के लिए धीरज रखने की आवश्यकता है। देश की जनता जितना धीरज से काम लेगी, उतना ही अ‘छा होगा। इससे देश को तो बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला ही है, लेकिन आम जनता भी आने वाले समय में प्रसन्नता का अनुभव करेगी।

एसोचैम की बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत

बड़े नोटों को बंद करने का निर्णय जिस तरह से सामने आया, उसके बाद देशभर से मिली-जुली प्रक्रिया अब तक आ ही रही है। विपक्ष जहाँ इसके लिए सरकार पर कई आरोप लगा रहा है, यहाँ तक कि देश की जीडीपी ग्रोथ गिरने तक की बात करने के साथ इससे जोडक़र अन्ये मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रहा है तो वहीं केंद्र सरकार से लेकर कई ऐसे संगठन भी हैं जो इस निर्णय के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

#नोटबंदी की समीक्षा

नोटबंदी भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. प्रधानमंत्री ने अपनी ‘मन की बात’ में भी अपनी इस इच्छा को जताया है. नोटबंदी के समर्थकों और आलोचकों दोनों के मन में यह सवाल है कि क्या भारत कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए तैयार है? एक बहुत बड़ी आबादी इस देश में रहती है जिसके लिए ग्रामीण, अशिक्षित और बैंक अकाउंट्स व स्मार्टफोन के बगैर इस नई व्यवस्था से जूझना काफी मुश्किल है.

#नोटबंदी के एक माह बाद देश के हालात

500 व एक हजार का #नोटबंद होने के बाद एक महीना बीत चुका है। पीएम मोदी ने देशवासियों के सहयोग से #कालेधन और #भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की ऐतिहासिक शुरूआत कर दी है। पीएम मोदी जनसभाओं व कार्यक्रमों में #नोटबंदी को अब तक का सबसे ऐतिहासक कदम बता रहे हैं और विपक्ष नोटबंदी को लेकर लगातार आक्रामक बना हुआ है।

#नोटबंदी से भ्रष्टाचार मुक्त डिजिटल भारत की ओर

आठ नवम्बर 2016 के आठ बजे की वह घडी भारतीय अर्थ व्यवस्था के शुद्धिकरण के लिए एक ऐतिहासिक पल के रूप में जानी जाएगी। 500 व 1000 रूपए के नोटों को चलन से बंद करने की अचानक घोषणा ने समस्त देश वासियों को हिला कर रख दिया. गत एक माह के अनुभव ने एक बात तो सिखा दि कि हम समस्त भरत वंशियों को अब नकदी के मोह से उबर कर ‘नकदी रहित व्यवहार(कैश लैस ट्रान्जेक्शन)’ का अभ्यास तुरंत प्रभाव से करना पडेगा, जो दुनियाभर के विकसित तथा विकासशील देश पहले से ही सफ़लता पूर्वक कर रहे हैं।

वस्तु एंव सेवा कर : एक लाभकारी कदम

एक बहुचर्चित विधेयक है जिसमें 01 अप्रैल 2017 से पूरे देश में एकसमान मूल्य वर्धित कर लगाने का प्रस्ताव है। इस कर को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कहा गया है। यह एक अप्रत्यक्ष कर होगा जो पूरे देश में निर्मित उत्पादों और सेवाओं के विक्रय एवं उपभोग पर लागू होगा। 03 अगस्त 2016 को राज्यसभा में यह बिल पारित हो गया।