आर्थिकी बजट २०११-१२ : विसंगतियों का पिटारा….. March 1, 2011 / December 15, 2011 by श्रीराम तिवारी | 2 Comments on बजट २०११-१२ : विसंगतियों का पिटारा….. वर्तमान बजट पर देश के अर्थशास्त्रियों के सिरमौर कहे जाने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री जब वित्तमंत्री जी को शाबासी देते हैं तो मेरे जैसे अज्ञानी की अनचाहे ही बजट के बारे में उत्सुकता होना स्वाभाविक ही है ,जब उत्सुकता है तो विषयांतरगत आद्द्योपंत बजट पर माथा-पच्ची भी जरुरी हो जाती है. यह मानवीय स्वभाव की […] Read more » Budget 2011-12 बजट 2011-2012
आर्थिकी त्वरित न्याय की संदेहीत प्रतिबद्धता February 20, 2011 / December 15, 2011 by संजय स्वदेश | Leave a Comment संजय स्वदेश केंद्रीय बजट आने वाला है। मीडिया अपेक्षित बजट पर चर्चा करा रही है। पर इन चर्चाओं में अन्य कई मुद्दों की तरह न्यायापालिका पर खर्च की जाने वाली राशि पर कोई हो-हल्ला नहीं है। एक अकेले न्यायापालिका ही है जिसने कई मौके पर सरकार की जन अनदेखी कदम पर अंकुश लगाने की दिशा […] Read more » Budget बजट
आर्थिकी आधुनिक भारत के मंदिरों की रक्षा कौन करेगा ? February 15, 2011 / December 15, 2011 by श्रीराम तिवारी | 14 Comments on आधुनिक भारत के मंदिरों की रक्षा कौन करेगा ? श्रीराम तिवारी वर्तमान २१ वीं शताब्दी के इस प्रथम दशक की समाप्ति पर वैश्विक परिदृश्य जिन्ह मूल्यों ,अभिलाषाओं और जन-मानस की सामूहिक हित कारिणी आकांक्षाओं – जनक्रांतियों के लिए मचल रहा है ,वे विगत २० वीं शतब्दी के ७०वें दशक में सम्पन्न तत्कालीन शीत युद्धोत्तर काल के जन -आन्दोलनों की पुनरावृति भर हैं .तब सोवियत […] Read more » temple मंदिर
आर्थिकी पूंजीवाद जी का जंजाल… महंगाई-भ्रष्टाचार से दुनिया बदहाल….. February 12, 2011 / December 15, 2011 by श्रीराम तिवारी | 2 Comments on पूंजीवाद जी का जंजाल… महंगाई-भ्रष्टाचार से दुनिया बदहाल….. श्रीराम तिवारी आधुनिकतम उन्नत सूचना एवं प्रौद्द्योगिकी के दौर में विश्व-रंगमंच पर कई क्षणिकाएं-यवनिकाएं बड़ी तेजी से अभिनीत हो रहीं हैं . २१ वीं शताव्दी का प्रथम दशक सावधान कर चुका है कि दुनिया जिस राह पर चल रही है वो धरती और मानव मात्र की जिन्दगी को छोटा करने का उपक्रम मात्र है .जीवन […] Read more » Capitalism पूंजीवाद
आर्थिकी राजनीति माछ भात और मनमोहन सिंह का अर्थशास्त्र February 7, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री | 6 Comments on माछ भात और मनमोहन सिंह का अर्थशास्त्र डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री देश में मंहगाई जिस बेतहाशा गति से बढ रही है उससे आम आदमी का चिंतित होना स्वभाविक ही है। दरासल मंहगाई से आम आदमी केवल चिंतित ही नही है बल्कि अनेक स्थानों पर जीवन यात्रा के सूत्र उनके हाथांे से छूटते भी जा रहे हैं। जो वर्ग उत्पादन के क्षेत्र में […] Read more » Manmohan Singh डॉ. मनमोहन सिंह
आर्थिकी राजनीति वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट का विकल्प सत्ता परिवर्तन नहीं -अपितु नीति परिवर्तन ही सही विकल्प है February 5, 2011 / January 12, 2012 by श्रीराम तिवारी | 3 Comments on वर्तमान वैश्विक आर्थिक संकट का विकल्प सत्ता परिवर्तन नहीं -अपितु नीति परिवर्तन ही सही विकल्प है श्रीराम तिवारी विगत दिनों महाराष्ट्र के मनमाड कस्बे में एक एस डी एम् को कुछ गुंडों ने जिन्दा जला डाला और खबर है कि इस कुकृत्य में शामिल खलनायक भी उसी आग में झुलस कर बाद में अस्पताल में तड़प- तड़प कर मर गया. यह वाकया सर्वविदित है की पेट्रोल में घासलेट की मिलावट करने […] Read more » capitalization समाजवाद
आर्थिकी पसंदीदा निवेश स्थान के रूप में भारत का उदय January 26, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment आर. पी. सिंह विकासशील देशों में निवेश हेतु संसाधनों की जरूरत सामान्यत: घरेलू उपलब्ध संसाधनों से ज्यादा होती है। भारत में ऐतिहासिक तौर पर सकल घरेलू निवेश (जीडीआई) सकल घरेलू बचत (जीडीएस) की तुलना में कम रहा है। यहां प्रतिवर्ष सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की महज 1.2 से 1.3 फीसदी राशि ही निवेशित हो पाती […] Read more » India भारत
आर्थिकी खेत-खलिहान देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है जूट January 26, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है जूट राजेश मल्होत्रा जूट उद्योग का भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूर्वी क्षेत्र खासकर पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योगों में एक है। स्वर्ण रेशा कहा जाने वाला जूट प्राकृतिक, नवीकरणीय, जैविक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद होने के कारण सुरक्षित पैकेजिंग के सभी मानकों पर खरा उतरता है। ऐसा अनुमान है कि जूट […] Read more » Jute जूट
आर्थिकी विदेशों में भारतीय धन : सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ा January 18, 2011 / December 16, 2011 by लालकृष्ण आडवाणी | 1 Comment on विदेशों में भारतीय धन : सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को लताड़ा लालकृष्ण आडवाणी सभी मूल्यांकनों की कसौटी पर कसे तो मनमोहन सिंह सरकार अपने साढ़े 6 वर्ष के कार्यकाल में सर्वाधिक गंभीर संकट से गुजर रही है। स्पेक्ट्रम घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला और मुंबई के रक्षा मंत्रालय भूमि सम्बन्धी घोटाले एक साथ इस रूप में सामने आए हैं जिससे आम आदमी को यह महसूस होने लगा […] Read more » Black Money काला धन
आर्थिकी राष्ट्रीय विनिर्माण एवं निवेश क्षेत्र-रोजगार सृजन और भारत को विनिर्माण हब बनाना January 18, 2011 / December 16, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment समीर पुष्प भारत इस समय विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उसका लक्ष्य प्रति वर्ष स्थायी रूप से 9-10 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर हासिल करना है। अंत: यह आवश्यक है कि विनिर्माण क्षेत्र लंबे अरसे तक 13 से 14 प्रतिशत की दर से विकास करे। परंतु […] Read more » National राष्ट्रीय
आर्थिकी आंकड़ों में उलझी हुई गरीबी December 20, 2010 / December 18, 2011 by सतीश सिंह | 1 Comment on आंकड़ों में उलझी हुई गरीबी सतीश सिंह हमारे देश में गरीबों की पहचान करने के दो तरीके प्रचलित हैं। पहला तरीका योजना आयोग का है और दूसरा तेंदुलकर समिति का, पर अफसोस की बात यह है कि हम दोनों तरीकों के रास्तों पर चलकर भी गरीबों की वास्तविक संख्या के बारे में पता नहीं लगा पा रहे हैं। इसके बावजूद भी […] Read more » poverty गरीबी
आर्थिकी रक्त मुद्रा की समानांतर अर्थव्यवस्था November 20, 2010 / December 19, 2011 by रामदास सोनी | Leave a Comment –रामदास सोनी धन वैध हो या अवैध, मनुष्य के ईमान को हिलाकर रख देता है। अकूत धन कमाने की लालसा निंरतर बढ़ती जाती है, यह लालसा एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें आदमी प्रवेश तो कर जाता है लेकिन उसका बाहर आ पाना मुश्किल हो जाता है। आज भारत में काले धन की समानांतर व्यवस्था चल […] Read more » economy and black money कालाधन