आर्थिकी क्यों हो रहा है भारतीय रुपए का अवमूल्यन December 8, 2025 / December 8, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment माह जनवरी 2025 में भारतीय रुपए का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य 85.79 रुपया प्रति अमेरिकी डॉलर था। 3 दिसम्बर 2025 को रुपए का बाजार मूल्य लगभग 5 प्रतिशत घटकर 90.19 रुपया प्रति डॉलर हो गया। Read more » Why is the Indian Rupee devaluing भारतीय रुपए का अवमूल्यन
आर्थिकी IMF का क्रॉल लाइक मॉडल: मिथकों से परे भारत की वास्तविक मुद्रा-नीति December 4, 2025 / December 4, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment लेकिन इन सभी प्रश्नों को समझने के लिए पहले यह समझना आवश्यक है कि आईएमएफ विनिमय दरों का वर्गीकरण कैसे करता है और क्रॉल वास्तव में होता क्या है। क्रॉल जैसी व्यवस्था एक ऐसी विनिमय दर प्रणाली है, जिसमें किसी देश की मुद्रा का मूल्य धीरे-धीरे, नियमित और नियंत्रित गति से बदलता रहता है। यह बदलाव न तो पूरी तरह Read more »
आर्थिकी मप्र का दूसरा अनुपूरक बजट है मोहन सरकार के विकास-विजन की नई रूपरेखा December 3, 2025 / December 3, 2025 by मयंक चतुर्वेदी | Leave a Comment मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया वित्त वर्ष 2025–26 का दूसरा अनुपूरक बजट राज्य की विकास प्राथमिकताओं और राजनीतिक दिशा दोनों का दस्तावेज कहा जा सकता है। Read more » मध्य प्रदेश विधानसभा
आर्थिकी भारत की आर्थिक विकास दर ने पूरे विश्व को चौंकाया December 2, 2025 / December 2, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment 26 की द्वितीय तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 5.6 प्रतिशत रही थी। विशेष रूप से विनिर्माण एवं सेवा के क्षेत्र में वृद्धि दर अतुलनीय रही है। Read more » India's economic growth rate surprised the entire world. भारत की आर्थिक विकास
आर्थिकी भारत का आर्थिक विकास – सहकारिता से समृद्धि की ओर December 1, 2025 / December 1, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है और हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन करते हुए ग्रामीण इलाकों में निवास कर रहे नागरिक आपस में भाई-चारे के साथ मिलजुलकर रहते आए हैं। Read more » सहकारिता से समृद्धि
आर्थिकी गति से गुणवत्ता : भारतीय अर्थव्यवस्था का नया आत्मविश्वास December 1, 2025 / December 1, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही का GDP ग्रोथ रेट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद उत्साहजनक संकेत लेकर आया है। यह वृद्धि केवल एक तिमाही का आकस्मिक उछाल नहीं है बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था की व्यवहारात्मक, Read more » GDP ग्रोथ रेट
आर्थिकी नागरिक कर्तव्यों के अनुपालन से आर्थिक विकास को दी जा सकती है गति November 21, 2025 / November 24, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकों पर करों का बोझ कम करने का ईमानदार प्रयास किया है। सबसे पहिले आयकर की सीमा को 12 लाख रुपए प्रति वर्ष कर दिया गया Read more » नागरिक कर्तव्यों के अनुपालन
आर्थिकी स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली और भारतीय रिज़र्व बैंक की नई पहलें November 21, 2025 / November 24, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण भारत को आर्थिक स्वायत्तता, भुगतान सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। इससे डॉलर पर निर्भरता घटती है, भुगतान बाधाएँ कम होती हैं और विदेशी मुद्रा भंडार पर Read more » — Local Currency Settlement System and New Initiatives of Reserve Bank of India Local Currency Settlement System स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली
आर्थिकी राजकोषीय सुराज से स्वराज : अनुच्छेद 280 की आत्मा का पुनर्पाठ November 20, 2025 / November 20, 2025 by पंकज जायसवाल | Leave a Comment बजट 2026 आने वाला है. इसके पूर्व अनुच्छेद 280 की आत्मा का पुनर्पाठ जरुरी है ताकि सरकार की दृष्टि इस पर पड़े और इस पर कुछ पहल हो सके. Read more » अनुच्छेद 280
आर्थिकी ऋण के जाल में फंसे देशों से भारत के राज्यों को मिलती है सीख November 13, 2025 / November 13, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment वैश्विक स्तर पर कई विकासशील एवं अविकसित देशों पर लगातार बढ़ रहे ऋण के दबाव के चलते इन देशों की अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव स्पष्टत: दिखाई दे रहा है। Read more » अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
आर्थिकी रोजगार संकट :भारत के आईटी क्षेत्र में छंटनी की लहर November 13, 2025 / November 13, 2025 by प्रियंका सौरभ | Leave a Comment कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव से भारत के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन, पर क्या तैयार है देश का श्रमबल? Read more » आईटी क्षेत्र में छंटनी की लहर
आर्थिकी भारतीय अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प प्रशासन के 50% टैरिफ का कोई असर नहीं November 11, 2025 / November 11, 2025 by प्रह्लाद सबनानी | Leave a Comment अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर 50 प्रतिशत की दर से टैरिफ लगाया गया है। ट्रम्प ने वैसे तो लगभग सभी देशों से अमेरिका को होने विभिन्न उत्पादों पर अलग अलग दर से टैरिफ लगाया है परंतु भारत द्वारा विशेष रूप से रूस से सस्ते दामों पर कच्चे तेल की खरीद के चलते भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया हुआ है। विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले उत्पादों के निर्यात पर टैरिफ को लगाए हुए अब कुछ समय व्यतीत हो चुका है एवं अब इसका असर विभिन्न देशों की अर्थवस्थाओं एवं अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। यह हर्ष का विषय है कि 27 अगस्त 2025 से लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगभग नगण्य सा ही रहा है। माह सितम्बर 2025 में भारत से अमेरिका को विभिन्न उत्पादों का निर्यात लगभग 12 प्रतिशत कम होकर केवल 550 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर नीचे आ गया है। परंतु, भारत का अन्य देशों को निर्यात लगभग 11 प्रतिशत से बढ़कर 3,638 करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है जो पिछले वर्ष इसी अवधि में किए गए निर्यात से लगभग 7 प्रतिशत अधिक है। सितम्बर 2025 माह में भारत से 24 देशों को निर्यात की मात्रा बढ़ गई है। इस प्रकार, भारत द्वारा अमेरिका को कम हो रहे निर्यात की भरपाई अन्य देशों को निर्यात बढ़ाकर कर ली गई है। सितम्बर 2025 माह में न केवल निर्यात में पर्याप्त वृद्धि दर्ज की गई है अपितु भारत में अक्टूबर 2025 माह में प्रारम्भ हुए त्यौहारी मौसम, धनतेरस एवं दीपावली उत्सव के पावन पर्व पर, 6,800 करोड़ अमेरिकी डॉलर मूल्य के विभिन्न उत्पादों एवं सेवाओं की बिक्री भारत में हुई है, जो अपने आप में एक रिकार्ड है। हर्ष का विषय यह है कि इस कुल बिक्री में 87 प्रतिशत उत्पाद भारत में ही निर्मित उत्पाद रहे हैं। भारत में स्वदेशी उत्पादों की बिक्री का रिकार्ड कायम हुआ है।भारत में स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भी भारतीय नागरिकों का स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का हाल ही में आह्वान किया था। इस आग्रह का अब भारी संख्या में भारतीय नागरिक सकारात्मक उत्तर दे रहे हैं। भारत में लगातार बढ़ रहे उपभोक्ता खर्च के चलते वस्तु एवं सेवा कर के संग्रहण में भी लगातार वृद्धि दृष्टिगोचर है, जो अब लगभग 2 लाख करोड़ प्रति माह के स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय पूंजी बाजार भी सकारात्मक परिणाम देता हुआ दिखाई दे रहा है। सितम्बर 2025 के अंत में सेन्सेक्स 80,267 के स्तर पर था जो 21 अक्टोबर 2025 को बढ़कर 84,426 के स्तर पर पहुंच गया। इसी प्रकार निफ्टी इंडेक्स भी सितम्बर 2025 के अंत में 24,611 के स्तर से बढ़कर 21 अक्टोबर 2025 को 25,868 के स्तर पर पहुंच गया। दीपावली के पावन पर्व पर रिकार्ड तोड़ व्यापार होने एवं पूंजी बाजार के अपने पिछले 52 सप्ताह के लगभग उच्चत्तम स्तर पर पहुंचने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारक जिम्मेदार माने जा रहे हैं। (1) भारतीय उपभोक्ताओं में भारतीय उत्पादों के प्रति विश्वास निर्मित हुआ है और वे अब भारत में निर्मित उत्पादों को चीन अथवा अन्य विकसित देशों में निर्मित उत्पादों की तुलना में गुणवत्ता के मामले में बेहतर मानने लगे हैं। (2) विभिन्न भारतीय कम्पनियों द्वारा हाल ही में सितम्बर 2025 को समाप्त तिमाही के घोषित परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं। (3) साथ ही, अक्टूबर 2025 माह में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारतीय पूंजी बाजार में वपिसी हुई है। वर्ष 2025 में सितम्बर 2025 माह तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार से लगभग 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि की निकासी की थी, जबकि अक्टूबर 2025 माह में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा अभी तक लगभग 7,300 करोड़ रुपए का नया निवेश किया गया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के पश्चात भी भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर लगातार संकट के बादल मंडराते हुए दिखाई दे रहे हैं। भारत में मुद्रा स्फीति की दर लगातार नीचे आ रही है एवं यह सितम्बर 2025 माह में 1.54 प्रतिशत तक नीचे आ चुकी है जो पिछले 8 वर्षों के दौरान अपने सबसे निचले स्तर पर है। जबकि ट्रम्प प्रशासन द्वारा विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए टैरिफ के चलते अमेरिका में मुद्रा स्फीति की दर अब बढ़ती हुई दिखाई दे रही है और अगस्त 2025 माह में यह 2.9 प्रतिशत के स्तर पर रही है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा अपने वित्तीय घाटे को नियंत्रण में लाने एवं सरकारी ऋण को कम करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों से अमेरिका को होने निर्यात पर टैरिफ की घोषणा की थी। परंतु, भारी मात्रा में टैरिफ बढ़ाने के बावजूद अमेरिका का वित्तीय घाटा कम होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। आज अमेरिका में वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है जबकि भारत में यह प्रतिवर्ष लगातार कम हो रहा है और इसके वित्तीय वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत के स्तर पर नीचे पहुंच जाने की सम्भावना है, यह वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4.8 प्रतिशत का रहा था। इसी प्रकार, अमेरिका में सरकारी ऋण 37 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है और यह अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद का 120 प्रतिशत है। अर्थात, अमेरिका में आय की तुलना में अधिक मात्रा में व्यय किए जा रहे है। आज अमेरिका में सरकारी ऋण पर ब्याज अदा करने के लिए भी ऋण लिया जा रहा है। दूसरी ओर, भारत में सरकारी ऋण की मात्रा केवल 3.80 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है और यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद का मात्र 80 प्रतिशत है, जो लगातार कम हो रहा है। अमेरिका में सकल बचत की दर 22 प्रतिशत है जबकि भारत में यह 32 प्रतिशत है। भारत में सकल घरेलू उत्पाद में वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर रही है जबकि अमेरिका में यह वर्ष 2024 में केवल 2.8 प्रतिशत की रही है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत से अमेरिका को विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर विश्व बैंक द्वारा अनुमानित है। जबकि अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों के अमेरिका को निर्यात टैरिफ लगाए जाने के बावजूद अमेरिका में वर्ष 2025 में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर के नीचे गिरकर 1.6 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। स्पष्टत: अमेरिका द्वारा टैरिफ लागू करने का भारतीय अर्थव्यवस्था पर तो कोई विपरीत प्रभाव पड़ता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर ही विपरीत प्रभाव पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। साथ ही, अमेरिका में बेरोजगारी की दर में भी वृद्धि दृष्टिगोचर है जो अब बढ़कर 4.3 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है, जबकि भारत में यह दर गिरकर 5.1 प्रतिशत के स्तर पर नीचे आ गई है। अमेरिका में बैकों से लिए गए ऋण एवं क्रेडिट कार्ड पर ली गई उधारी की किश्तों के भुगतान में चूक की संख्या में वृद्धि दृष्टिगोचर है। इसके चलते हाल ही 3 वित्तीय संस्थानों को दिवालिया घोषित किया जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वर्ण की कीमत में अपार वृद्धि (लगभग 4300 अमेरिकी डॉलर प्रति आउन्स के स्तर पर) दर्शाता है कि विभिन्न देशों का अब अमेरिकी डॉलर पर विश्वास कम हो रहा है और विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा के भंडार में स्वर्ण की मात्रा को लगातार बढ़ा रहे हैं। प्रहलाद सबनानी Read more »