आर्थिकी

GST पर चर्चा में वही नदारद जिसे टैक्स देना है

वर्तमान सरकार दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों को लेकर चल रही है। दीनदयाल जी का यह शताब्दी वर्ष चल रहा है। अत: सरकार को पंक्ति के अन्तिम सिरे पर बैठे व्यक्ति का विचार करना चाहिये। यह विचार अनुदान के माध्यम से करना बेमानी है। यह सही स्वरूप में कर सुधार के माध्यम से ही लागू हो सकता है। अत: सरकारों को टैक्स सुधार के उन अध्यायों को फिर से खोलने की आवश्यकता है।

व्यापार के सहारे आर्थिक शक्ति बनता चीन

भारत सरकार चीन के साथ जो व्यापारिक समझौते कर रही है वह आज के इस ग्लोबलाइजेशन के दौर में उसकी राजनैतिक एवं कूटनीतिक विवशता हो सकती है लेकिन वह इतना तो सुनिश्चित कर ही सकती है कि चीन से आने वाले माल पर क्वालिटि कंट्रोल हो । भारत सरकार इस प्रकार की नीति बनाए कि भारतीय बाजार में चीन के बिना गारन्टी वाले घटिया माल को प्रवेश न मिले।

औद्योगिक नीतियों में हम केंद्र के पूरक – शिवराज सिंह चौहान

विशेष बात यह है कि मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जिसने Analog Semiconductor Fabrication नीति जारी की है। आज राज्य भर में Electronic Manufacturing Cluster विकसित किये जा रहे हैं, ताकि आने वाली इकाइयों को अत्याधुनिक आधारभूत ढाँचा प्रदान किया जा सके। इसके अतिरिक्त राज्य की आईटी नीति और Analog Semiconductor Fabrication नीति के तहत वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किये जा रहे हैं।

समृद्धि का अर्थ-तंत्र

धनी व्यक्ति की मितव्ययिता समृद्धि नहीं लाती।
वो धन को रोककर  उत्पादन या सेवा  रोक देता है।
इस लिए, समर्थ और धनी व्यक्ति की मितव्ययिता (कम खर्च ) देश की समृद्धि नहीं ला सकती।

काला धन : कुछ सवाल?

इस सफलता का एक कारण यह भी हो सकता है कि अपनी धनराशि उजागर करने वालों के नाम सरकार ने मजबूती से दबाकर रखे हैं। उन्हें बदनामी का कोई डर नहीं है। लगभग 30 हजार करोड़ रु. सरकार को इन लोगों से आयकर के रुप में प्राप्त होंगे।