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कुछ कर गुजरने के जूनुन ने पहुंचाया जया को इस मुकाम तक

जया देवी का सराधी गांव  हर साल सूखे के कारण फसलों के बर्बाद होने से परेशान रहता था। ऐसे में जया देवी ने इस समस्या का तोड़ निकालने का फैसला लिया और एक दिन वो एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी  के गवर्निंग सदस्य किशोर जायसवाल  से मिलीं। उन्होने जया को सूखे का कारण और बारिश के पानी को कैसे बचाया जाये? इसके बारे में बताया। किशोर जायसवाल ने उनको बंजर जमीन  पर पेड़ लगाने के लिए कहा।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

पतंजलि और उसके संस्थापक श्री रामदेव की जीवनी आज के युवाओं को और प्रेरणास्पद तथा निर्विवाद लगती यदि वे स्टीव जॉब्स या मार्क जुकरबर्ग या रतन टाटा और मुकेश अंबानी जैसे कॉर्पोरेट लीडर होते। एक अतिसामान्य किसान परिवार के युवक का सामान्य आर्थिक-शैक्षिक पृष्ठभूमि को पीछे छोड़कर शिखर पर पहुंचना और उसका बहादुरी से स्वीकारना कि ब्रांडिंग और पैकेजिंग के इस युग में उसने योग की उपयुक्त ब्रांडिंग-पैकेजिंग द्वारा उक्त सफलताएँ प्राप्त की हैं, व्यक्तित्व विकास की पाठ्य पुस्तकों में स्थान पाने योग्य है।

मजदूरों के लिए विपरीत समय

पिछले साल अगस्त में लोकसभा में मोदी सरकार ने कारखाना (संशोधन) बिल 2016 पास करा लिया है. यह अधिनियम कारखानों को मज़दूरों से दुगना ओवरटाइम करवाने की छूट देता है. इस संशोधन के मुताबिक पहले के तीन महीने में 50 घंटे के ओवरटाइम के कानून के मुकाबले मज़दूरों से 100 घंटे ओवरटाइम करवाया जा सकेगा, इस तरह से साल भर में मज़दूरों से 400 घंटे का ओवरटाइम करवाया जा सकेगा. इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय कहा था कि ‘मोदी सरकार की ‘मेक इन इण्डिया’, ‘स्किल इन्डिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी कार्यकर्मों को देखते हुए यह संशोधन बेहद ज़रूरी बन गया है.’ उन्होंने दावा किया था कि ‘कारखाना अधिनियम में यह संशोधन मज़दूरों को अधिक काम करने और अधिक पैसा कमाने का अवसर देगा और इससे व्यापार करने की प्रक्रिया भी आसान बनेगी’. गौरतलब है कि 2014 में मोदी सरकार ने आने कुछ महीनों के अन्दर ही कारखाना (संशोधन) विधेयक लोक सभा में पेश किया था जिसके बाद उसे स्थायी समिति के पास भेजा दिया गया था.

ध्वनि प्रदूषण न हिन्दू न मुस्लिम,केवल हानिकारक

धर्मस्थलों पर नियमित रूप से निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार होने वाले इस शोर-शराबे से लगभग पूरा देश दु:खी है। ध्वनि प्रदूषण बच्चों की पढ़ाई खासतौर पर परीक्षा के दिनों में उनकी परीक्षा की तैयारी में अत्यंत बाधक साबित होता है। मरीज़ों तथा वृद्ध लोगों के लिए ध्वनि प्रदूषण किसी मुसीबत से कम नहीं। आए दिन होने वाले जगराते,कव्वालियां या दूसरे शोर-शराबे से परिपूर्ण धार्मिक आयोजन यह सब हमारे समाज के स्वास्थय पर बुरा असर डालते हैं।

ऐतिहासिक है केंद्र सरकार की नई स्वास्थ्य नीति

सरकार ने अपनी नई नीति में कई रोगों के उन्मूलन का भी लक्ष्य रख लिया है। जिसमें 2018 तक देश से कुष्ठ रोग की समाप्ति , वर्ष 2017 तक कालाजार और वर्ष 2017 तक ही लिम्फेटिक फाइलेरियसस का उन्मूलन करने की बात कही गयी है। इसके साथ ही क्षय रोगियों में 85 प्रतिशत से अधिक इलाज दर प्राप्त करने पर जोर दिया गया है। ताकि वर्ष 2025 तक इसका उन्मूलन किया जा सके।

कितना असाधारण अब सौ फीसदी कुदरती हो जाना

परिस्थिति के हिसाब से किसानों के तर्क व्यावहारिक हैं। उनकी बातों से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे केचुंआ खाद, कचरा कम्पोस्ट आदि से परिचित नहीं है। गोबर गैस प्लांट उनकी पकड़ में नहीं है। हरी खाद पैदा करने के लिए हर साल जो अतिरिक्त खेत चाहिए, उनके पास उतनी ज़मीन नहीं है। ज़िला कृषि कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी गांव में आते-जाते नहीं। सच यही है कि जैविक खेती के सफल प्रयोगों की भनक देश के ज्यादातर किसानों को अभी भी नहीं है।