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    Homeचुनावजन-जागरणशुक्र मनाइए कि आपकी नौकरी बची हुई है !

    शुक्र मनाइए कि आपकी नौकरी बची हुई है !

    -निरंजन परिहार

    शुक्र मनाइए कि आप उन दो करोड़ लोगों में नहीं है, जिनकी, लॉकडाउन में चलती नौकरियां चली गई हैं और अगर आप उन 22 करोड़ लोगो में नहीं है, जो लॉकडाउन में काम धंधा बंद होने से बेरोजगार होकर घर बैठने को मजबूर हैं, तो भी शुक्र मनाइए। क्योंकि हमारे हिंदुस्तान में कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। जिंदगियों के साथ वह रोजगार भी खाए जा रहा है। वायरस से फैल रही इस महामारी ने हमारे हिंदुस्तान में 29 लाख लोगों बीमार कर रखा है। इसलिए लोग डर रहे हैं। लगभग 55 हजार लोग मर गए हैं, सो सारा समाज भयभीत है। इन दिनों हमारा सारा ध्यान केवल कोरोना के बीमार, कोरोना की बीमारी और कोरोना के मामले में की जा रही सरकार की बातों पर है। लेकिन सच कहें, तो कोरोना की बीमारी का जितना हल्ला मचाया जा रहा है, उससे बहुत ज्यादा डरने की जरूरत नहीं लगती। बल्कि डरिए इस बात से कि कल आपका रोजगार बचेगा कि नहीं। डरिए इस तथ्य से कि आपकी नौकरी पर मंडराता खतरा आनेवाले दिनों में आपकी आय को खा रहा है।  और डरिए इस बात से कि आनेवाले किसी रोज आप अचानक सड़क पर आनेवाले हैं। कोरोना की महामारी ने भारत में बेकारी और बेरोजगारी की बाढ़ ला दी है।  लॉकडाउन ने करोड़ों जिंदगियों की खुशियों पर लॉक लगा दिया है और इतने ही परिवारों की जिंदगी को डाउनफॉल में धकेल दिया है। अप्रैल से अब तक 1 करोड़ 89 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, लेकिन कुल मिलाकर देश में लगभग 22 करोड़ लोगों का रोजगार छिन गया है।

    रोजगार रेजगारी की तरह बिखर रहे हैं।  इस मामले में भारत की तस्वीर बहुत भयावह है, और सरकार है कि सिर्फ संक्रमण की बीमारी का हल्ला मचाए हुए है। भारत की कुल 135 करोड़ जनता में से कोरोना वायरस संक्रमण से बीमार तो केवल 28 लाख 71 हजार 35 लोग ही हुए हैं, लेकिन कोरोना ने बीते 5 महीनों में लगभग दो करोड़ लोगों को बेराजगार कर दिया है। एक करोड़ से ज्यादा लोगों की सैलरी आधी हो गई हैं और इतने ही परिवार आयविहीन हो गए हैं। ऐसे में आप और हम सारे लोग सरकार की बातों की तरफ ध्यान देकर सिर्फ कोरोना से बीमार लोगों के आंकड़ों को देख देख कर डर रहे हैं, रो रहे हैं और कोहराम मचा रहे हैं। हालांकि बीमार तो फिर भी ठीक हो जाएंगे, और बहुत बड़ी संख्या में हो भी रहे हैं। लेकिन छूटी हुई नौकरियां फिर से मिलने की संभावनाएं क्षीण हो रही हैं। आधी तनख्वाह में भी लोगों को काम नहीं मिल रहा है। यह तथ्य है कि 24 मार्च से लॉकडाउन शुरू होने के बाद अब तक कुल भारत में 2 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़े गवाह है कि भारत में लॉकडाउन ने बेरोजगारों की बाढ़ ला दी है। सीएमआईई के आंकड़ों में यह बात सामने आई है कि अप्रेल की शुरूआत से अब तक  भारत में 1 करोड़ 89 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। इस रिपोर्ट का अध्ययन करने पर साफ पता चलता है कि अकेले जुलाई महीने में लगभग 50 लाख लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है। इस रिपोर्ट के पिछले आंकड़ों को देखें, तो अप्रैल महीने में 1 करोड़ 77 लाख लोगों की नौकरी गई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जून महीने में लगभग 39 लाख नौकरियां मिली थीं, लेकिन उससे पहले मई महीने में लगभग 1 लाख लोगों की नौकरी गई।

    एक साथ इतनी सारी नौकरियां खोने के इतने अधिक मामले भारत में पिछले हजारों सालों के इतिहास में सबसे बुरे स्तर पर माने जा रहे है। क्योंकि इससे पहले भारत में इतनी बड़ी संख्या में रोजगार कभी नहीं छिने गए। केवल पांच महीनों में लगभग 2 करोड़ लोगों को नौकरी से निकाला जाना अपने आप में बहुत चिंताजनक बात है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार, नौकरी से निकाले जाने और बेरोजगारी में फर्क है। नौकरी से हटाया जाना चलते काम का समाप्त होना है और बेरोजगारी की परिभाषा यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा सक्रियता से रोज़गार की तलाश किये जाने के बावजूद जब उसे काम नहीं मिल पाता तो यह अवस्था बेरोज़गारी कहलाती है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की स्थापना एक स्वतंत्र थिंक टैंक के रूप में 1976 में की गई थी। यह प्राथमिक डेटा संग्रहण, विश्लेषण और पूर्वानुमानों द्वारा सरकारों, शिक्षाविदों, वित्तीय बाजारों, व्यावसायिक उद्यमों, पेशेवरों और मीडिया सहित व्यापार सूचना उपभोक्ताओं के पूरे स्पेक्ट्रम को अपनी सेवाएँ प्रदान करता है। सीएमआईई के सीईओ महेश व्यास ने कहा कि आमतौर पर वेतनभोगियों की नौकरियां जल्दी नहीं जाती। लेकिन जब जाती है तो, दोबारा पाना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए ये हम सभी के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनावायरस महामारी के मद्देनजर विभिन्न सेक्टर की कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन काटे या फिर उन्हें बिना भुगतान के छुट्टी दे दी। उद्योग निकायों और कई अर्थशास्त्रियों ने बड़े पैमाने पर कंपनियों पर महामारी के प्रभाव से बचने और नौकरी के नुकसान से बचने के लिए उद्योग को सरकारी समर्थन देने का अनुरोध किया है। क्योंकि देश में कोरोना के कारण लगभग 22 करोड़ लोगों का रोजगार छिन गया है। और हम हैं कि सिर्फ बीमारी से डर रहै हैं। जबकि डर दूसरा बहुत बड़ा है, जिसके जल्दी सुधरने के कोई आसार ही नहीं है। इसीलिए अपना डर है कि कल आपका रोजगार बचेगा कि नहीं। लेकिन इसके बावजूद आप अगर सरकार द्वारा मचाए जा रहे कोरोना से बीमार होने के हल्ले से डरे हुए हैं, तो डरिए। कोई आपका क्या कर सकता है।

    निरंजन परिहार
    निरंजन परिहार
    लेखक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं

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