सिनेमा

बॉलीवुड की लीक से हटकर हैं अनुराग

दैनिक हिन्दुस्तान के सप्लीमेंट ‘रिमिक्स’ के अंदर छपे एक लेख ने मेरे मस्तिष्क को अच्छा खासा घुमाया। अब आप यह सोच रहे होंगे की ऐसा लेख क्या था? वह लेख था ‘अनुराग कैसे पहुंचे वेनिस’’ ।

बाजार और बिकनी के चंगुल में गीतकार और संगीतकार

गीत-संगीत अर्थात सुरो का सागर, जो मन की गहराईयों में पहुचकर शरीर के अंदर छीपे सुक्ष्म कोशिकाओं को तरंगीत कर उसे उर्जान्वित करने का काम करती है। संगीत भारत के लिए कोई नई अवधरणा नहीं है

राजनैतिक गीत इस मोड़ से जाते हैं – ब्रजेश कुमार झा

दुनिया को मालूम है कि हिन्दुस्तानी फिल्म में गीतों को जितना तवज्जह मिला उतना संसार के किसी भी दूसरे फिल्मीद्योग में नहीं मिला है। यहां तो फिल्में आती हैं, चली जाती हैं। सितारे भी…

गुरुदत्त और फिल्म सिनेमा- आलोक नंदन

गुरुदत्त के बिना वर्ल्ड सिनेमा की बात करना बेमानी है। जिस वक्त फ्रांस में न्यू वेव मूवमेंट शुरु भी नहीं हुआ था, उस वक्त गुरुदत्त इस जॉनरा में बहुत काम कर चुके थे। फ्रांस के न्यू वेव..