सिनेमा

राजनैतिक गीत इस मोड़ से जाते हैं – ब्रजेश कुमार झा

दुनिया को मालूम है कि हिन्दुस्तानी फिल्म में गीतों को जितना तवज्जह मिला उतना संसार के किसी भी दूसरे फिल्मीद्योग में नहीं मिला है। यहां तो फिल्में आती हैं, चली जाती हैं। सितारे भी…

गुरुदत्त और फिल्म सिनेमा- आलोक नंदन

गुरुदत्त के बिना वर्ल्ड सिनेमा की बात करना बेमानी है। जिस वक्त फ्रांस में न्यू वेव मूवमेंट शुरु भी नहीं हुआ था, उस वक्त गुरुदत्त इस जॉनरा में बहुत काम कर चुके थे। फ्रांस के न्यू वेव..

राजधानी में सड़क छाप फिल्म फेस्टिवल

राजधानी के लुटियंस इलाके में स्पृहा (गैर सरकारी संस्था) ने बच्चों की कोमल कल्पनाओं में और पंख लगाने के इरादे से दिल्ली के नई सीमापुरी इलाके में सड़क छाप फिल्म उत्सव का आयोजन किया।

सिनेमाई गीत- संचार का बेजोड़ माध्यम -ब्रजेश झा

यह बात सहजता से कबूल है कि गाने संचार में महति भूमिका अदा करते है। उसपर से सिनेमाई गाने हों तो उसके क्या कहनें! खैर, जब कभी हिन्दी सिनेमाई गीतों पर बात छिड़ती नहीं कि तबीयत रूमानी हो जाती है।

दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा… – ब्रजेश झा

मजे की बात है कि स्लमडाग मिलिनेयर के संगीत व गीत के लिए ए. आर. रहमान को दो एकेडमी अवार्ड्स प्रदान किए गए। इससे हम हिन्दुस्तानी बड़े गदगद हैं…

हीरामन की बैलगाड़ी अब भी है सुरक्षित

पटना। सन 1966 में बनी यादगार फिल्म तीसरी कसम की चर्चा मात्र से साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु की खूब याद आती है। जिले के कसबा प्रखंड के बरेटा गांव में मौजूद एक बैलगाड़ी भी इसी की एक कड़ी है। यह वही बैलगाड़ी है जिसपर फिल्म के नायक हीरामन यानी हिन्दी सिनेमा के शोमैन राजकपूर ने सवारी की थी।