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खत्म होती बादशाहत

इस सीरीज़ के खत्म होने के बाद आस्ट्रेलिया को अपने घरेलू मैदान पर साउथ अफ्रीका से टेस्ट सीरीज़ खेलनी थी.. लेकिन दौरे के पहले टेस्ट में ही आस्ट्रेलिया को पर्थ में पटखनी में मिल गई.. और साउथ अफ्रीका ने उसे आसानी से 177 रनों से हराकर तीन टेस्ट मैचों की सीरीज़ में 1-0 की बढ़त बना ली.. ये पर्थ में साउथ अफ्रीका की आस्ट्रेलिया पर लगातार तीसरी जीत थी…

हठयोग पर ठिठका क्रिकेट…

अहम बात यह है कि अगर श्रृंखला रद्द होती है कि तो मामला बीसीसीआइ से हटकर लोढ़ा समिति की तरफ आ जाएगा कि सीरीज उनकी वजह से नहीं हो सकी.. जिसके बाद टकराव का यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल को प्रभावित करेगा। इस एक फैसले से सिर्फ क्रिकेट या किसी क्रिकेट बोर्ड की नहीं बल्कि भारत की बदनामी होगी।

यहाँ तो घर की मुर्गी दाल बराबर ही है !

स्थिति ऐसी लगती है जैसा कबड्डी के साथ घर की मुर्गी दाल बराबर जैसा व्यवहार हो रहा है । वर्ल्ड कप , वर्ल्ड कप होता है चाहे वे किसी भी खेल का क्यों न हो पर अपने यहाँ तो वर्ल्ड कप मतलब क्रिकेट वर्ल्ड कप और कुछ नही । ये बात समझी जा सकती है कि व्यक्ति की खेल भावना मे एकाएक बड़ा बदलाव सम्भव नही है और न ही कोई क्रिकेट प्रेमी एकाएक कबड्डी प्रेमी बनकर उसकी बारिकियों का विश्लेषण कर सकता है और एकाएक इतने बड़े बदलाव की उम्मीद न तो समाज हमसे करता और न ही उस खेल के खिलाड़ी , वे तो बम इस इतनी

खत्म हुई मुश्किल

चूंकि जिन फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर विवाद चल रहा है, उन फिल्मों में काम करने वाले कलाकार वैध तरीके से वीजा लेकर काम कर रहे हैं। इसलिए फिल्मों में न तो उन्हें काम देना गलत है और न ही उनका काम करना गलत है। इसलिए इन कलाकारों की फिल्मों पर रोक वैधानिक नहीं कहीं जा सकती थी ? वैसे हमारे यहां अभिव्यक्ति की आजादी को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।

भारतीय सिनेमा में मुस्लिम प्रभाव को बढ़ावा

सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह, फरहान अख्तर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फवाद खान जैसे अनेक नाम हिंदी फिल्मों की सफलता की गारंटी बना दिए गए हैं। अक्षय कुमार, मनोज कुमार और राकेश रोशन जैसे फिल्मकार इन दरिंदों की आंख के कांटे हैं। तब्बू, हुमा कुरैशी, सोहाअलीखान और जरीनखान जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों का कैरियर जबरन खत्म कर दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं और इस्लामी कठमुल्लाओं को उनका काम गैरमजहबी लगता है। फिल्मों की कहानियां लिखने का काम भी सलीम खान और जावेद अख्तर जैसे मुस्लिम लेखकों के इर्द-गिर्द ही रहा जिनकी कहानियों में एक भला-ईमानदार मुसलमान, एक पाखंडी ब्राह्मण, एक अत्याचारी – बलात्कारी क्षत्रिय, एक कालाबाजारी वैश्य, एक राष्ट्रद्रोही नेता, एक भ्रष्ट पुलिस अफसर और एक गरीब दलित महिला होना अनिवार्य शर्त है।

इंडियन सुपर लीग : भारतीय फुटबॉल के विस्तार का सुनहरा मंच

इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियो का एक नया बेड़ा देखने को मिलेगा। जे.जे. लालपेखलुआ, सुनील छेत्री और यूगेनेसन लींगदोह खुद को देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी साबित कर चुके हैं और देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन से खिलाड़ी उम्मीदों की कसौटी पर खुद को साबित करता है। युवा खिलाड़ी प्रोनय हेल्डर पर भी इस बार सबकी नजरें टिकी हैं…