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खत्म हुई मुश्किल

चूंकि जिन फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर विवाद चल रहा है, उन फिल्मों में काम करने वाले कलाकार वैध तरीके से वीजा लेकर काम कर रहे हैं। इसलिए फिल्मों में न तो उन्हें काम देना गलत है और न ही उनका काम करना गलत है। इसलिए इन कलाकारों की फिल्मों पर रोक वैधानिक नहीं कहीं जा सकती थी ? वैसे हमारे यहां अभिव्यक्ति की आजादी को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।

भारतीय सिनेमा में मुस्लिम प्रभाव को बढ़ावा

सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह, फरहान अख्तर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फवाद खान जैसे अनेक नाम हिंदी फिल्मों की सफलता की गारंटी बना दिए गए हैं। अक्षय कुमार, मनोज कुमार और राकेश रोशन जैसे फिल्मकार इन दरिंदों की आंख के कांटे हैं। तब्बू, हुमा कुरैशी, सोहाअलीखान और जरीनखान जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों का कैरियर जबरन खत्म कर दिया गया क्योंकि वे मुस्लिम हैं और इस्लामी कठमुल्लाओं को उनका काम गैरमजहबी लगता है। फिल्मों की कहानियां लिखने का काम भी सलीम खान और जावेद अख्तर जैसे मुस्लिम लेखकों के इर्द-गिर्द ही रहा जिनकी कहानियों में एक भला-ईमानदार मुसलमान, एक पाखंडी ब्राह्मण, एक अत्याचारी – बलात्कारी क्षत्रिय, एक कालाबाजारी वैश्य, एक राष्ट्रद्रोही नेता, एक भ्रष्ट पुलिस अफसर और एक गरीब दलित महिला होना अनिवार्य शर्त है।

इंडियन सुपर लीग : भारतीय फुटबॉल के विस्तार का सुनहरा मंच

इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियो का एक नया बेड़ा देखने को मिलेगा। जे.जे. लालपेखलुआ, सुनील छेत्री और यूगेनेसन लींगदोह खुद को देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी साबित कर चुके हैं और देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कौन से खिलाड़ी उम्मीदों की कसौटी पर खुद को साबित करता है। युवा खिलाड़ी प्रोनय हेल्डर पर भी इस बार सबकी नजरें टिकी हैं…