कहानी लघुकथा / पुण्य October 27, 2011 / December 5, 2011 by अर्पित बंसल | Leave a Comment अर्पित बंसल दिन भर के अथक परिश्रम व बाबुओं की आवाज पर भागदौड करने के बाद जैसे ही ननकू ने अपनी साइकिल उठाई पीछे से आती एक आवाज ने उसके कदम रोक दिये ! “अरे ननकू जरा रुकना”, कार्यालय के सबसे बड़े अधिकारी वर्मा जी उसे अपनी मृदु आवाज मे रुकने का इशारा कर रहे […] Read more » fable लघुकथा
कहानी एक लोक कथा : आश्रय—पथ; पाथेय—दुःख October 14, 2011 / December 5, 2011 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा बहुत दिन हुए, दूर के एक देश से होकर कुछ वीर सैनिक अपने अपने घोडों पर सवार होकर चले जा रहे थे । उनकी राह एक घने जंगल से होकर थी, जहाँ उलझी लताएँ काफी घनी और मजबूत हुआ करती थी ; ये इस राह पर भटक गए लोगों की मांसपेशियों को चीर-चीर […] Read more » lok katha एक लोक कथा
कहानी लाल और काली रात October 6, 2011 / December 5, 2011 by गंगानन्द झा | Leave a Comment गंगानन्द झा (सैयद अलावल, सतरहवी शताब्दी के बंगाल का महान कवि, की कविता,जिसकी नाव पुर्तगाली लुटेरो और तूफान का सामना करती हुई अराकान पँहुची थी।) लाल और काली रात ; लाल और काली रात में एक हरी नाव हिलती, डोलती, तूफान में फॅंसी,चकित,डरी हुई अरकान के तट की ओर बढ़ रही थी। लेकिन तूफान आया […] Read more » black night काली रात
कहानी तीन कहानियाँ है जो भारत के भविष्य की नयी इबारत लिखेंगी September 22, 2011 / December 6, 2011 by पूजा शुक्ला | 2 Comments on तीन कहानियाँ है जो भारत के भविष्य की नयी इबारत लिखेंगी इस इबारत की पहली कहानी धृतराष्ट्र के ’कृष्ण’ घिर गए है, जनता पार्टी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने २१ सितम्बर २०११ को सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र दिखाया जो २५ मार्च, २०११ को प्रणब दा के वित्त मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा था . उसमे लिखा था कि अगर पूर्व वित्तमंत्री चाहते तो, २क्र स्पेक्ट्रम […] Read more » Future of India
कहानी वह कहानी लेखक बनना चाहता था. September 22, 2011 / December 6, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment देव को बचपन से हीं पुस्तकें पढने का बहुत शौक था.अब तो उसे यह भी याद नहीं है कि कौन कौन सी पुस्तकें पढी उसने उन दिनों.आज वह सोचता है कि न जाने कब और कैसे चाट पडी उन पुस्तकों की. पुस्तकों की चाट ने उसके जीवन में नाटकीयता का समावेश भी कर दिया.अनजाने में […] Read more » R Singh आर सिंह कहानी कहानी लेखक
कहानी कहानी/ चकाचौंध से परे August 11, 2011 / December 7, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह “चा ऽ चा ऽ”.यह आवाज कानों में पडते हीं मैं थोडा ठीठका.फिर सोचा यह आवाज यहाँ कहाँ से आ सकती है?यह तो मेरे गाँव,मेरे इलाके की आवाज थी और मैं तो गुजर रहा था,कोलकाता में चौरंगी से. आवाज फिर कानों में टकराई,”चा ऽ चा ऽ”. वही खींची हुई आवाज.”हम आप हीं को पुकार […] Read more » Story चकाचौंध से परे
कहानी कहानी/ डॉ. (मिस) मारग्रेट July 26, 2011 / December 8, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह इस कहानी के तीन मुख्य पात्र हैं.डा.(मिस) मारग्रेट,श्रीमती शीला सिंह और गौतम सिंह.श्रीमती शीला सिंह गौतम सिंह की पत्नी नहीं थी.वह गौतम सिंह की साली थी,यानि उनके पत्नी की छोटी बहन.शीला सिंह का विवाह जनार्दन सिंह के साथ हुआ था,जो मेडिकल कालेज का अंतिम वर्ष का छात्र था.गौतम सिंह उसी शहर में रहता […] Read more »
कहानी कहानी / प्रश्नचिह्न(?) July 12, 2011 / December 9, 2011 by आर. सिंह | 2 Comments on कहानी / प्रश्नचिह्न(?) आर. सिंह मार्क्स ने कहा था, “चर्च का पुजारी जानता है कि ईश्वर नहीं है, और अगर है भी तो चर्च में तो कभी नहीं आयेगा.” मोहन ने यह पढा था और यह बात घर कर गयी थी उसके दिल में. वह था भी कुछ असाधारण सा.बचपन से ही अत्यंत तीव्र बुद्धि वाला होते हुए […] Read more » God ईश्वर
कहानी वो कौन थी? July 10, 2011 / December 9, 2011 by महेश दत्त शर्मा | 4 Comments on वो कौन थी? महेश दत्त शर्मा कुछ वर्ष पूर्व तक आजीविका के लिए मैं ऑटो चलाया करता था। मैं अकसर रात्रि की शिफ्ट में सड़क पर निकलता था। दिन में एक अखबार में काम करता था। जनवरी की सर्द रातें थीं। दो बजे एक सवारी को एयरपोर्ट पर ड्रॉप करके मैं धौला कुआँ (दिल्ली) के इलाके से गुजर […] Read more »
कहानी कहानी/ अपनी-अपनी जिंदगी June 28, 2011 / December 9, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह अमर थोड़ी देर पहले ऑफिस से लौटा था और चाय पीकर निकल पड़ा था यों ही सड़क नापने. चलते-चलते वह सोच भी रहा था कि क्या अजीब मूडी इंसान है वह भी. यह भी पता नहीं क्या करना है? कहाँ जाना है? पर सड़क नापे जा रहे हैं. सीधी सादी जिंदगी थी अमर […] Read more » life जिंदगी
कहानी कहानी/ एक बार फिर June 23, 2011 / December 11, 2011 by राजनारायण बोहरे | Leave a Comment राजनारायण बोहरे वे फिर आ गये हैं। आज हर जगह यही सुनने को मिल रहा है। चारों घरों में यही चर्चा हैं। भीतर पहुंचते ही घर का कोई सदस्य फुसफुसाते हुये यह सूचना देता है और चुप हो जाता है। सूचना देने वाले के चेहरे पर दहशत के भाव झांकते हैं और उसकी आंखें फिर […] Read more » Story
कहानी कहानी/ स्वप्न संसार June 12, 2011 / December 11, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह राज ने आज फिर वह स्वप्न देखा. वही मासूम चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आँखें और उन झील जैसी आँखों में गहरी उदासी. आज भी राज को लग रहा था कि वह लडकी उससे कुछ कहना चाहती थी, पर न जाने क्यों उसके होठ केवल फड़फड़ा कर रह जाते थे? उसके बाद राज की नींद खुल […] Read more »