कहानी कहानी/ वह लड़की May 16, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह राज दफ्तर जाने के लिये जिस स्टाप से मिनी बस पकडता था, वहाँ वह करीब करीब खाली होती थी. मुश्किल से तीन या चार सवारियाँ होती थी उसमें. फिर भी राज एक खास सीट पर हीं बैठता था. मिनी बस आगे जाती और उसमें सवारियाँ भरती जाती. जब तक वह लडकी बस में चढ़ती […] Read more »
कहानी संस्मरणात्मक कहानी : वे दिन April 26, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | 3 Comments on संस्मरणात्मक कहानी : वे दिन जिन्दगी के पथ पर चलते हुए बहुत सी एैसी घटनाएं घटित हो जाती हैं जो यादगार ही बनकर नहीं रह जाती,वल्कि हमेशा कुरेदती भी रहती है दिलों दिमाग को.क्या उम्र रही होगी मेरी उस समय?यही तेरह या चौदह वर्ष की.वयःसन्धि के उस मोड पर मन की उमंगें आसमान छूने की तम्मना रखती हैं.आज फिर जब […] Read more » कहानी संस्मरण
कहानी कहानी / रंजन April 19, 2011 / December 13, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह ‘रंजन मुझे प्यार करता है पापा.’ ‘यह कैसे हो सकता है?’ प्रोफेसर साहब सोंच में पड गये. ‘बेटी तुम पागल तो नही हो गयी हो? ‘नही पापा, उसने स्वयं मुझसे कहा कि वह मुझे प्यार करता है.’ ‘बेटी तुम पढी लिखी हो.एक वैज्ञानिक की बेटी ही नही,तुम स्वयं एक कम्प्युटर साइंटिस्ट हो.तुम एैसा सोच […] Read more »
कहानी कहानी/ सैलाब April 18, 2011 / December 13, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment -सन्तोष गोयल तुलसी भाभी, उस दिन मुझे सपने में दीखीं थी…रोती-बिलखती…हाथ पसार …मानो कुछ मांग रही हों…शायद कुछ पकड़ना चाहती हों। क्यों आया मुझे तुलसी भाभी का सपना ? इसका कारण कौन बताये ? कौन व्याख्या करे ? अगले दिन सुबह-सवेरे चौक बुहारते हुए मैंने अम्मां से तुलसिया भाभी के बारे में जानना चाहा। बाबा […] Read more »
कहानी प्रेम, दाढी और धडकनें March 27, 2011 / December 14, 2011 by अखिल कुमार (शोधार्थी) | 3 Comments on प्रेम, दाढी और धडकनें आज रास्ते में रमेश मिला था. चेहरे पर चार इंच की उगी झाड़ियों में से झांकते चेहरे को मैं नहीं पहचान पाया किन्तु मेरा उन्नत ललाट उसकी समझ से दूर नहीं रहा. अचानक उसने मुझे पुकारा तब मैंने आवाज़ के आधार पर कद-काठी देखकर कयास लगाया कि यह तो रमेश होना चाहिए और वो रमेश ही निकला. कोई सफाचट गाल वाला यदि चेहरे पर अचानक दाढ़ी कि खेती करने लगे तो इसके दो ही कारण हो सकते हैं- ‘या तो वह प्रेम में खुद को घायल रूप में […] Read more »
कहानी बच्चों का पन्ना एकलव्य प्रसंग : आधुनिक पुनर्पाठ March 16, 2011 / December 14, 2011 by अखिल कुमार (शोधार्थी) | 1 Comment on एकलव्य प्रसंग : आधुनिक पुनर्पाठ एक राजा का लड़का था जो इतने के बावजूद राजपूत नहीं था। चूँकि उसका पिता जन्म से क्षत्रप न होकर निशाद था अतः वह राजपूत होने की न्यूनतम अर्हता पूरी करके भी वांछनीयताओं में पिछड़ जाता था। तत्कालीन पूर्ण पक्के राज पुत्रों के समान उसने भी िक्षित होने का मन बनाया। हालांकि उसके पिता ने […] Read more »
कहानी साहित्य कहानी/बाबूजी February 27, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment एस. के. रैना हमारे पड़ोस में रहने वाले बाबूजी की उम्र यही कोई अस्सी के लगभग होनी चाहिए। इस उम्र में भी स्वास्थ्य उनका ठीक-ठाक है। ज़िन्दगी के आखिरी पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते व्यक्ति आशाओं-निराशाओं एवं सुख-दु:ख के जितने भी आयामों से होकर गुज़रता है,उन सब का प्रमाण उनके चेहरे को देखने से मिल जाता […] Read more » Story कहानी
कहानी कहानी : प्रैक्टिकल January 12, 2011 / December 16, 2011 by चैतन्य प्रकाश | 1 Comment on कहानी : प्रैक्टिकल -चैतन्य प्रकाश “यह सब झूठ है, बेबुनियाद है, मेरे राजनैतिक विरोधियों की चालबाजी है।” फोन पर उत्तर देते हुए श्याम सुंदर ने कहा। उसके चेहरे पर प्रतिक्रिया थी, जिसमें घबराहट और भय भी छुपे हुए थे। टेबिल पर आज सुबह के अखबार थे। सारे अखबारों में एक घोटाले की खबर प्रमुख थी, इस घोटाले में […] Read more » Story कहानी
कहानी कहानी/वह मुझे अच्छी लगने लगी January 3, 2011 / December 18, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 11 Comments on कहानी/वह मुझे अच्छी लगने लगी प्रिय सुरेश, ये क्षेत्र छत्तीसगढ़ कहलाता है। छत्तीसगढ़ का मतलब बहुत से लोग कहते हैं कि इधर 36 वर्ष रहने के बाद ही आदमी इधर के लोगों को जानता है, कुछ लोग कहते हैं यहां के लोग जब तक छत्तीस गाँव न बदलें उन्हें चैन नहीं मिलता। लेकिन मैंने अनुभव किया कि छत्तीसगढ़ का मतलब […] Read more » Story
कहानी कहानी/ पशु-सम्मेलन December 24, 2010 / December 18, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment साधक उम्मेदसिंह बैद एक गाँव के पास के जंगल की कहानी है। जंगल बहुत घना तो नहीं, बस ठीक-ठाक सा है। ॠतु-चक्र क्या गङबङाया, जानवरों की समस्यायें बङी होने लगीं। अब सारे जानवर समस्याओं का सही कारण क्या जानते, परस्पर ही एक-दूसरे पर दोषारोपण करने लगे, लङने-झगङने भी लगे। तनाव रहने लगा। सियार और कुत्ता […] Read more » Story कहानी
कहानी बच्चों का पन्ना बाल कहानी/ अच्छा-सा तोहफा December 13, 2010 / December 18, 2011 by डॉ. मो. अशरफ ख़ान | Leave a Comment चानपा बड़ी देर से चट्टान की ओट में खड़ा बारिश रुकने का इंतजार कर रहा था। अभी एक घंटा पहले आसमान बिल्कुल साफ था। चानपा को उम्मीद थी कि वह अंधेरा होते-होते घर पहुंच जाएगा। पर बादल ऐसे घिरे कि दो कदम चलना मुश्किल हो गया। वह बार-बार आसमान की ओर लाचार दृष्टि से ताककर […] Read more » Childrens Story
कहानी लघु कथा/कलरव November 26, 2010 / December 19, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on लघु कथा/कलरव ”शिवप्रसाद, तुमको इस मकान से अच्छा मकान मिल सकता था, जहां शांति रहती, परंतु तुमने छोटे-छोटे बच्चों के विद्यालय के समीप ही मकान क्यों लिया? दिन-भर बच्चों का षोरगुल सुनाई देगा।” मोहनलाल ने अपने मित्र से प्रश्न किया। ”ऐसा है मोहन, मेरे पांच बेटे हैं और सभी का विवाह हो चुका है। पांचों बेटों के […] Read more » Short story लघुकथा