कहानी वो कौन थी? July 10, 2011 / December 9, 2011 by महेश दत्त शर्मा | 4 Comments on वो कौन थी? महेश दत्त शर्मा कुछ वर्ष पूर्व तक आजीविका के लिए मैं ऑटो चलाया करता था। मैं अकसर रात्रि की शिफ्ट में सड़क पर निकलता था। दिन में एक अखबार में काम करता था। जनवरी की सर्द रातें थीं। दो बजे एक सवारी को एयरपोर्ट पर ड्रॉप करके मैं धौला कुआँ (दिल्ली) के इलाके से गुजर […] Read more »
कहानी कहानी/ अपनी-अपनी जिंदगी June 28, 2011 / December 9, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह अमर थोड़ी देर पहले ऑफिस से लौटा था और चाय पीकर निकल पड़ा था यों ही सड़क नापने. चलते-चलते वह सोच भी रहा था कि क्या अजीब मूडी इंसान है वह भी. यह भी पता नहीं क्या करना है? कहाँ जाना है? पर सड़क नापे जा रहे हैं. सीधी सादी जिंदगी थी अमर […] Read more » life जिंदगी
कहानी कहानी/ एक बार फिर June 23, 2011 / December 11, 2011 by राजनारायण बोहरे | Leave a Comment राजनारायण बोहरे वे फिर आ गये हैं। आज हर जगह यही सुनने को मिल रहा है। चारों घरों में यही चर्चा हैं। भीतर पहुंचते ही घर का कोई सदस्य फुसफुसाते हुये यह सूचना देता है और चुप हो जाता है। सूचना देने वाले के चेहरे पर दहशत के भाव झांकते हैं और उसकी आंखें फिर […] Read more » Story
कहानी कहानी/ स्वप्न संसार June 12, 2011 / December 11, 2011 by आर. सिंह | Leave a Comment आर. सिंह राज ने आज फिर वह स्वप्न देखा. वही मासूम चेहरा, वही बड़ी-बड़ी आँखें और उन झील जैसी आँखों में गहरी उदासी. आज भी राज को लग रहा था कि वह लडकी उससे कुछ कहना चाहती थी, पर न जाने क्यों उसके होठ केवल फड़फड़ा कर रह जाते थे? उसके बाद राज की नींद खुल […] Read more »
कहानी कहानी/क्षुद्रता की प्रतियोगिया June 4, 2011 / December 11, 2011 by गंगानन्द झा | 1 Comment on कहानी/क्षुद्रता की प्रतियोगिया गंगानन्द झा श्री विक्रमादित्य झा और प्रो. जीवनलाल मिश्र मिथिला के निम्न-मध्यवर्गीय पृष्ठभूमि से थे, अपने अपने परिवारों के पहली पीढ़ी तथा तथा अभी तक के एकमात्र सदस्य, जो परम्परागत पृष्ठभूमि से उभड़कर आधुनिकता के परिवेश में जगह बनाने के अवसर के लाभ ले रहे थे। श्री विक्रमादित्य झा (बैंक के अधिकारी) अपनी भतीजी के […] Read more »
कहानी कहाँ जायेगा विजय..!!! June 2, 2011 / December 12, 2011 by प्रत्यूष मिश्र | 3 Comments on कहाँ जायेगा विजय..!!! ”गुलाबी सपनों का शहर जयपुर और इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते यहाँ के शॉपिंग मॉल्स,शाम गहराते ही जहाँ यूँ लगता है मानो इसकी भव्यता देखने को ही सूरज दुसरे छोर पर जा छुपा है.हाथ में हाथ डाले जोड़े ,अपनी गुफ्तगू में मशगूल तमाम युवक युवतियां ,खरीददारी करने आये लोगों का उत्साह उस पर तमाम […] Read more »
कहानी कहानी/ फ़ैसला June 1, 2011 / December 12, 2011 by दिव्या माथुर | Leave a Comment दिव्या माथुर सोफ़े पर अधलेटा सा सन्नी मेज़ पर अपनी टांगे पसारे टी वी पर समाचार देख रहा था. जेड गूडि की आकस्मिक मृत्यु की ख़बर सुन कर वह मन ही मन कलपने लगा कि वह कहाँ रेचल मूर से ब्याह रचा के फंस गया. जेड का इक्कीस साल का ब्वाय फ़्रैंड उसके बच्चों को […] Read more »
कहानी डम्पू हुआ घायल May 29, 2011 / December 12, 2011 by जीतेन्द्र कुमार नामदेव | Leave a Comment सुबह सवेरे बच्चे डम्पू के साथ खेल रहे थे कि डम्पू अचानक दूसरे माले से नीचे जा गिरा। घटना में डम्पू की हालत बहुत गंभीर हो गयी। रामनाथ जी डम्पू की इस हालत को देखकर परेशान हो गये और तुरंत ही भागते दौड़ते डम्पू के उपचार के लिए गये। गांव में डम्पू का इलाज करने […] Read more » डम्पू हुआ घायल
कहानी कहानी/पतंग May 28, 2011 / December 12, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment जितेन्द्र कुमार नामदेव शाम के 6 बजते-बजते सभी लोग आफिस छोड़ कर अपने-अपने घर को निकल गये थे। गर्मी का मौसम था, दिन भर की गर्मी के बाद शाम को आंधी चलने लगी थी जिसकी वजह से मौसम काफी सुहाना हो चुका था। मैं भी अपना काम खत्म करके आफिस की छत पर पहुंचकर मौसम […] Read more »
कहानी ’’ खिलोना माटी का ’’ May 27, 2011 / December 12, 2011 by जोली अंकल | 4 Comments on ’’ खिलोना माटी का ’’ एक लड़की मरने के बाद भगवान के द्वार पर पहुंची तो प्रभु उसे देख कर हैरान हो गये कि तुम इतनी जल्दी स्वर्गलोक में कैसे आ गई हो? तुम्हारी आयु के मुताबिक तो तुम्हें अभी बहुत उम्र तक धरती पर जीना था। उस लड़की ने प्रभु परमेश्वर को बताया कि वो किसी दूसरी जाति के […] Read more » खिलोना माटी का ’’
कहानी मिसेज बेरी May 22, 2011 / December 12, 2011 by आर. सिंह | 1 Comment on मिसेज बेरी मिसेज बेरी को आज फिर घर से निकलने में देर हो गयी थी.उनकी कोशिश तो यही रहती थी कि वह इसके पहले वाली बस पकड लें.उसके दो लाभ थे.एक तो वे समय पर आफिस पहुँच जाती थी,दूसरे उस बस में उनके मनपसंद की जगह मिल जाती थी,क्योंकि वह बस उनके घर से कुछ ही पहले […] Read more » मिसेज बेरी
कहानी ये जो अदृश्य है May 19, 2011 / December 13, 2011 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment प्रमोद भार्गव ऊं भूर्भव: तत्सवितुवरेण्यं भर्गोदेवस्य… ”ओह ! माँ का फिर फोन…” बकुल गुड़गाँव जाने के लिए तैयार होते हुए चहकी। माँ की तीन साल से बरकरार वही चिरंतन चिंता…, ‘उम्र फिसल रही है। पीयूष यदि पसंद है तो उसकी रजामंदी लेकर अंतिम फैसला ले…। अन्यथा वे कहीं और लड़का देखें। साथ ही वे अपनी […] Read more »