कहानी साहित्य खुंखार कुत्ता भीगी बिल्ली बना March 5, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा. राधेश्याम द्विवेदी एक बादशाह अपने खुंखार कुत्ते के साथ नाव में बैठकर यात्रा कर रहा था। उस नाव में अन्य यात्रियों के साथ एक दार्शनिक भी था। उस कुत्ते ने कभी नौका में सफर नहीं किया था, इसलिए वह अपने को सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। वह उछल-कूद कर रहा था और […] Read more » खुंखार कुत्ता भीगी बिल्ली
कहानी साहित्य अजनबीपन और मासूमियत March 5, 2017 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | 4 Comments on अजनबीपन और मासूमियत डा. राधे श्याम द्विवेदी एक पाँच साल का मासूम सा बच्चा अपनी छोटी बहन को लेकर एक मंदिर में एक तरफ कोने में बैठा हाथ जोडकर भगवान से न जाने क्या मांग रहा था । उसके कपड़े में मैले से लग रहे थे मगर वह साफ जैसा दिख रहा था। उसके नन्हें- नन्हें से गाल […] Read more » अजनबीपन मासूमियत
कहानी साहित्य टिया और मैं February 13, 2017 by गंगानन्द झा | Leave a Comment एक मशहूर पौराणिक कथा से बात शुरु होती है। नारद मुनि को हाथ में तेल से लबालब भरा कटोरा लिए राजर्षि जनक के बाग का पूरा चक्कर लगाने को कहा गया था। शर्त थी कि तेल की एक भी बूँद छलकने नहीं पाए। मुनिवर ने सफलतापूर्वक चक्कर लगाया। अब उनसे बाग का वर्णन देने को […] Read more » टिया और मैं
कहानी साहित्य प्यार की गरमी January 16, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment मोहन उनकी इरादे समझ गया। वह बोलना तो नहीं चाहता था, पर आज उससे रहा नहीं गया, ‘‘हां, ठीक कहते हो। तुम्हारे स्वेटर और कोट इतने गरम हो भी नहीं सकते। चूंकि उनमें पैसों की गरमी है और मेरे स्वेटर में दीदी के प्यार की गरमी। सब लड़कों का मुंह बंद हो गया। Read more » warmth of love प्यार की गरमी
कहानी साहित्य लघुकथा : बचपन की पूंजी January 12, 2017 by विजय कुमार | Leave a Comment घर में सब लोग साथ बैठकर खाना खा रहे थे। चार साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग सब वहां थे। मां सेब काट कर सबको दे रही थीं। जब उन्होंने चार साल के चुन्नू को भी एक फांक दी, तो वह मचलता हुआ बोला, ‘‘मैं दो सेब लूंगा।’’ मां ने चाकू […] Read more » बचपन की पूंजी
कहानी साहित्य डायल कुमार फॉर किलिंग December 26, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment “कुमार तुम्हारे कारण मेरी ज़िन्दगी खराब हुई और मैंने तुम्हें इस बात की सजा दी. एक महीने पहले उन तीनों ने मुझे जहर देकर मार डाला था और किरण ने ये इसलिए किया था ताकि वो मेरी दौलत के साथ तुमसे मिलकर जीवन जी सके. लेकिन जैसे कि कहते है कि बुरा करो तो वो वापस जरूर आता है. मेरी आत्मा भटकती रही और तुम्हारी राह देखती रही. किरण ने तुम्हें बुलाया और मैंने तुम्हारे बनाए हुए प्लान के अनुसार ही उन्हें डरा कर आत्महत्या करने पर मजबूर किया. वो हत्या भी थी और आत्महत्या भी और तुम्हें आज यहाँ तक पहुंचा दिया ! चलो जल्दी जाओ ! मैं तुम सबसे नफरत करता हूँ. तुम सब अब नरक में मिलना !” Read more » Featured डायल कुमार फॉर किलिंग
कहानी साहित्य अकबर बीरबल के मुलाकात की दो प्रमुख प्रारम्भिक कहानियां December 21, 2016 by डा. राधेश्याम द्विवेदी | Leave a Comment डा.राधेश्याम द्विवेदी पहली कहानी अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वह किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला […] Read more » अकबर बीरबल
कहानी साहित्य कैलाश September 26, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment आह ! क्या दिन है थोड़ी – थोड़ी ठंड पड़नी शुरू हो गई थी साथी संग कैलाश ठंड से ठिठक रहे थे । कैलाश अभी 10 साल का है और 7वीं कक्षा में पढ़ रहा है, इनकी दो बहने है और दो भाई है, कैलाश परिवार में सबसे छोटा है इस कारण माँ का लाड़ला […] Read more » Featured कैलाश
कहानी साहित्य मेन इन यूनिफ़ॉर्म September 24, 2016 by विजय कुमार सप्पाती | Leave a Comment धाँय ….धाँय ….धाँय ….. तीन गोलियां मुझे लगी ,ठीक पेट के ऊपर और मैं एक झटके से गिरा….गोली के झटके ने और जमीन की ऊंची -नीची जगह के घेरो ने मुझे तेजी से वहां पहुचाया , जिसे NO MAN’S LAND कहते है … मैं दर्द के मारे कराह उठा.. पेट पर हाथ रखा तो देखा […] Read more » Featured मेन इन यूनिफ़ॉर्म
कहानी साहित्य सखी वे मुझसे कह कर जाते.. September 15, 2016 by आर. सिंह | Leave a Comment “सिद्धि हेतु स्वामी गए यह गौरव की बात पर चोरी चोरी गए यही बड़ा व्याघात. सखी वे मुझसे कह कर जाते”, —‘यशोधरा’ मैथिलीशरणगुप्त. ” भाई साहिब क्या आप जल्द से जल्द इस अस्पताल में पहुँच सकते हैं?” कोकिला. मैं तो अवाक रह गया.मेरे फोन पर यह सन्देश मेरी मुंह बोली बहन कोकिला का था,पर यह […] Read more » सखी वे मुझसे कह कर जाते..
कहानी साहित्य बेबसी के आंसू September 13, 2016 / September 14, 2016 by राजू सुथार | Leave a Comment अकाल तो दिख ही रहा था , और दूसरी ओर चुनाव कदमों में थे । मीरपुर गांव में इन दिनों विधायक के चुनाव होने वाले थे इस कारण हर जगह राजनीतिज्ञों का धूम धड़ाका हो रहा था । बरसात की ऋतु थी किन्तु इस बार अकाल ही दिख रहा था अर्थात अभी तक इन्द्र देव […] Read more » बेबसी के आंसू
कहानी साहित्य बाप जी की दुकान September 5, 2016 by विजय कुमार | 1 Comment on बाप जी की दुकान यों तो हर गांव और नगर में चौक होते हैं; पर लखनऊ के चौक की बात ही कुछ और है। यह केवल एक चौराहा नहीं, बल्कि 200 साल पुराना बाजार और घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है। इसलिए इसे ‘पुराना शहर’ भी कहते हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध चिकन की कढ़ाई वाले कपड़े यहां सबसे अच्छे […] Read more » बाप जी की दुकान