कविता मुझे भी तो चाहिए आजादी July 13, 2024 / July 13, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment दीपा लिंगढियागरुड़, बागेश्वरउत्तराखंड मुझे भी तो चाहिए आजादीहां, थी मैं अनजान की,दुनिया ऐसी भी होती है,बचपन की हर बात याद आती है,तुम किसी से बात नहीं कर सकती,लड़की हो, अपनी मर्यादा में रहो,तुम सिर्फ घर के ही काम करो,तुम ही घर की इज्जत हो,अपनी नजरें झुकाकर रखो,तुम्हें कल पराये घर जाना है,हर चीज को तरीके […] Read more » I also want freedom
कविता बच्चों का पन्ना बातों का बाजार गरम है July 9, 2024 / July 9, 2024 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment पर्यावरण प्रदूषण की अब,बातों का बाजार गरम है। हम-तुम-सबको, बात पता हैपर्यावरण प्रदूषण फैला।जल- जंगल -जमीन अब मैली,वातावरण हुआ है मैला।बिना रुके फिर भी धरती परढाया जाता रोज सितम है। चौपहिया,दो पहिया वाहन,बने प्रदूषण के हरकारे।मिलें,कलें भी बाँट रहे हैं,नभ में जहरीले गुब्बारे।पर्यावरण प्रदूषण होगा,बोलो कब! क्या !कभी खतम है? विज्ञापन, अखवारों वाले,पर्यावरण बचाते दिखते।मिटे […] Read more » बातों का बाजार गरम है
कविता सब अपने हिस्से का कर्तव्य करें मनुज का उद्धार कर July 1, 2024 / July 1, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकहे भाई! उम्मीद नहीं कर उम्मीद नहीं करहे भाई! दूसरों से कुछ भी उम्मीद नहीं करबहुत अधिक दुख होता है उम्मीद टूटने पर,मगर दूसरों की उम्मीद पर सदा खरा उतर! हे भाई! उम्मीद नहीं कर उम्मीद नहीं करहे भाई! धोखा मिलता है उम्मीद पालने परदूसरों की उम्मीद पर जीवन जीना है दूभरमानव प्रयत्न […] Read more » Everyone should do their part and save Manuj.
कविता मेरा भारत महान July 1, 2024 / July 1, 2024 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment मैंने अपने भारत को मरते देखा हैसिसकते देखा है| मैंने अपने भारत को मरते……… अबलाओ की अस्मिता कोविज्ञापनों की जलधारा में बहते देखा हैमैंने अपने भारत को मरते……… अपनी संस्कृति को अधर्म की आंधियो के थपेड़ों सेटकराकर उखड़ते देखा हैमैंने अपने भारत को मरते……… धर्म के स्तंभों कोविधर्मी शक्तियों द्वारा ढहते देखा हैमैंने अपने भारत […] Read more »
कविता हौसलों से भरी जिंदगी की रफ्तार June 24, 2024 / June 24, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मानसी कुमारीवर्ग- 9वींउच्च माध्यमिक विद्यालय जारंग पूर्वी,गायघाट, मुजफ्फरपुर, बिहार आसमान से ऊंचा और,हौसलों से भरी जिंदगी की रफ्तार,आओ कुछ ऐसा काम कर जाएं,के सबसे ऊंचा हो अपना नाम,मेहनत की कलम से,लिखें कुछ ऐसी किस्मत अपनी,के अब एक नई शुरुआत की जाए,क्यों भरोसे बैठे अपनी किस्मत पर?हवाओं से भी ज्यादा रफ्तार की जाए,सुनी सुनाई बातों पर […] Read more » pace of life full of enthusiasm
कविता नशे की चपेट में आने लगे है युवा June 24, 2024 / June 24, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment गरिमा जोशीउत्तरौड़ा, कपकोटबागेश्वर, उत्तराखंड नशे की चपेट में,आने लगे हैं युवा,मां-बाप से मुंह,मोड़ने लगे हैं युवा,बीड़ी, तंबाकू और गुटखा,खाकर बर्बाद हो रहे हैं युवा,गंदे-गंदे शब्दों का,प्रयोग कर रहे हैं युवा,अपने भविष्य के बारे में,कुछ सोच नहीं पा रहे हैं युवा,नशे की चपेट में आकर,अपना भविष्य बिगाड़ रहे हैं युवा,अगर नही हुआ इस पर काबू,तो बड़ा […] Read more » नशे की चपेट में आने लगे है युवा
कविता आओ हम मिलकर योग करें। June 20, 2024 / June 20, 2024 by अजय एहसास | Leave a Comment तुम योग करो वो योग करे,हम योग करे सब योग करेंकरें स्वस्थ कामना रहने की,आओ हम मिलकर योग करें। खाने को घर में रहे नहीं,फिर भी मुंह से कुछ कहें नहीसब पूजा, दुआ कराते हैं ।,पर फिर भी कुछ तो लहे नहींसरकार हमारी कहती है ,कि आओ नया प्रयोग करेंकरें स्वस्थ कामना रहने की,आओ हम […] Read more » योग
कविता मेरी लाज तुम्हारे हाथ, पवनसुत अंजनी के लाला June 18, 2024 / June 18, 2024 by नन्द किशोर पौरुष | Leave a Comment मेरी लाज तुम्हारे हाथ, पवनसुत अंजनी के लाला -2हो मेरी लाज तुम्हारे हाथ -2, पवनसुत अंजनी के लाला | मेरी लाज तुम्हारे हाथ….. Read more »
कविता अब कोई सपना नहीं June 17, 2024 / June 17, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अब कोई सपना नहीं।सब टूट गया सपना वहीं।।जब बेटी ने जन्म लिया।तब पिता की आंखें नम हुई।अब जितना मैं कमाऊंगा।संजोकर उसे रख पाऊंगा।ताकि बेटी की शादी में।दहेज लूटा मैं पाऊंगा।।कहते हैं सब, वह बेटी है।तो क्या उसका मान नहीं?जन्म से पराया बना के।क्या उसका आत्म सम्मान नहीं?क्या लिखी है उसकी किस्मत में?क्या वह माता-पिता की […] Read more » अब कोई सपना नहीं
कविता भगवान राम कृष्ण काल्पनिक नहीं थे June 17, 2024 / June 17, 2024 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअक्सर लोग कहा करते कि राम कृष्ण ब्राह्मणी कल्पना प्रसूत थेफिर क्यों राम कृष्ण कृषक खत्ती-खत्तीय या क्षत्री-क्षत्रिय सपूत थे?क्यों नहीं याजक ब्राह्मणों ने उन्हें कहा है अपने ब्राह्मण वर्ण के?क्यों राम के श्वसुर और सीता के पिता जनक थे हलवाहा कर्म से? क्यों सीता की संज्ञा हल के फाल की जोत सीत […] Read more » भगवान राम कृष्ण काल्पनिक नहीं थ
कविता खोदी धरती बोई बीज June 15, 2024 / June 15, 2024 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment किरण दोसादगरुड़, उत्तराखंड खोदी धरती बोई बीज,ये मिट्टी है बड़े काम की चीज,इसने दिया भोजन हमको,सूरज ने दिया जब ताप,फूटा अंकुर उसमें जब,ऊपर आया अपने आप,ऊपर का संसार उसने पाया सुंदर,लिया जब रुप उसने नन्हे पौधे का,हरा रंग जब उसने पाया,फिर तो सबके मन को भाया,पत्तियों का हरा रंग,क्लोरोफिल कहलाता है,सूरज हवा पानी से मिलकर,वह […] Read more » खोदी धरती बोई बीज
कविता बरेदी June 15, 2024 / June 15, 2024 by श्लोक कुमार | Leave a Comment एक हैं जरिया, दिन दुपहरियासमंदर की भांति उर हैं दरियापशुओं को लेकर चल दिया बरेदीएक बेरा खेवत खलियान,पहने कपड़े आधदूजी बेरा चल दिया चरानेभैंस के पगही बांधओ! बरेदी क्या हयात में यही तुम्हारेकभी खुद को भी मुकुर में संवारेतुम्हारी चाल है गोपियों भांतिलगता , मर्दाना काम न आतीखफा न हो ये चाल भीसमाज को दीमक […] Read more » बरेदी