कविता एक से दस तक गिनती November 16, 2022 / November 16, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment एक बड़े राजा का बेटा, दो दिन से मुर्दा सा लेटा। तीन महात्मा सुन कर आए, चार दवा के वे टुकड़े लाए। पांच मिनिट घिस गर्म कराई छः छः घंटे बाद दवा पिलाई। सातवे दिन कुछ नैना खोले, आठवें दिन रानी से बोले। नवे दिन कुछ हिम्मत आई, दसवें दिन उसने दौड़ लगाई। राजा रानी […] Read more » एक से दस तक गिनती बाल कविता
कविता बेटा बेटी है एक समान November 10, 2022 / November 10, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बेटा बेटी है एक समान,दोनो करते जग निर्माण। अगर बेटा तन है तो बेटी मन है,अगर बेटा अंश है तो बेटी अंश है। अगर बेटा प्राण है तो बेटी जान है ,अगर बेटा शान है तो बेटी गुमाना है। अगर बेटा वारिस है तो बेटी पारस है,अगर बेटा संस्कार है तो बेटी संस्कृति है। अगर […] Read more » son daughter is same
कविता जल है जीवन का आधार November 10, 2022 / November 10, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment अंजली चोरसौ, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड जल है जीवन का आधार। इसे न बनाओ व्यर्थ का आहार।। जल के बिना असंभव जीवन। इसको व्यर्थ न करो तो जीवन संभव।। जल को हमें बचाना है। सुंदर भविष्य बनाना है।। जल है तो कल है। इसी में जीवन का पल है।। जल है जीवन का आधार। इसे न बनाओ […] Read more » जल है जीवन का आधार
कविता दुनिया November 10, 2022 / November 10, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment डॉली गड़िया पोथिंग, कपकोट बागेश्वर, उत्तराखंड ये कैसी अजीब दुनिया है। कहीं झूठे लोग हैं तो कहीं सच्चे।। कहीं अपने हैं तो कहीं पराए। कोई मेहनती है तो कोई आलसी।। मनुष्य खाली हाथ आया है, खाली हाथ जाएगा। दुःख सुख का आना जाना होता है।। जो मेहनत करता है उसे फल भी मिलता है। कभी कांटे बिछेंगे तो कभी […] Read more »
कविता कोई भी अवतार नबी कवि विज्ञानी अंतिम नहीं November 9, 2022 / November 9, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment कोई भी अवतार नबी कवि विज्ञानी अंतिम नहीं—विनय कुमार विनायकक्यों तुम इतने गुस्से में मदहोश होअब तो होश में आओतुम कौन हो? कहां से आए?कैसे जीना कैसे मरना क्या खोए क्या पाए?कुछ तो जान लो ज्ञान लेना ठान लो! अज्ञानी होने के कारण सेतुम ऐसे वैसे अभिमानी बने हुए होये जान लो जितना जानते होउसे […] Read more » No incarnation prophet poet scientist is final
कविता कर्ण को भाग्य से भोग नहीं दुर्योग मिला November 8, 2022 / November 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकभाग्य से भोग नहीं मिलतायोग्य ही योग यत्न से भोग पातायोग्य संयोग से उपलब्धि नहीं पातायोग्य योग्यता से ही सफल होता योग्य कभी संदेह नहीं करतायोग्य सुयोग वियोग से परे होतायोग्य सर्वदा साबित करता योग्यतायोग्य योग क्षेम भी नहीं मानता योग्य बनने के लिए चाहिए योगीसहयोगी योगेश्वर सारथी कृष्ण जैसायोग्य बनने के लिए […] Read more » कर्ण को भाग्य से भोग नहीं दुर्योग मिला
कविता ढूंढते ही रह जाओगे November 7, 2022 / November 7, 2022 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment बातो में कुछ बाते,चीजों में कुछ चीजे,इक्कीसवीं सदी में,ढूंढते ही रह जाओगे। घरों में पुरानी खाट,तराजू के लिए बाट,स्कूलों में बोरी टाट,ठेलो पर अब चाट।ढूंढते ही रह जाओगे।। आंखो में अब पानी,कुएं का ताजा पानी।दादी की अब कहानी,राजा रानी की कहानी,ढूंढते ही रह जाओगे।। शादी में अब शहनाई,कुरते में अब तुरपाई।बड़ों की अब चतुराई,दूसरे के […] Read more » ढूंढते ही रह जाओगे
कविता मातृभाषा और मातृभूमि November 5, 2022 / November 5, 2022 by शकुन्तला बहादुर | Leave a Comment जिन्होंने छोड़ा अपना देश ,उनमें से बहुतों ने छोड़ी,अपनी भाषा अपना वेष।**जो रहते अपने ही देश,उनमें से भी युवा जनों ने,भाषा छोड़ी,त्यागा वेष।**भाषा संस्कृति की संवाहक,वेष देश का है परिचायक।भाषा ही तो अपनी निधि है,उस पर ही निर्भर संस्कृति है।**दोनों का संरक्षण यदि हो जाए,तो देश का गौरव भी बढ़ जाए।हम सब मिलकर करें प्रयास […] Read more » मातृभाषा और मातृभूमि
कविता रहा हूँ November 5, 2022 / November 5, 2022 by रोहित सुनार्थी | Leave a Comment मैं किसी का आसानी से कट जाने वाला दिन तो कभी किसी की नींद से जुदा रात रहा हूँ मैं किसी दोपहरी में जलाने वाला आग का गोला तो कभी किसी की धुप सेकने वाला सूरज रहा हूँ मैं किसी की ज़िन्दगी में पूरा उजाला भरने वाला तो कभी हर दिन घटने वाला और कभी […] Read more » रहा हूँ
कविता अर्जुन जैसे अब नहीं होते अपनों के प्रति अपनापन दिखानेवाले November 5, 2022 / November 5, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअर्जुन जैसे अब नहीं होतेअपनों के प्रति अपनापन दिखानेवालेअब तो तनिक सी बात से शत्रुता हो जातीमरने मारने पर उतारू हो जाते अपनेतुरंत ही दुर्योधन दुशासन सरीखे बन जाते बिना किसी गीता को सुने हमेशा तैयार रहतेमारने पीटने कूटने काटने अपनों को अपने हीजबकि अपनों से छले गए उन छली अपनों के प्रतिअर्जुन […] Read more » Arjun is no more like those who show their affinity towards their loved ones
कविता खुशियों का दीपोत्सव आया October 23, 2022 / October 23, 2022 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment देश में चहुं ओर छाया उजियारा, खुशियों का पर्व दीपोत्सव आया। Read more » दीपोत्सव
कविता हसरत अब दिल में है October 18, 2022 / October 18, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment नीलम ग्रेंडी चोरसौ, गरुड़ बागेश्वर, उत्तराखंड कुछ कर गुजरने की हसरत अब दिल में है। बन्द पिंजरे से निकलने की हसरत अब दिल में है।। खुल कर जी ले अपनी जिंदगी ऐ नारी। जिंदा जज्बात हमारे भी तो दिल में है।। खुले आसमानों में पंख फैलाए। उड़ने की हसरत अब दिल में है।। बहुत मुस्कुरा लिया है दूसरों की खुशी के […] Read more » हसरत अब दिल में है