कविता महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था October 11, 2022 / October 11, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था Read more » Mahabharata was a war between Hakmar and Hakwanchit महाभारत हकमार व हकवंचित के मध्य जंग था
कविता कोई धर्म मजहब बुरा नहीं धर्मगुरु ही पूर्वाग्रही होता October 11, 2022 / October 11, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकउसने नारी को जला दिया फिर इसने भी जला दियाउसने बलात्कार किया फिर इसने भी बलात्कार कियावो दुष्ट अगर मोमिन था तो ये दुष्ट काफिर निकला! आखिर क्यों हर मतावलंबी बुराई का ही नकल करताधर्म और मजहब से आचार-विचार क्यों निकल जाता? आखिर क्यों नहीं मानव सद्विचार को ग्रहण करता?दुष्कर्म करके आखिर क्यों […] Read more » No religion religion is bad only the religious leader is prejudiced कोई धर्म मजहब बुरा नहीं धर्मगुरु ही पूर्वाग्रही होता
कविता सबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना October 8, 2022 / October 8, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकसारे मानव भाई है सबके सब एक हीसबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना! हर देवालय में देव बसे हैं एक ही जैसेउन्हें खुद से अलग नहीं कोई दूजा पराया समझना! सबकी देह से नेह स्नेह कर ले बन्देदेह सभी मंदिर है जिसमें एक रब का है आशियाना! मंदिर मस्जिद गिरजाघर […] Read more »
कविता शस्त्र द्वारा रक्षित देश में शास्त्रों का सद्चिंतन संभव है October 1, 2022 / October 1, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment ( शस्त्रेण रक्षिते देशे शास्त्रचिन्ता प्रवर्तते )—विनय कुमार विनायकशस्त्र द्वारा रक्षित राष्ट्रों में हीशास्त्रों का सद्चिंतन संभव होताशस्त्र जिस देश में झुक जाएगावहां अराजकता का कलरव होता! जहां ढोंगी पोंगापंथी कठमुल्ला गाल बजाएगाशस्त्र जहां अहिंसा परमोधर्म का गीत सुनाएगाअर्जुन गीता ज्ञान शर संधान से मुकर जाएगासमझ लीजिए वहां शीघ्र ही दुर्दिन आ जाएगा! कोरा किताबी […] Read more » Contemplation of scriptures is possible in a country protected by weapons शस्त्र द्वारा रक्षित देश
कविता असफाक उल्ला: ‘खुदा से जन्नत के बदले एक नया जन्म मांगूंगा’ September 28, 2022 / September 28, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकअमर शहीद असफाकउल्लाह ने एक गजल गाया था,जिसमें हिन्दू मुस्लिम को एकता का पाठ पढ़ाया था! “जाऊंगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जाएगा.जाने किस दिन हिन्दोस्तां आजाद वतन कहलायेगा! बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं फिर आऊंगा फिर आऊंगा,ले नया जन्म ऐ भारत मां! तुमको आजाद कराऊंगा! जी करता है मैं भी […] Read more » असफाक उल्ला
कविता कृपा करो मां दुर्गा September 28, 2022 / September 28, 2022 by दीपक कुमार त्यागी | Leave a Comment तेरे इंतज़ार में मां दुर्गा हम लोग,कब से तेरे दर पर यूं ही बैठे हैं। काश तुम जल्दी से दर्शन दे दो,यह आस हम लोग लगाए बैठे हैं। दृढ़ विश्वास है हमें कि एक दिन,आप हालात हमारे अवश्य समझोगी। दिल में छुपे हुए जज़्बातों का तुम,मां दुर्गा मोल अवश्य एक दिन समझोगी। दुःख दर्द चलते […] Read more » please maa durga bless us
कविता चीनी छात्र फाहियान ह्वेनसांग इत्सिंग आदि ने भारत में निशुल्क शिक्षा पाई थी September 27, 2022 / September 27, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमान न मान तीन चीनी छात्र धर्मयात्री फाहियान (337-422ई)ह्वेनसांग (602-664ई)और इत्सिंग थे बड़े महानजिन्होंने भारत में पाए संस्कृत व बौद्धधर्म ज्ञान! तीनों ने चीन में फैलाए बौद्ध धर्म और दर्शनलिखकर अपनी आत्मकथा और यात्रा विवरणजो बौद्ध कालीन इतिहास लेखन का प्रमाण! चौथी शताब्दी में रेशममार्ग से मध्य एशियाई देशों से होकरभारतीय उपमहाद्वीप के […] Read more » Chinese student Fahien Hiuensang Itsing ह्वेनसांग इत्सिंग
कविता माता पिता गुरु ईश्वर इंसान व इंसानियत पर आस्था हो September 19, 2022 / September 19, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकजीवों की सृष्टि प्राकृतिक नैसर्गिक क्रिया हैजबकि नामकरण धर्माचरण व संस्कारवरणआरोपित बाह्य विशेषण थोप दिया गया है! अन्य जीव जन्तुओं की तरह मनुष्य भीबेनाम बिना धर्म बिना संस्कार के जन्म लेतेकिन्तु समस्त मानव जाति की खासियत हैकि मानव बिना नाम बिना धर्म के नहीं रहते! पूरी दुनिया में जन्म लेते ही शिशु को […] Read more » माता पिता गुरु ईश्वर इंसान व इंसानियत पर आस्था हो
कविता लेख पाटलिपुत्र का गुप्त राजवंशी सम्राट September 15, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमहान मौर्य के शौर्य सूर्य काजब हुआ अवसानवैकि्ट्रया के ग्रीक, पार्थिया के पहलव,मध्य एशिया के शक-कुषाण सेक्रमशः देश हुआ आक्रांतशुंग-काण्व-सातवाहन-भारशिव-वाकाटक जैसेब्राह्मणी शक्तियों की यद्यपि थी निराली शानकिन्तु देश खंडित-जर्जर थाविदेशी दासता का भी डर थाकौन दिलाए देश को स्थायित्व खुशहालीऔर आक्रांताओं से त्राण? तभी एक चन्द्रवंशी वणिक कीफड़क उठी भुजाएंउठा तलवार विद्रोही-आक्रांताओं परदेश […] Read more »
कविता शांति की शुरुआत मुस्कुराते चेहरे से ही होती है September 13, 2022 / September 13, 2022 by विनय कुमार'विनायक' | Leave a Comment —विनय कुमार विनायकमुसकुराकर जीना सीख लोकि शांति की शुरुआतमुस्कुराते चेहरे से ही होती है! मुखौटा लगाना छोड़ दोकि रिश्ते की शुरुआतमासूमियत भरे सूरत से ही होती है! धर्म को बीच में आने नहीं दोकि दोस्ती की शुरुआतधर्म नहीं विचार के मिलन से होती है! मजहब को ओढ़ना बिछाना छोड़ दोकि मानवता की सोचमजहबी उन्माद के […] Read more » Peace begins with a smiling face शांति की शुरुआत मुस्कुराते चेहरे से ही होती है
कविता अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी September 10, 2022 / September 10, 2022 by चरखा फिचर्स | Leave a Comment मंजू धपोला कपकोट, बागेश्वर उत्तराखंड अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी। वह चार थे और बेचारी अकेली खड़ी थी।। बेदर्द है जमाना सुना था उसने। लग रहा था वह बेदर्दी देखने वाली थी।। कोमल से हाथो को कस के पकड़ा था उन जालिमों ने। और वो बस दर्द से वह चीख रही […] Read more » अकेले उन रास्तों में वह सहम सी गई थी
कविता मुखौटा September 9, 2022 / September 9, 2022 by लक्ष्मी अग्रवाल | Leave a Comment मुखौटों का शहर है यह जनाब !यहाँ चेहरे पर ‘हर कोई सजाए बैठा है हिज़ाब।बड़ी लाजबाव चीज है यहगुण हैं इसके बेहिसाब। चेहरे पर डाल देता है यहएक आकर्षक आवरणअसलियत छिपाने का नहीं कोईइससे बेहतर माध्यम। चेहरे की धूर्तता छिपाते यहबड़ी आसानी सेसजाकर इसको पाखंडी भी लगतेसज्जन-दानी से। किसी के अश्कों को बड़ी संजीदगीसे छिपा […] Read more » मुखौटा